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नए स्वरूप के साथ अस्तित्व में आया बीड़ा सबसे पहले यूआईटी मर्ज, 363 गांव शामिल

भिवाड़ी इंटीग्रेटेड डवलपमेंट अथॉरिटी (बीड़ा) को लेकर चल रही ऊहापोह की स्थिति अब समाप्त हो गई है। बीड़ा के गठन के...

Dainik Bhaskar

Apr 03, 2018, 03:45 AM IST
भिवाड़ी इंटीग्रेटेड डवलपमेंट अथॉरिटी (बीड़ा) को लेकर चल रही ऊहापोह की स्थिति अब समाप्त हो गई है। बीड़ा के गठन के बाद सबसे भिवाड़ी यूआईटी को इसमें शामिल किया है। ऐसे में यूआईटी अब अलग से एजेंसी ना रहकर बीड़ा बन गई है। यूआईटी सचिव को बीड़ा का पहला सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) बनाया गया है। बीड़ा बनने से क्षेत्र का विकास होगा। इसमें आसपास की पांच तहसीलों के 363 गांव भी शामिल किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 30 जून 2016 को क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों के गठन का एक्ट अधिसूचित किया था। राजस्थान सरकार के दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (डीएमआईसी) विभाग के इसी एक्ट के तहत राजस्थान में सबसे पहले बीड़ा का गठन किया गया है। इसमें राज्य सरकार ने 28 मार्च 2018 को आदेश जारी कर दिए।



यूआईटी का काम अब बीड़ा देखेगी

यूआईटी को सबसे पहले बीड़ा में शामिल किया गया। ऐसे में यूआईटी की सभी जिम्मेदारी और संपत्तियां अब बीड़ा देखेगी। यूआईटी का इस सत्र का करीब 83 करोड़ का बजट भी बीड़ा में जाएगा। राज्य सरकार बीड़ा के लिए पांच करोड़ रुपये अतिरिक्त देेगी। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार भी इसमें मदद करेगी। यूआईटी में सोमवार को इस संबंध में पत्र आया है।

विकास को लगेंगे पंख

बीड़ा के गठन के बाद अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार काम होंगे। कोटकासिम में अटका कार्गाें एयरपोर्ट का काम भी इसके गठन के बाद अपनी रफ्तार पकड़ सकता है। बीड़ा में पांच पंचायत समितियों के 363 गांवों का विकास होगा। इन्हें एक विशेष विनिधान रीजन घोषित किया गया है। इसे भिवाड़ी इंटीग्रेटेड टाउनशिप (बीआईटी) के नाम से जाना जाएगा।

यह होगा स्वरूप

इसमें प्रभारी मंत्री, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरीडोर विभाग, राजस्थान सरकार को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अतिरिक्त अलवर सांसद, मुंडावर विधायक, बहरोड़ विधायक, किशनगढ़बास विधायक, तिजारा विधायक, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरीडोर विभाग का प्रभारी सचिव या उसका प्रतिनिधि जो संयुक्त/ उप शासन सचिव की रैंक से नीचे का ना हो, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरीडोर विभाग का आयुक्त या उसका प्रतिनिधि जो अपर आयुक्त की रैंक से नीचे का ना हो, प्रबंध निदेशक, रीको या उसका प्रतिनिधि जो सलाहकार की रैंक से नीचे का ना हो, जिला कलक्टर अलवर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद अलवर एवं अतिरिक्त मुख्य अभियंता (एनसीआर) जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अलवर को इसका सदस्य बनाया गया है। वहीं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जो राज्य सरकार की ओर से नियुक्त किया जाए वह इसका सदस्य-सचिव होगा।

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