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140 कॉलोनाइजर्स के पट्‌टों पर यूआईटी की रोक कहा-डवलपमेंट करो

Bikaner News - कृषि भूमि पर कॉलोनी काटकर प्राइवेट कॉलोनाइजर्स मुनाफा तो कमा रहे हैं लेकिन कॉलोनियों में डवलपमेंट नहीं करा रहे।...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:35 AM IST
140 कॉलोनाइजर्स के पट्‌टों पर यूआईटी की रोक कहा-डवलपमेंट करो
कृषि भूमि पर कॉलोनी काटकर प्राइवेट कॉलोनाइजर्स मुनाफा तो कमा रहे हैं लेकिन कॉलोनियों में डवलपमेंट नहीं करा रहे। इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की शिकायत मिली तो यूआईटी के भी कान खड़े हुए। न्यास सचिव ने ऐसे 140 कॉलोनाइजर्स को नोटिस जारी कर पट्टों पर रोक लगा दी है।

टाउन प्लान एरिया में पिछले पंद्रह सालों में 140 प्राइवेट कॉलोनियां कृषि भूमि पर काटी गई हैं। इनकी 90बी और 90ए हो चुकी हैं। उसके बाद भी अधिकांश कॉलोनियां अविकसित हैं। कॉलोनाइजर ने प्लाट के पैसे तो ले लिए, लेकिन वहां अब तक सड़क, बिजली, पानी, पार्क, सीवरेज आदि सुविधाएं ही विकसित नहीं की जा सकी हैं। इनमें 50 कॉलोनियां तो ऐसी हैं, जहां प्लाट भी पूरे नहीं बिके। ले आउट प्लान तक गड़बड़ है। यूआईटी से स्वीकृत कराए नक्शे के अनुरूप कॉलोनी है ही नहीं। यूआईटी ने भौतिक सत्यापन किए बिना ही लोगों को पट्टे जारी कर दिए। शिवबाड़ी आवासीय योजना की आड़ में कॉलोनाइजरों ने लोगों को सब्जबाग दिखाए थे। अब वे अपना पैसा वापस मांग रहे हैं। यूआईटी ने एक सप्ताह में कॉलोनाइजर्स से जवाब मांगा है।


इधर, विवाद में फंसे हैं 16 हजार पट्टे

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच के कारण करीब 16 हजार पट्टे अब तक विवाद में उलझे हुए हैं। वर्ष 2011-12 में कांग्रेस सरकार के समय प्रशासन शहरों के संग अभियान में 33190 पट्टे जारी हुए थे। इनमें कृषि भूमि के अलावा कच्ची बस्तियों के नियम से संबंधित भी थे। फर्जी पट्टों की शिकायत होने पर सरकार ने पट्टे जारी करने पर रोक लगा दी। प्रकरण एसीबी में चला गया। सरकार के निर्देश पर गठित तकनीकी समिति केवल कृषि भूमि से संबंधित प्लाट के पट्टे जारी करने की सहमति दे रही है। कच्ची बस्तियों के पट्टों पर रोक है। पट्‌टों के लिए लोग न्यास कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। उसके बावजूद पट्‌टे नहीं बन रहे हैं। तकनीकी समिति जांच के बाद जो पट्‌टे जारी कर रही है उनमें भी यह लिखा जा रहा है बाद में यदि पट्‌टा गलत पाया गया तो निरस्त कर दिया जाएगा।

नोट बंदी के बाद बिगड़ा ग्राफ

कुछ साल पहले प्रोपर्टी का बूम आया था। तब बड़ी संख्या में लोगों ने प्राइवेट कॉलोनियों में प्लाट खरीदे। कुछ ने निवेश करने के उद्देश्य से तो कुछ ने घर बनाकर रहने के लिए। केन्द्र सरकार ने नोट बंदी की, जिससे रियल एस्टेट के कारोबार की कमर की टूट गई। लोगों का बचाया हुआ अधिकांश धन बैंकों में चला गया। जिनके पास जरूरत से ज्यादा था, उन्होंने पकड़े जाने के डर से नष्ट कर दिया। रियल एस्टेट कारोबारियों ने बूम के समय कॉलोनियां तो काटी, लेकिन उनमें डवलपमेंट नहीं कराए। कृषि भूमि पर कटे हुए प्लॉट अब नजर ही नहीं आते। वहां घनी झाडिय़ां खड़ी हो गई है। कुछ लोग अब प्लाट बेचना चाहते हैं तो उन्हें उसकी पूरी कीमत नहीं मिल रही है। कुछ कॉलोनियों की हालत यह है कि लोगों को ना तो पट्टा मिल रहा है और ना ही वापस पैसा।

इन कॉलोनियों को नोटिस

जयपुर-जोधपुर बाइपास पर गौतम नगर, अंसल, गार्डन सिटी, वृंदावन एनक्लेव, आर.के.पुरम, माता वैष्णो नगर, पूजा, अमित, इंद्रप्रस्थ, विराट नगर, डिफेंस कॉलोनी, राजनगर, तिलक नगर, ऑफिसर्स कॉलोनी, जयपुर रोड एयरफोर्स स्टेशन से सटी कॉलोनी। इसके अलावा जयपुर रोड, उदासर, श्रीगंगानगर रोड, पूगल रोड, जैसलमेर रोड सहित कृषि भूमि पर 90बी और 90ए के तहत कटी 140 प्राइवेट कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं।

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