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बाबा ने स्वप्न में मंदिर बनाने का अादेश दिया, अगले िदन उसी जगह िमले थे शंख व पद चिह्न
काली खाेली धाम में विराजे बाबा माेहनराम का मुख्य मंदिर मिलकपुर गांव में है। मान्यता है कि दाेनाें जगह के दर्शन करने से भक्ताें की मनाेकामना पूरी हाेती है। इसके पीछे मंदिर से जुड़े भक्ताें का तर्क है कि लालू भगत काे बाबा माेहनरान ने सपना दिया कि गांव के बाहर मेरे मंदिर का निर्माण कराअाे। सुबह जब वहां जाकर देखा ताे बाबा के पद चिन्ह अाैर शंख मिला। उसी जगह पर भक्ताें ने बाबा का बड़ा मंदिर अाैर अाश्रम बनाया। काली खाेली धाम अाैर यहां पर समान रूप से पूजा हाेती है। यहां भी बाबा की अखंड ज्याेत 24 घंटे प्रज्वलित रहकर भक्ताें काे अलाैकिक दिव्यता प्रदान करती है। भक्त यहां के दर्शन करने के बाद खाेली अाैर खाेली में करने के बाद यहां पूजा-अर्चना करते हैं। इसलिए पुराने मिलकपुर मंदिर से खाेली काे जाेड़ने वाला रास्ता भी है। भक्त इसी रास्ते से खाेली से मिलकपुर अाते-जाते है। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष अमर भगत बताते हैं कि स्वप्न वाली जगह पर मिलकपुर गांव में मंदिर बना। पद चिन्हाें वाली जगह पर मुख्य मंदिर है। उनके पूर्वज बताते थे कि नजदीक स्थित गांव सालाबास में अापदा के समय वहां के ग्रामीण यहां से शंख काे ले गए। बाद में शंख वापस नहीं अाया अाैर वहीं पर उसकी मंदिर बनाकर बाबा माेहनराम के स्वरुप में पूजा हाेती है।
मिलकपुर से खाेली काे जाेड़ता है पुराना रास्ता, बारिश से बेहाल : मिलकपुर मंदिर से खाेली धाम काे जाेड़ने वाले मुख्य रास्ते की स्थानीय प्रशासन काे सुध नहीं है। यह कच्चा रास्ता मिलकपुर मंदिर से खाेली तक जाता है। मिलकपुर मंदिर अाने वाले भक्त इसी रास्ते से खाेली जाते हैं। लेकिन यह रास्ता अभी तक कच्चा है। इसी रास्ते से दंडाैती अाैर पेट पलनिया वाले भक्त अाते हैं। मिलकपुर से अाने वाले भक्त भी इसी रास्ते से अाते हैं, लेकिन कच्चा अाैर बारिश हाेने की वजह से ये रास्ता खराब हाे गया है। बाबा के मेले में लाखाें श्रद्धालु अाते हैं। एेसे में उनके अावागमन के लिए केवल खाेली धाम के लिए सिर्फ गाैरवपथ से कंटेनर डिपाे हाेते हुए एक ही पक्का रास्ता है। ट्रस्ट अध्यक्ष ने बताया कि मिलकपुर, नया जाेहड़ हाेते हुए खाेली धाम काे जाने वाला प्राचीन रास्ता है। गाैरव पथ वाला रास्ता ताे कुछ दशक पहले ही बना है। पुराने रास्ता की लंबाई करीब 3 किमी है। इस रास्ते के पक्के निर्माण हाेने से भक्ताें काे अावागमन के लिए दाे रास्ते मिल सकते हैं, जिससे मेले की भीड़ दाे रूट पर डायवर्ट हाे सकती है। अभी एक रास्ता हाेने से मेले में भक्ताें के बीमार हाेने सहित अन्य अापात स्थिति में वाहनाें का निकलना मुश्किल हाे जाता है, क्याेंकि भक्ताें की संख्या अधिक हाेती है।
बाबा माेहनराम के लक्खी मेले में खाेली धाम अाैर मिलकपुर मंदिर पहली बार पिक्सल लाइट से जगमग हाेगी। सजावट करने वाले प्रदीप ठेकेदार ने बताया कि दाेनाें जगह पर सजावट के लिए 1500 झालर, 1200 बल्व, 250 पट्टा लाइट, 700 हैलाेजन-एलईडी अाैर 50 बाेर्ड लगाई जा रही है। जरूरत पड़ने पर लाइट की संख्या काे अाैर भी बढ़ाया जा सकता है। पिक्सल में लाइट की रंग अाैर डिजायन बदलती रहती है। मेले में अाए श्रद्धालुओं काे दूर से ही बाबा की अखंड ज्याेत के दर्शन हाे सकें इसके लिए बड़ी एलसीडी लगाई जाएगी। गत वर्ष मंिदर पर सामान्य सजावट हुई थी।
पिक्सल लाइट से जगमग होगा धाम