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मुख्यमंत्री जी, एक धेला भी खर्च नहीं होता, बजट में नया नगर की जगह ब्यावर की घोषणा तो कर देते!

राजेश कुमार शर्मा| ब्यावर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा सोमवार को पेश किए गए अपने इस कार्यकाल के अंतिम बजट में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 14, 2018, 05:10 AM IST

मुख्यमंत्री जी, एक धेला भी खर्च नहीं होता, बजट में नया नगर की जगह ब्यावर की घोषणा तो कर देते!
राजेश कुमार शर्मा| ब्यावर

प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा सोमवार को पेश किए गए अपने इस कार्यकाल के अंतिम बजट में ब्यावर का नामोनिशान नहीं लिया। बहुप्रतीक्षित ब्यावर को जिला भी नहीं बनाया पर रेवेन्यू रिकार्ड में नया नगर की जगह ब्यावर नाम करने की घोषणा भी नहीं हो पाई। देहात कांग्रेस प्रवक्ता अजय शर्मा ने वसुंधरा सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री जी ब्यावर को विकास के नाम पर तो कुछ दे नहीं पाए लेकिन कम से कम रेवेन्यू रिकार्ड में बरसों से चल रहे नया नगर की जगह ब्यावर नाम करने की घोषणा ही कर देते, इसमें सरकार का एक धेला खर्च नहीं होता और सिर्फ एक लाइन की अधिसूचना ही जारी हो जाती। तहसील के रिकार्ड में नया नगर की जगह ब्यावर शब्द अंकित हो जाता।

उन्होंने हैरानी जाहिर की कि विधानसभा क्षेत्र ब्यावर है और रेलवे व बस स्टैंड भी ब्यावर के नाम से है लेकिन रेवेन्यू रिकार्ड में आज भी ब्यावर होने की जगह नया नगर ही है। ऐसा भी नहीं है कि अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की हो, नाम बदलने के लिए बाकायदा प्रस्ताव भी सरकार को भिजवाया लेकिन इसका कोई कसर नहीं हुआ। शहर की युवा पीढ़ी को रेवेन्यू रिकार्ड में ब्यावर को नया नगर के नाम से जानने की खबर तक नहीं है। एक फरवरी 1836 से बसावट के साथ ही ब्यावर ने विकास की रफ्तार पकड़ी। जहां वर्ष 1872 ब्यावर मुख्य डाकघर की स्थापना के चार साल वर्ष 1876 में स्थापित रेलवे स्टेशन का नाम भले ही ब्यावर के नाम पर हुआ हो। एक नवंबर 1956 को अजमेर-मेरवाड़ा के राजस्थान में विलय से पहले ही राजस्व रिकॉर्ड में नया नगर नाम चला आ रहा है। आजादी के बाद भी सरकार अंग्रेजों के बनाए नियमों को मानते हुए आज भी रेवेन्यू रिकॉर्ड में इसे नया नगर ही मानती है।

कांग्रेस नेताओं ने सरकार को लिया आड़े हाथ, आज भी रजिस्ट्री या अन्य रेवेन्यू दस्तावेजों में ब्यावर की जगह लिखा जाता है नयानगर, प्रशासन की ओर से प्रस्ताव भेजने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

ब्यावर. मौजा नया नगर का रेवेन्यू नक्शा, जिसमें चारदीवारी एक ही खसरे में शामिल है। इसके अलावा अन्य वे खसरें हैं जो परकोटे से लगते हैं और उन पर अन्य कॉलोनियां बसी है।

क्या है मौजा नया नगर

रेवेन्यू रिकॉर्ड में अंकित मौजा शब्द का अर्थ है साधारणतया किसी आबादी या बस्ती से लिया जाता है। जबकि नया नगर या नया शहर किसी स्थान का नाम। ऐसे में माना जा सकता है कि ब्यावर बसने से पहले इस स्थान के आस-पास कोई आबादी रही होगी। जिसे अंग्रेज सरकार ने रेवेन्यू रिकॉर्ड में मौजा नया नगर नाम दिया होगा। शहर बसने के बाद भी ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने रेवेन्यू रिकॉर्ड में इसी नाम को जारी रखा। जिसे राजस्थान में विलय के बाद आने वाली सरकारों ने भी बरकरार रखा। यही कारण है कि आज तक ब्यावर का नाम रेवेन्यू रिकॉर्ड में नया नगर ही चला आ रहा है।

शहरी परकोटा एक ही खसरे में शामिल

शहरी परकोटे की बसावट महज एक ही खसरा नंबर 1565 पर है। जिसमें 451 बीघा 5 बिस्वा जमीन शामिल है। इसी पर चांगगेट, अजमेरी गेट, सूरजपोल गेट और मेवाड़ी गेट की अंदरूनी आबादी बसी है। जिसकी करीब 95 प्रतिशत जमीन में आबादी बसी है और शेष जमीन खाली है।

कहां से कहां तक है सीमा

मौजा नया नगर की सीमाओं में यह अजमेर रोड की ओर पंडित मोटर तक, बिजयनगर रोड पर पटवार घर तक, उदयपुर रोड पर चुंगी नाके तक, सेंदड़ा रोड पर राजमहल से आगे और अजगर बाबा थान से पहले तक की सीमा नया नगर में शामिल है। जबकि इससे सटते हुए भगत चौराहा, छावनी परेड, गढ़ी थोरियान, फतेहपुरिया दोयम, नृसिंहपुरा, गणेशपुरा, नूंद्री मालदेव, सेदरिया, शाहपुरा नयानगर और गोविंदपुरा शामिल है।

चारदीवारी के अंदर जितने भी मकान बने है या कॉलोनियां है वे पूरे एक ही खसरा नंबर 1565 में करीब 450 बीघा में आबादी बसी है। जो रेवेन्यू रिकॉर्ड में आज भी नया नगर में नाम से जानी जाती है। किसी अन्य खसरे का चारदीवारी में कोई उल्लेख नहीं है। यह बात सही है कि आज भी जब कोई रजिस्ट्री होती है तो वह नया नगर के नाम से ही होती है। संजय जैन, पटवारी नया नगर

वर्ष 2017 में ही मैंने सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था। रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज नया नगर का नाम बदलकर ब्यावर करने का आग्रह किया गया था। रेवेन्यू रिकॉर्ड में ब्यावर की पहचान आज भी नया नगर के नाम से ही है। योगेश अग्रवाल, तत्कालीन तहसीलदार, ब्यावर

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