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हादसे का एक साल : आकाशीय टंकी कैसे गिरी, एमएनआईटी टीम अब तक पता नही लगा सकी
12 मार्च 2019 की सुबह 8.40 बजे के वक्त भिवाड़ी कभी नहीं भुला सकता। यही वो दिन था जब शहर के पुराने सिविल कोर्ट के समीप हाउसिंग बोर्ड सेक्टर एक में स्थित जलदाय विभाग की 55 फीट ऊंची आकाशीय तेज धमाके के साथ धराशायी हो गई थी। टंकी से बहे करीब 56 लाख लीटर पानी ने लोगों में खौफ भर दिया था। हादसे में 12 स्कूली बच्चों सहित 25 लोग घायल हुए थे, इनमें से एक महिला ज्ञानमती की बाद में मौत हो गई थी। घटना को एक साल बीत गया, लेकिन ये खुलासा आज तक नहीं हो सका कि आखिर लापरवाही किसकी रही।
जलदाय विभाग ने तत्कालिन अधिशासी अभियंता व सहायक अभियंता को निलंबित किया लेकिन निर्माण में चूक बरतने वालों पर कोई एक्शन तो दूर जिम्मेदारी तक तय नहीं हुई। गौरतलब है कि एनसीआरपीबी योजना के तहत भिवाड़ी के 19 गांवों की प्यास बुझाने के लिए 60.64 करोड़ रुपए की लागत से 18 टंकियों के निर्माण के कार्यादेश मार्च 2016 में जारी हुए थे। फर्म वर्मिंटन पेज इंडिया लिमिटेड (डब्ल्यूपीआईएल) को काम अप्रैल 2018 में पूरा करना था। काम पूरा होने के बाद एक साल तक डिफेक्ट लायबिलिटी तथा पांच साल तक रखरखाव कंपनी को करना था। प्रोजेक्ट में रामपुरा-मुंडाना, शाहड़ौद, सांथलका, हरचंदपुर, खिदरपुर, बिलाहेड़ी गोधान, कहरानी, खिजूरीवास, उदयपुर, खानपुर, मिलकपुर, भिवाड़ी गांव, नंगलिया, आलमपुर, सैदपुर एवं हाउसिंग बोर्ड सैक्टर में टंकियों का निर्माण होना है। इसमें 16 टंकियां बन चुकी हैं जिनमें एक बीते साल गिर गई, दो का काम होना अभी शेष है । एक साल पूर्व हुए हादसे के बाद इस पूरे प्रोजेक्ट पर ग्रहण लग गया। जो 15 टंकियां बनकर तैयार हैं, उनकी भी जांच के चलते पूरा प्रोजेक्ट अटक गया है। इन गर्मियों में भी इनसे भिवाड़ी इलाके के गांवों को पानी की आपूर्ति होने की संभावना पर संदेह हैं ।
1 साल बाद भी खुलासा नहीं, अब एमएनआईटी पर निगाहें
हादसे को लेकर विभाग ने प्रारंभिक रुप से घटना के लिए जिम्मेदार मानते हुए जलदाय विभाग के तत्कालिन सहायक अभियंता नीलेश कुमार को उसी दिन निलंबित कर दिया था। जबकि अधिशासी अभियंता आरके यादव को कुछ माह बाद निलंबित किया गया था । दोनों अधिकारी अभी भी निलंबित ही चल रहे हैं। विभाग की क्वालिटी कंट्रोल विंग ने अपनी जांच रिपोर्ट में अधिकारियों को निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग में लापरवाही बरतने का दोषी माना था। इसके बाद टंकी हादसे की वजह तलाशने के लिए बिट्स पिलानी व एमएनआईटी जयपुर को जांच दी गई थी। बिट्स पिलानी अपनी रिपोर्ट सौंप चुका हैं, जिसमें टंकी के समीप स्थित नाले के पानी के रिसाव को वजह बताया गया था लेकिन विभाग ने इस रिपोर्ट को नहीं माना और मामले की जांच कर रही एमएनआईटी जयपुर को इसकी स्वतंत्र जांच सौंप दी। एमएनआईटी जयपुर की टीम धाराशायी हुई टंकी के साथ बनकर तैयार हो चुकी 15 और टंकियों की जांच कर रही है। जो 12 टंकियों की जांच करीब सवा महीने पहले और तीन टंकियों की जांच 15 दिन पहले करके ले जा चुकी है। अब केवल जांच रिपोर्ट मिलना शेष है। जिसके बाद हादसे की वजह साफ हो सकेगी और बनकर तैयार हो चुकी 15 टंकियों का भविष्य तय होगा। वहीं इस मामले को पुलिस को कुल 12 शिकायतें जलदाय विभाग, सिविल कोर्ट सहित अन्य पीडितों ने सौंपी थी । पुलिस की जांच भी विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट के इंतजार में एक साल से अटकी हुई है।
इस मामले में एमएनआईटी जयपुर की जांच रिपोर्ट हमें मिलना शेष है । जबकि धाराशायी हुई टंकी के मामले में फर्म से 56 लाख रुपए की रिकवरी कर ली गई है। जो 15 टंकियां बनकर तैयार है, उनका भी भविष्य रिपोर्ट के बाद तय होगा। इन गर्मियों में भी इन टंकियों से पानी आपूर्ति हो पाने पर संशय है ।
-भगवानसहाय मीना, अति. मुख्य अभियंता, पीएचईडी अलवर
हमें अभी तक इस मामले में विशेषज्ञों की रिपोर्ट नहीं मिली है । रिपोर्ट मिलने के बाद ही जांच आगे बढ़ेगी।
-रविन्द्रप्रताप सिंह, थाना प्रभारी भिवाड़ी
भिवाड़ी. टंकी ढहने के बाद मलबे को हटाती जेसीबी। फाइल फोटो