--Advertisement--

76 साल की उम्र, 208 देशों की 30 हजार डाक टिकटों का संग्रह

करीब 66 वर्ष पहले दिल्ली के लोधी रोड स्थित सिंधी स्कूल की कक्षा पांच में पढऩे वाले 10 साल के एक बच्चे के मन में उसके...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 04:05 AM IST
76 साल की उम्र, 208 देशों की 30 हजार डाक टिकटों का संग्रह
करीब 66 वर्ष पहले दिल्ली के लोधी रोड स्थित सिंधी स्कूल की कक्षा पांच में पढऩे वाले 10 साल के एक बच्चे के मन में उसके शिक्षक की एक प्रेरणा ने ऐसी ललक जगाई कि वह उसे आज 76 साल की उम्र हो जाने के बाद भी जज्बे के साथ सहेजे हुए हैं। दिल्ली निवासी 76 वर्षीय जवाहर इसरानी 66 साल की मेहनत के बाद दुनिया के 208 देशों की 30 हजार से अधिक डाक टिकटों का संग्रह कर चुके हैं। जिनके माध्यम से वो बच्चों को शिक्षित करने की अनूठी पहल कर रहे हैं।

इसरानी एक जापानी कंपनी में निरीक्षण अभियंता के रूप में काम करते हैं। इन दिनों वो कंपनी के कार्य से भिवाड़ी में ठहरे हुए हैं। भास्कर ने उनसे मुलाकात कर उनकी इस अनूठी रूचि और उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचकर भी जज्बे को बनाए रखने को लेकर बातचीत की। इसरानी दिल्ली की दिलशाद कॉलोनी में रहते हैं। बंटवारे के समय उनका परिवार पाकिस्तान से भारत आया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लोधी रोड के एक सिंधी स्कूल में हुई। जहां डॉ. मोतीलाल जोतवानी उनके शिक्षक थे। जिन्होंने एक दिन प्रत्येक बच्चे को किसी ना किसी चीज में रूचि रखने के बारे में प्रेरित किया। जोतवानी को बाद में हालांकि सरकार ने पदम श्री से सम्मानित भी किया था। अपने शिक्षक की प्रेरणा पांचवीं कक्षा के विद्यार्थी जवाहर इसरानी के मन में ऐसी बैठी कि उन्होंने उसी दिन से डाक टिकटों का संग्रह करना शुरू कर दिया। जो आज 76 साल की उम्र में भी उसी जज्बे के साथ अनवरत जारी है।

5वीं कक्षा में बनी हॉबी को 66 साल बाद भी जवां बनाए हुए हैं इसरानी, डाक टिकटों से बच्चों का बढ़ाते हैं ज्ञान

भिवाड़ी. टिकट संग्रह दिखाते इसरानी।

इस तरह है अनोखी पहल

इसरानी अब तक दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, गुरूग्राम, पानीपत, सोनीपत, भटिंडा, लुधियाना, दुर्गापुर, भिलाई, विशाखापटनम, राउरकेला, बोकारो, आसनसोल, धनबाद, सिली गुड़ी, कटनी, रांची, कोटा, ग्वालियर, भीलवाड़ा, भरतपुर, जयपुर, मोहाली, बोलानी सहित देश के विभिन्न शहरों में अपने संग्रह का प्रदर्शन कर स्कूलों, कॉलेजों, कार्यालयों व संस्थाओं में कर चुके हैं। उनका कहना है कि इस तरह की चीजों को देखने के बाद बच्चों के मन में उत्सुकता बढ़ती हैं। बाद में बच्चें उसे जानने के लिए इंटरनेट पर उसका गहन अध्ययन भी करते हैं। इससे सामान्य ज्ञान तो बढ़ता है तथा दूसरे देशों की भूगोल, संस्कृति तथा वहां के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।

X
76 साल की उम्र, 208 देशों की 30 हजार डाक टिकटों का संग्रह
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..