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आरक्षण की समीक्षा पर आज करणीसेना करेगी चर्चा

श्रीराजपूत करणीसेना का पहला राष्ट्रीय अधिवेशन सोमवार को देशनोक में होगा। देशभर से करीब 800 प्रतिनिधि इसमें हिस्सा...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:15 AM IST
श्रीराजपूत करणीसेना का पहला राष्ट्रीय अधिवेशन सोमवार को देशनोक में होगा। देशभर से करीब 800 प्रतिनिधि इसमें हिस्सा लेंगे। मध्यप्रदेश और गुजरात से 200 प्रतिनिधि शामिल होंगे। 150 से ज्यादा उत्तरप्रदेश और बाकी उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश आदि प्रदेशों से प्रतिनिधि आएंगे। सेना के संरक्षक लोकेंद्र सिंह कालवी रविवार को ही देशनोक पहुंच गए। कई राज्यों के प्रतिनिधि भी रविवार की शाम तक आ गए। सेना की कोर-कमेटी की बैठक भी रविवार को हुई जिसमें राष्ट्रीय अधिवेशन में रखे जाने वाले प्रस्तावों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि करणीसेना की बैठक में आरक्षण की समीक्षा के मुद्दे पर चर्चा होगी। सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष कर्ण प्रताप सिंह सिसौदिया ने बताया कि इससे पहले प्रदेश स्तरीय अधिवेशन होते रहे हैं लेकिन अब संगठन का विस्तार 20 से ज्यादा राज्यों में होने से अब राष्ट्रीय अधिवेशन की जरूरत महसूस हुई। इसलिए पहला राष्ट्रीय अधिवेशन मां करणी के दरबार में बुलाया गया है और उन्हीं के आर्शीर्वाद से संगठन आगे काम करेगा।

आरक्षण की समीक्षा का मतलब खत्म करने से न निकालें

करणी सेना के प्रमुख लोकेन्द्र सिंह कालवी से बातचीत : श्रीराजपूत करणी सेना के संरक्षण लोकेंद्र सिंह कालवी का कहना है कि संविधान में डॉ.भीमराव अंबेडकर ने 10 साल के आरक्षण की व्यवस्था की थी। अब तो कई दशक हो गए। कम से कम इतनी समीक्षा तो होनी ही चाहिए कि दलित वर्ग में वो कौन सा तबका है जिसे अब तक आरक्षण नहीं मिला और वो कौन सा तबका है जो पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण लेकर आगे बढ़ता जा रहा है। दलितों में दो वर्ग हो गए। एक आरक्षण लेकर धनाढ्य हो गया और दूसरा अभी शोषित है। इसकी चिंता दलितों के शुभचिंतकों को करनी चाहिए। इसके अलावा दूसरे वर्गों में लोग भी दलितों से ज्यादा निर्धन हैं उनकी चिंता भी संविधान ही करेगा तो समीक्षा की बिलकुल जरूरत है। भारत बंद को लेकर कालवी बोले कि मिशन-72 ने भारत बंद का विरोध किया है अब देखना है कि दो अप्रैल को क्या हाेता है।

गोठ में भाटी-कालवी की मंत्रणा : रविवार को करणीसेना के राष्ट्रीय संरक्षक लोकेंद्र सिंह कालवी और पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी के बीच रविवार को लंबी मंत्रणा हुई। जालम सिंह भाटी की आेर से एक गोठ का आयोजन किया गया था जिसमें भाटी और कालवी भी पहुंचे थे। दोनों नेताओं के बीच हुई मंत्रणा का ब्यौरा नहीं निकला लेकिन लंबे समय से मतभेद के जो कयास लगाए जा रहे थे वे दूर हो गए।