सावधान! क्लोनिंग के बाद अब आया ठगी का नया तरीका: जेब में रखा ATM हो सकता है स्कैन, नई तकनीक इजाद कर खातों में सेंध लगा रहे साइबर ठग

राजस्थान न्यूज: रुपए कटते ही बैंक को तुरंत बताएं, वापस मिल सकते हैं पैसे

मनमोहन अग्रवाल

Apr 14, 2019, 01:06 PM IST
Bikaner Rajasthan News in Hindi: Hightech crime ATM Scanning New way to thug

बीकानेर (राजस्थान)। ये खबर बेचैन करने वाली है। क्योंकि यह सीधे आपकी जेब से जुड़ा है। क्योंकि आपकी जेब में रखा एटीएम कब स्कैन हो जाए ये पता भी नहीं चलेगा। अपराधी नई तकनीक की स्कैनिंग मशीन से डुप्लीकेट एटीएम तैयार कर खातों से रुपए निकाल रहे हैं। पुलिस ने एटीएम स्कैन कर खातों से रुपए उड़ाने वाले गिरोह के सरगना को झारखंड से दबोचा है, जो देशभर में वारदातें कर चुका है।

तकनीक बढ़ने से अपराध भी हाईटेक हो गए हैं। एटीएम से रुपए निकालने के लिए अब अपराधियों ने कार्ड स्कैनिंग का तरीका इजाद कर लिया है। ऐसी मशीन तैयार की गई है, जो आपकी जेब में रखे एटीएम को भी स्कैन कर लेगी। अपनी जेब या जहां कहीं भी एटीएम है, मशीन नजदीक आते ही स्कैन कर देगी। ऐसा कर खातों से रुपए निकालने वाला गैंग सक्रिय है। कोटगेट पुलिस ने झारखंड से गैंग के शातिर सरगना को पकड़ा है। एसएचओ धरम पूनिया ने बताया कि गया निवासी संतोष को झारखंड में पकड़ा है। ये शख्स करीब 8 साल से एटीएम के जरिए खातों में सेंध लगा रहा था। पहले एटीएम बदलकर, फिर उसे हैंग करके, क्लोन तैयार कर और अब नई तकनीक का डिवाइस इजाद कर एटीएम स्कैन करने लगा। इस अपराधी के खिलाफ थानों में 12 मुकदमे दर्ज हैं। दूसरे राज्यों में भी इसके खिलाफ 17 केस दर्ज होने की जानकारी पुलिस को मिली है।

रुपए कटते ही बैंक को तुरंत बताएं, वापस मिल सकते हैं


यदि किसी के खाते से रुपए निकाले जाते हैं और मैसेज आए तो तत्काल संबंधित बैंक को सूचना देनी चाहिए। उसके रुपए वापस भी मिल सकते हैं। एसबीआई के एजीएम हरीश राजपाल बताते हैं कि एटीएम की सूचना मिलने पर एक कमेटी पूरी जानकारी जुटाती है कि रुपए कैसे निकले। प्रावधान है कि उपभोक्ता की गलती के बिना रुपए निकल जाते हैं तो बैंक उसकी राशि वापस लौटाता है।


बैंक एटीएम पिन नंबर नहीं पूछता... इसे सीक्रेट ही रखें


- अपने एटीएम के पिन नंबर किसी भी सूरत में लीक न होने दें। क्योंकि अपराधी एटीएम नंबर के बिना खाते से रुपए नहीं निकाल सकता।
- एटीएम से रुपए निकालते समय कोई दूसरा ना हो। कार्ड डालने वाली जगह चैक कर लें, कहीं क्लोनिंग या स्केन करने वाली मशीन ना लगी हो।
- किसी दूसरे शख्स को अपना एटीएम कार्ड ना दें। अगर ऐसा करना पड़ा तो पिन नंबर तो बिल्कुल भी ना बताएं।
- एटीएम कार्ड, पिन नंबर, बैंक और अपने खाते के बारे में किसी भी तरह की जानकारी फोन पर ना दें। अगर कोई फोन आए तो बैंक जाकर अधिकारी-कर्मचारी से संपर्क करें।
- अपने बैंक का टोल फ्री नंबर मोबाइल में फीड रखें। आपातकाल में यह आपके काम आता है। फ्रॉड की स्थिति में ट्रांजेक्शन होते ही टोलफ्री नंबर पर फोन कर एटीएम ब्लॉक करा सकते हैं।

एटीएम संबंधी अपराध की रिपोर्ट नोडल थाना कोटगेट में दें


एटीएम से संबंधित किसी भी तरह का अपराध होता है तो उसकी रिपोर्ट कोटगेट पुलिस थाने में दें। कोटगेट थाने को जिले का नोडल थाना बनाया गया है। एटीएम से रुपए निकलने, कार्ड चोरी, एटीएम लूट या प्रयास का मुकदमा कोटगेट थाने में दर्ज करवाया जा सकता है।

हाईटेक क्राइम, अपडेट क्रिमिनल


संतोष शातिर अपराधी है और वारदात के लिए खुद को लगातार अपडेट करता रहता है। एटीएम कक्ष में हेल्प करने के बहाने एटीएम लेकर क्लोन तैयार कर लेता है या मशीन से स्कैन कर लेता है। पिन नंबर देखने के बाद डुप्लीकेट एटीएम तैयार करता है और दूसरे जिले में जाकर रुपए निकाल लेता है। क्लोनिंग के लिए अपराधी एक डिवाइस को एटीएम मशीन पर लगा देते हैं या एटीएम हाथ में लेकर चुपके से क्लोन कर लेते हैं। स्कैनिंग तकनीक ज्यादा आसान है। डिवाइस एटीएम कार्ड के नजदीक आते ही स्कैन कर लेता है।

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