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छह माह बाद भी उपखंड में नहीं खुल सका कृषि उपकरण बैंक, किराए पर यंत्र देने की थी योजना

कृषि विभाग की ओर से 6 माह पूर्व काश्तकारों को लाभ देने के उद्देश्य से किराए पर यंत्र देने की शुरू की गई योजना फाइलों...

Dainik Bhaskar

Jan 17, 2018, 02:40 AM IST
कृषि विभाग की ओर से 6 माह पूर्व काश्तकारों को लाभ देने के उद्देश्य से किराए पर यंत्र देने की शुरू की गई योजना फाइलों में दम तोड़ रही है। इसी का नतीजा है कि अब तक विभाग के अधिकारी उपखण्ड में योजना के तहत कृषि उपकरण बैंक नहीं खुल सका है। योजना की शुरूआत में उपकरण बैंक केकड़ी में खोला गया था। इसके बाद मसूदा उपखंड के बिजयनगर स्थित जालिया द्वितीय में कृषि उपकरण किराया केन्द्र खोला गया है। घाटे का सौदा बन चुकी खेती में ग्राम रूट लेवल पर बदलाव के लिए यह अनोखी पहल मुख्यालय की ओर से शुरू की गई थी। इस पहल के कारगर साबित होने पर प्रदेश का कृषि उत्पादन तो बढ़ेगा ही, किसान की तकदीर भी बदल सकती है। इसके लिए कृषि विभाग पंचायत समिति स्तर पर उन्नत कृषि उपकरण बैंक बना कर किसान को कृषि के उन्नत उपकरण उपलब्ध करवाता। जिन्हें खरीदना व किराए पर लेना उसकी बस की बात नहीं है। योजना के तहत कृषि विभाग को कम से कम प्रत्येक पंचायत समिति स्तर पर इस तरह के तीन बैंक बनाने के आदेश थे। जिससे काश्तकारों को कृषि उपकरण लेने में परेशानी नहीं हो सके।

इसलिए शुरू की गई थी योजना : कृषि अधिकारियों के अनुसार खेतों के बंटवारे के कारण जोतों का आकार इस हद तक छोटा हो चुका है कि किसान के लिए खेती करना किसी भी मायने में फायदे का सौदा नहीं है। इसके अलावा किसी किसानों के पास कृषि के उन्नत उपकरण उपलब्ध नहीं है। खेताें की ठहर चुकी उत्पादकता भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है। यही कारण है कि किसानों का खेती से मन मोह भंग होने लगा है। ऐसे माहौल के बीच खेती को बचाने के लिए रणनीति बदलाव की जरूरत को देखते हुए विभाग ने कृषि उपकरण बैंक प्रत्येक पंचायत समिति स्तर पर विकसित करने की पहल की थी। जहां उपखण्ड के लिए यह योजना काफी कारगर साबित हो सकती है, क्योंकि उपखण्ड में 77 प्रतिशत किसान लघु व सीमांत कृषक की श्रेणी में आते है। लेकिन अब तक इन काश्तकारों को लाभ प्राप्त नहीं हो सका है।

यूं होना था क्रियान्वयन

काम को अमली जामा पहनाने के लिए कृषक उत्पादक समूह, स्वयं सहायता समूह व सहकारी समितियों का गठन किया जाना था। जो उन्नत कृषि उपकरणों का स्थानीय स्तर पर बैंक तैयार कर स्थानीय किसानों को इन उपकरणों को किराए पर उपलब्ध करवाती। योजना का प्रचार प्रसार नहीं करने कारण उपखण्ड में योजना के 6 माह से अधिक समय निकल जाने के बाद भी अब तक एक भी कृषि उपकरण बैंक स्थापित नहीं हो सका है।

फार्म मशीनरी बैंक बनाने पर इस प्रकार मिलना है अनुदान








किसान के सबसे ज्यादा काम अाने वाले उपकरण व उनकी लागत




रोटा वेटर(मिट्‌टी को पलटने व जुताई करने में)-80 से 1.15 लाख रुपए तक।


टर थ्रेसर-1 से 1.50लाख रुपए।


सब्सिडी का भी मिलेगा लाभ

उक्त संस्थाएं पहले अपने खर्च पर उपकरण खरीदेंगी। वे चार साल तक सारे कामकाज का विधिवत संचालन कर सारा रिकॉर्ड संधारित करेंगी, उसके बाद विभाग सरकार की ओर से निर्धारित सब्सिडी राशि को संस्था को उपलब्ध करवाएगी। संस्था को कम से कम 5 से 7 उपकरणों का बैंक बनाना होगा। जिसके तहत उसे चालीस प्रतिशत तक सब्सिडी दी जानी है।

सरकार से हुआ था एमओयू

जानकारी के अनुसार जयपुर में हुई ग्लोबल राजस्थान एग्रोटेक मीट में हुए निर्णय के तहत अजमेर जिले के केकड़ी में बैंक बनाने का निर्णय किया गया था। इसके बाद एक माह पहले ही बिजयनगर के ग्राम जालिया द्वितीय में कृषि उपकरण बैंक खुला है। लेकिन दोनों ही स्थान पर ब्यावर उपखण्ड के काश्तकारों को इसका लाभ लेने के लिए कृषि यंत्र लाना मुश्किल है, क्योंकि दूर दराज स्थित ग्रामिणों को ट्रांसपोर्ट सहित अन्य खर्च उठा कर यंत्र को लाना होगा। ऐसे में काश्तकारों पर दोहरी मार पड़ेगी।

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