बिजयनगर

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भूल होना प्रकृति, स्वीकारना संस्कृति और सुधारना प्रगति

बिजयनगर| दुनिया में सब कुछ मिल जाती है सिर्फ अपनी भूलें नहीं मिलती, गलतियां बताती हैं कि हम प्रयास कर रहे हैं।...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 04:05 AM IST
भूल होना प्रकृति, स्वीकारना संस्कृति और सुधारना प्रगति
बिजयनगर| दुनिया में सब कुछ मिल जाती है सिर्फ अपनी भूलें नहीं मिलती, गलतियां बताती हैं कि हम प्रयास कर रहे हैं। आचार्य महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती शासनश्री मुनिश्री सुरेश कुमारजी “ हरनावां” ने न्यू लाइट कॉलोनी स्थित तेरापंथ सभा भवन में गलतियां सबसे बड़ी ट्यूटर विषय पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा अपनी गलती स्वीकार कर लेने में लज्जा की बात नहीं है मगर यह प्रमाणित करता है कि हम कल की अपेक्षा आज ज्यादा बुद्धिमान हैं। बुराई एक क्षण में ढूंढ ली जाती है और अच्छाई खोजने में पूरी जिंदगी गुजर जाती है। यदि हम अपना सीखना चाहें तो हमारी हर मूल शिक्षा देती है। विवेकशील व्यक्ति औरों की आलोचना नहीं करते बल्कि उनसे सीखते हुए आगे बढ़ते हैं।

मुनिश्री सम्बोध कुमारजी ने कहा हम हजारों बार अपनी भुलो की अनदेखी कर देते है तो दूसरों की गलतियों पर नफरत करने की ताकत क्यों जुटा लेता है? हम कितने भी ईमानदार क्यों ना हो लोग हमारी एक गलती का इंतजार करते रहते हैं। भूल का होना प्रकृति है, मान लेना संस्कृति है और सुधार लेना प्रगति है। अपनी गलती मानने में देर ना करें क्योंकि रास्ता जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुश्किल होगी। भूलें सिर्फ उन्हीं से होती हैं जो कुछ करते हैं और जो कुछ नहीं करते वो सिर्फ भूलें ढूंढते हैं। जब हम औरों की तरफ एक उंगली उठाते हैं तो मुड़ी हुई तीन उंगलियां हमसे अपने मन जुबान और कर्म को परखने का आह्वान करती हैं। धर्मसभा के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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