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बीकानेर राजद्रोह एवं षडयंत्र केस

इन जननेताओं पर दायर किए गए मुकदमे पर दृष्टि केंद्रित करने पर हमें कतिपय महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं, जिनका...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 03:15 AM IST
इन जननेताओं पर दायर किए गए मुकदमे पर दृष्टि केंद्रित करने पर हमें कतिपय महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं, जिनका उल्लेख यहां पर किया जाना समीचीन होगा। इस मुकदमे में बीकानेर के पुलिस डी.आई.जी (कुंवर सबल सिंह) को मुस्तगीस बनाम (1) भादरा निवासी खूबराम सर्राफ पुत्र रामनारायण सर्राफ, (2) सत्यनारायण सर्राफ पुत्र घनश्याम सर्राफ, (3) चूरू निवासी गोपालदास स्वामी चेला मुकंददास, (4) चंदनमल बहड़ पुत्र बंशीधर ब्राह्मण, (5) राजगढ़ निवासी बद्रीप्रसाद सरावगी पुत्र मुन्नालाल, (6) लक्ष्मी चंद सुराणा पुत्र गुलजारी मल, (7) चूरू निवासी सोहनलाल सेवक पुत्र आशाराम (हैडमास्टर, एस.एस विद्यालय, चूरू), (8) प्यारेलाल ब्राहम्ण पुत्र डालचंद (मास्टर, एस.एस विद्यालय, चूरू) को मुलजिम बनाया गया।

मुलजिमों पर जरायम जेरदफा 377 (ग), 124 (क) व 120 (ख) के अधीन मजमुआ ताजीरात बीकानेर लगाई गई थी। तथाकथित अभियुक्तों पर उस मुकदमें के अंतर्गत न्यायालय में जो आरोप लगाये गए थे, उनकी चर्चा भी यहां पर अपनी प्रासंगिकता रखती है। इन पर जो आरोप लगाए गए थे वे स्थूलत: इस प्रकार थे: (1) सत्यनारायण सर्राफ और अन्य पांच अभियुक्तों ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिल कर नाजायज तरीकों से एक बाकायदा बड़ी साजिश रची, जिसके कि वे दोषी थे। (2) इन व्यक्तियों ने माह मई या जून, 1931 ई. में समय-समय पर कुछ अखबारों जैसे ‘प्रिंसली इंडिया (दिल्ली) ’, ‘त्याग भूमि (अजमेर)’ तथा रियासत (दिल्ली)’ इत्यादी के संपादकों व अन्य व्यक्तियों के साथ साजिश करके राज्य सरकार के खिलाफ राजद्रोह करने वाले कुछ अपमानजनक लेख प्रकाशित कराए। (लगातार)