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शराब ठेकों पर शिकंजा कसा तो अधिकारियों को टारगेट पूरा करने में आ जाएंगे पसीने

आबकारी विभाग के अधिकारियों की नाक के नीचे भिवाड़ी से लेकर टपूकड़ा तक शराब ठेकों की अवैध ब्रांचें बेरोकटोक...

Dainik Bhaskar

Apr 07, 2018, 02:50 AM IST
शराब ठेकों पर शिकंजा कसा तो अधिकारियों को टारगेट पूरा करने में आ जाएंगे पसीने
आबकारी विभाग के अधिकारियों की नाक के नीचे भिवाड़ी से लेकर टपूकड़ा तक शराब ठेकों की अवैध ब्रांचें बेरोकटोक संचालित हो रही है। सहज उपलब्धता व सुविधाजनक स्थानों के हिसाब से तमाम नियम कायदों को ताक पर रखकर अवैध तरीके से ब्रांचें संचालित की जा रही है। लाइसेंसशुदा ठेकों पर दिन में निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलने से लेकर रात में आठ बजे के बाद भी ठेकों से शराब की बिक्री का खेल चल रहा है। ये सारे अवैध कार्य ऐसा नहीं है कि आबकारी विभाग की जानकारी में नहीं लेकिन समस्या यह है कि यदि विभाग के अधिकारियों ने इन पर शिकंजा कसा तो उनकी टारगेट रेड जाेन में अा जाएंगें। भास्कर ने इस मामले को लेकर विभाग की कमजोर नब्ज जानी तो चौंकाने वाली चीजे सामने आई। सरकार व कोर्ट की ओर से शराब ठेकों को लेकर तमाम तरह की सख्ती किए जाने के बावजूद भी सांठगांठ के जरिए ठेकों की अवैध ब्रांचों का खुलाखेल इलाके में काफी समय से चला आ रहा है। ज्ञातव्य है कि शिक्षण संस्थान, धार्मिक स्थल व आबादी क्षेत्र में दुकानें खोलने पर पाबंदी लगाई हुई है। लेकिन इसके बाद भी इन्हें न तो आवासीय सोसायटियों की चिंता है न स्कूलों की। अवैध दुकानें खुलने को लेकर लोगों का विरोध भी बढ़ रहा है लेकिन अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है।


भिवाड़ी. मुसारी रोड पर संचालित शराब की अवैध ब्रांच।

आप भी जानिए इस कमजोर कड़ी को

भास्कर ने मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि यदि ठेकों का संचालन नियमों के हिसाब से होने लगे तो शराब की बिक्री में गिरावट दर्ज होगी। बिक्री में गिरावट हुई तो विभाग का राजस्व घटेगा। राजस्व घटने और निर्धारित टारगेट पूरा नहीं होने पर आबकारी विभाग के संबंधित अधिकारी को जवाब देना होता है। यही कारण है कि आबकारी विभाग जहां अपने टारगेट पूरा करने की कशमकश में लगा रहता है वहीं ठेका संचालक इसका लाभ उठाकर अपनी मनमर्जी करने में लगे हैं। यही कारण है कि विभाग के अधिकारी शराब ठेकों पर नियमों की पालना कराने में असहाय नजर आते हैं।

विभागीय अधिकारियों को कुछ भी नहीं आता नजर

भले ही शराब ठेकों पर लोगों से निर्धारित मूल्य से अधिक की वसूली, निर्धारित समय के बाद ठेकों का संचालन का मामला हो या फिर अवैध ब्रांचों पर शराब की बिक्री, जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों को यहां कुछ भी नजर नहीं आता। शिकायतों पर अधिकारी कार्रवाई करने की बात तो कहते है लेकिन कभी प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली।

न आबादी क्षेत्र को बख्शा न स्कूल को

सूत्रों ने बताया कि अलवर मेगा हाइवे पर स्थित क्रिश सिटी के समीप एक अस्थाई खोके में अवैध शराब की ब्रांच संचालित हो रही है। यहां सुबह से लेकर देर रात तक नशेबाजों का जमघट लगा रहता है। सोसायटी की महिलाओं का यहां से आना-जाना होता है, जिनके साथ भी कई बार घटनाएं हो चुकी है। खोके को दूसरे से देखने पर यह प्रतीत ही नहीं होता कि यहां शराब भी मिलती होगी। इसी तरह नसोपुर के सरकारी स्कूल के पास भी एक अवैध ब्रांच संचालित हो रही है। हाइवे पर टपूकड़ा के खालसा होटल के समीप, कमालपुर में बडवे कंपनी के पास एक अवैध ब्रांच का संचालन हो रहा है। वहीं टपूकड़ा के मुसारी रोड पर हाइवे से महज 150 मीटर की दूरी पर लाइसेंसशुदा ठेके की तर्ज पर एक दुकान में अवैध ब्रांच चल रही है। यहां बाकायदा लोहे का जाल लगाकर शराब की बिक्री की जा रही है।

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