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सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने कहा, ट्रोमा सेंटर में ही हो सीटी-एमआरआई

रोड सेफ्टी की समीक्षा करने सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई विशेषज्ञों की कमेटी ने बीकानेर के ट्रोमा सेंटर का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:35 AM IST

रोड सेफ्टी की समीक्षा करने सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई विशेषज्ञों की कमेटी ने बीकानेर के ट्रोमा सेंटर का निरीक्षण किया। लगभग दो घंटे चले निरीक्षण में आपातकालीन इकाई, आईसीयू, रोजाना पहुंचने वाले चोटिल-गंभीर मरीजों की संख्या, उपलब्ध बैड, संसाधन आदि की जानकारी टीम के सदस्यों ने तय फार्मेट में ली। डाक्टर्स, नर्सेज के स्वीकृत पद, मौजूद स्टाफ आदि से जुड़े सवालों के साथ ही सभी दस्तावेज भी लिए।

हालांकि मोटे तौर पर बीकानेर के ट्राेमा सेंटर का भवन एवं अन्य व्यवस्थाएं देखकर टीम के सदस्य संतुष्ट नजर आए लेकिन कुछ संसाधनों की कमी पर सवाल उठाए। मसलन-ट्रोमा सेंटर में जहां सभी चोटिल, गंभीर रोगी पहुंचते हैं वहां सीटी-एमआरआई जैसी जांच क्यों नहीं होती? इसके लिए दूसरे भवन में क्यों जाना पड़ता है। सेंटर प्रभारी डा.बी.एल.खजोटिया ने उपलब्ध संसाधनों की रिपोर्ट दे दी। सिटी-एमआरआई पर स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कह पाए यही बात मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डा.आर.पी.अग्रवाल के सामने भी उठी। डा.अग्रवाल ने दावा किया-जल्द ही सीटी स्कैन मशीन इस सेंटर में स्थापित हो जाएगी। हो सकता है इसी वित्तीय वर्ष में इंस्टालेशन का काम पूरा हो जाए।

सुप्रीम कोर्ट को दी हुई है तीन साल की कार्ययोजना : रोड सेफ्टी सैल की प्रदेश प्रभारी उपायुक्त निधिसिंह का कहना है, तीन साल की कार्ययोजना सुप्रीम कोर्ट को सबमिट की गई है। कोर्ट के निर्देशानुसार ही कमेटी प्रदेश के चार जिलों में ऑडिट कर रही है। संयोग है कि इसी बीच बीकानेर से रोड सेफ्टी का बड़ा अभियान भी शुरू कर रह हैं जो पहले चरण में प्रदेश के सभी सातों संभाग मुख्यालयों तक ले जाएंगे।

सुखद संयोग : इधर एम्स-डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर बीकानेर को रोड सेफ्टी का मॉडल बनाने के प्रयास : एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश जिन चार जिनों में रोड सेफ्टी की लगातार मॉनीटरिंग कर रिपोर्ट देने को कमेटी बनाई है उनमें बीकानेर शामिल है। दूसरी ओर सुखद संयोग यह है कि हाल ही एम्स दिल्ली में डब्ल्यूएचओ और रोड सेफ्टी सैल के सहयोग से हुई वर्कशाप के बाद इन तीनों संगठनों ने बीकानेर से रोड सेफ्टी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। इसी कड़ी में दो दिन की वर्कशाप बीकानेर में हुई है। यहां की सड़कों को सेफ्टी मॉडल के रूप में तैयार किया जाएगा। ट्रोमा सेंटर को उसी लिहाज से सुसज्जित।

ट्रोमा सेंटर देखने के बाद टीम के सदस्य मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से मिले।

टीम में कौन : कमेटी में दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम लिमिटेड (डीआईएमटीएस), आईआईटी दिल्ली के ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन प्रोग्राम (ट्रिप) और द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) के प्रतिनिधियों को मिलाकर यह टीम बनाई है। बीकानेर आए इन विशेषज्ञों में विशाल मिश्रा, नरेन्द्र वर्मा आदि शामिल रहे।

प्रदेश के चार जिलों में हो रही रोड सेफ्टी की समीक्षा : सुप्रीम कोर्ट की कमेटी बीकानेर के साथ ही जयपुर, जोधपुर, कोटा में भी रोड सेफ्टी के संसाधनों मसलन, सड़कों की स्थिति, दुर्घटना पीडितों को हॉस्पिटल पहुंचाने के इंतजाम, हॉस्पिटल में उपलब्ध संसाधन-सुविधाओं आदि का निरीक्षण कर रही है।

कमेटी के सदस्य ऑडिट करने के बाद मिले थे। मुझे लगता है मोटे तौर पर वे ट्रोमा सेंटर की व्यवस्थाओं से संतुष्ट हैं। सीटी स्कैन मशीन यहां जल्द लग जाएगी। इसके अलावा भी माननीय न्यायालय की ओर से जो भी आदेश-निर्देश मिलेंगे, उसी अनुरूप कार्रवाई करेंगे। डा.आर.पी.अग्रवाल, प्राचार्य एसपी मेडिकल कॉलेज

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