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डाॅ. वेदकुमारी के जन्मदिन पर विशेष शारीरिक अक्षमता के बाद भी आपातकाल में युवाओं को दिशा दी

Bhiwadi News - डॉ. वेदकुमारी जिन्हें शहर का हर आदमी उन्हें वेद दीदी कहता था । एक ऐसा नाम जो आज भी हर युवा को प्रेरणा देता है। बचपन...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 06:21 AM IST
Tapukda News - rajasthan news dr even after special physical inability on the birthday of vedakumari the youth gave direction to the emergency
डॉ. वेदकुमारी जिन्हें शहर का हर आदमी उन्हें वेद दीदी कहता था । एक ऐसा नाम जो आज भी हर युवा को प्रेरणा देता है। बचपन में हुई बीमारी के कारण आधे शरीर की सभी हड्डियां जुड़ गई थी। इस कारण वे सामान्य नागरिक की तरह जीवनभर बैठ तक नहीं पाई थी, पर मन की ताकत ने उन्हें न सिर्फ अलवर बल्कि देशभर में एक ऐसा स्थान दिलाया कि तत्कालीन उप राष्ट्रपति कृष्णकांत ने उन्हें दिल्ली में सम्मानित भी किया। 2001 में उनका निधन हो गया था। जो लोग उन्हें जानते हैं, उन्हें पता है कि वेद दीदी अपने शरीर की इस स्थिति के बाद भी सभी को पढ़ने-लिखने को प्रेरित करती थी, उन्होंने खुद ने एमए व पीएचडी की। कॉलेज में व्याख्याता बनीं।

बेहतर पढ़ाने वाली और किताबी ज्ञान के अलावा देशभक्ति का ज्ञान देने वाली दीदी रहीं। आपातकाल में जब देशभर में लोग अलग-अलग तरह से प्रताड़ित किए जा रहे थे, तो वेद दीदी का घर उनके लिए खुला हुआ था। अगर आपकी जान पहचान भी नहीं है तो भी उनके घर पर उसे रहने और खाने पीने की व्यवस्था हो ही जाती थी। अलवर में उनका सबसे बड़ा आंदोलन केडिया ग्रुप के शराब कारखाने का विरोध था। टपूकड़ा के पास सारेखुर्द गांव में केडिया ग्रुप शराब का कारखाना लगाना चाहता था। कारखाने का विरोध करने के लिए वेद दीदी उस गांव तक पहुंची, लोगों को समझाया और ताकत के साथ विरोध किया। पूरा प्रशासन उस समय केडिया के साथ था। किसानों की जमीन की रातों रात रजिस्ट्री की गई थी। इसके बाद भी वेद दीदी और टीम के कारण कारखाना नहीं लगा। आजादी बचाओ आंदोलन से जुड़े राजीव दीक्षित ने भी इस आंदोलन के लिए वेद दीदी के साथ काम किया। अगर यह कारखाना लगता तो आज उस क्षेत्र में पानी नाम की चीज नहीं बचती।

जिले में साक्षरता का अभाव था, खासकर महिला साक्षरता का। जब सरकार ने साक्षरता प्रोजेक्ट अलवर में चलाया तो तत्कालीन कलेक्टर ने जो कौर ग्रुप बनाया, उसमें भी वेद दीदी को शामिल किया और उनकी समझ और प्रेरणा के कारण यह प्रोजेक्ट काफी आगे तक बढ़ा। इस अभियान में जिले के तमाम ख्यातनाम लोग शामिल किए गए। उसी का परिणाम रहा कि आज हम साक्षरता में दूसरे जिलों से काफी आगे हैं।

इससे पहले आपातकाल के समय वे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपर्क में आई। उन्होंने जेपी के संगठन छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के युवाओं को प्रशिक्षण भी दिया। वे खुद जीवनभर बैसाखियों के सहारे चली पर जो भी उनके संपर्क में आया और जिसने भी देश के लिए कुछ करने का मन बनाया उन्हें बेड़ियों से मुक्त करवाया। उन्हें सिखाया कि आगे चलकर क्या करना है? मेवात क्षेत्र में जब सांप्रदायिक विवाद हुए, तो वेद दीदी ही थी जिन्होंने सड़क पर खड़े होकर लोगों को एकता बनाने का संदेश दिया। गांव-गांव जाकर बताया कि विवाद का परिणाम क्या होता है। इसी कारण मेवात में आज भी उनके अनेक अनुयायी मिलते हैं।

जिनकी बैसाखियों की ताकत से केडिया ग्रुप को बदलना पड़ा अलवर जिले में शराब कारखाना लगाने का फैसला

शिक्षा को ही वे सब कुछ मानती थीं

उनका मानना था कि यदि गांव का आम बच्चा शिक्षित होगा तो देश अपने आप सही रास्ते पर चलेगा, यही कारण है कि उनके निधन के बाद उनके अनुयायियों ने वीरेंद्र विद्रोही की पहल पर मांच में लड़कियों का एक स्कूल भी चलाया। आज भी वे हम सभी की प्रेरणा हैं।

डाॅ. वेदकुमारी

डाॅ. वेदकुमारी की याद में भारत की राजनीति पर चर्चा आज

अलवर| राज्य की प्रमुख गांधी विचारक व सामाजिक कार्यकर्ता डा. वेदकुमारी के 85वें जन्म दिवस रविवार 17 मार्च को वेदकुमारी संस्थान ग्राम रूंध मांच में व्याख्यान माला कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जिसमें प्रसिद्ध पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव व सी.ए. कमलेश सक्सेना मुख्य वक्ता होगे। मत्स्य-मेवात शिक्षा एवं विकास संस्थान के सचिव डा. वीरेंद्र विद्रोही ने बताया कि इस बार यह आयोजन प्रातः11:00 बजे वेदकुमारी संस्थान ग्राम रूंध मांच में आयोजित किया जा रहा हैं जिसमें भारत की राजनीति और लोकतंत्र विषय पर वक्तागण अपने वक्तव्य देंगे। डा. विद्रोही ने बताया कि संस्थान प्रत्येक वर्ष इस तरह की व्याख्यान माला आयोजित करता है, जिसमें देश के प्रमुख विचारक अलवर जिले के प्रबुद्ध जन से संवाद करते है। चूंकि 2019 का वर्ष भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण वर्ष है इसलिए इस वर्ष देश के सांस्कृतिक व आर्थिक परिदृश्य पर व्याख्यान माला आयोजित की जा रही हैं।

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