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गूगल पर 135करोड़ का जुर्माना लगाया, स्वदेशी जागरण मंच तथ्य देगा तो फ्लिपकार्ट-वालमार्ट डील का भी परीक्षण कर सकता है सीसीआई

पॉलीटिकल रिपोर्टर | बीकानेर केन्द्रीय कारपोरेट, विधि एवं न्याय मंत्री पी.पी.चौधरी रविवार को बीकानेर में थे।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 04, 2018, 03:45 AM IST

गूगल पर 135करोड़ का जुर्माना लगाया, स्वदेशी जागरण मंच तथ्य देगा तो फ्लिपकार्ट-वालमार्ट डील का भी परीक्षण कर सकता है सीसीआई
पॉलीटिकल रिपोर्टर | बीकानेर

केन्द्रीय कारपोरेट, विधि एवं न्याय मंत्री पी.पी.चौधरी रविवार को बीकानेर में थे। ‘भास्कर’ से बातचीत में उन्होंने अपने मंत्रालयों से जुड़ी बारीकियों के साथ प्रदेश और देश के राजनीतिक हालात तक विभिन्न मुद्दों पर विचार रखे। प्रस्तुत है प्रमुख अंश :-

Q|गूगल पर 135.86 करोड़ का जुर्माना लगा कारपोरेट मंत्रालय ने मार्केट पर अपनी पैनी नजर का परिचय दिया है। क्या बाकी कंपनियों से जुड़े मामलों में भी ऐसे ही सख्त निर्णय सामने आएंगे।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने ऑनलाइन सर्च इंजन गूगल को प्रतिस्पर्धा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने हुए पाया। प्रभुत्व के दुरुपयोग के लिए प्रतिस्पर्धा-रोधी व्यवहार करने पर गूगल पर 135.36 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। यह महज एक उदाहरण है, इससे भी कई गुना तक जुर्माना कई कंपनियों पर लगाया गया है।

Q|वॉलमार्ट की फ्लिपकार्ट डील पर भी विरोध हुआ है। कंपनियों में घबराहट है। स्वदेशी जागरण मंच ने इसके विरोध में बाकायदा अभियान चलाया है। इस पर कोई विचार या हस्तक्षेप की जरूरत है?

किसी भी डील की नेचर में खरीदना, विलय होना और प्रभुत्व के दुरुपयोग के लिए प्रतिस्पर्धा रोधी व्यवहार करना जैसे कई बिंदु शामिल होते हैं। स्वदेशी जागरण मंच यदि इस डील के संबंध में देशहित या आम आदमी के हित से जुड़े तथ्य देगा तो सीसीआई इस मामले में भी जांच कर सकता है।

Q|हाईकोर्ट्स में 42.70 लाख, जिला-अधीनस्थ न्यायालयों में 2.60 करोड़ मामले त्वरित न्याय के सभी दावों की वास्तविकता बताते हैं। इसके लिए न्यायाधीशों के खाली पड़े पद मोटे तौर पर जिम्मेवार हैं। इन पदों को भरने में ढिलाई क्यों?

केन्द्र सरकार के स्तर पर कोई ढिलाई नहीं हो रही। हाईकोर्ट में भर्ती के लिए कॉलेजियम की ओर से नाम तय होकर आने के बाद सरकार को भेजने हैं। अधीनस्थ न्यायालयों में हाईकोर्ट की जरूरतों के मुताबिक प्रदेश सरकारों को भर्ती करनी है। इसके बावजूद केन्द्र सरकार राज्यों में खाली पड़े अधीनस्थ न्यायालयों के लगभग पांच हजार पदों को भरने के लिए सलाह देने का काम कर सकता है, वह दे रहे हैं।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया से तय हो रहा है अध्यक्ष

केन्द्रीय मंत्री पी पी चौधरी।

उप चुनाव के पैरामीटर पर विकास का परीक्षण नहीं

Q|लोकप्रियता-विकास के दावों से उप चुनाव नतीजों का तालमेल नहीं बैठता?

उप चुनाव नतीजों के पैरामीटर पर विकास और लोकप्रियता का परीक्षण नहीं किया जा सकता। इसमें कई फैक्टर काम करते हैं। कैंडीडेट सलेक्शन से लेकर लोकल इश्यू तक शामिल होते हैं।

Q|अब क्या करेंगे?

मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियों को सही तरीके से लोगों को पहुंचाएंगे। दावा है समर्थन मूल्या और आयुष्मान जैसी योजनाएं इतनी क्रांतिकारी साबित होगी कि किसान से लेकर आम आदमी के जीवन स्तर को संवार देगी। जिस आयुष्मान को लागू करने में ओबामा सोचते रहे उसे मोदी ने लागू कर दिया।

Q | गुटबाजी, प्रदेशाध्यक्ष तय करने में असमर्थता?

किसने कहा प्रदेशाध्यक्ष तय करने में गुटबाजी आड़े आ रही है। पार्टी पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मुताबिक सबकी राय ले रही है। कोई जातिगत समीकरण नहीं देखे जा रहे। यह मीडिया की उपज है।

Q | फिर अध्यक्ष हटाने की जल्दबाजी क्यों रही?

कहां हटाया। उन्होंने इस्तीफा दिया है। अभी इस्तीफा मंजूर होने की खबर आई है क्या?

हाईकोर्ट बैंच का कोई प्रस्ताव ही विचाराधीन नहीं

बीकानेर में हाईकोर्ट बैंच की लंबे समय से मांग चल रही है। राज्य में उदयपुर-कोटा में भी इस पर आंदोलन चल रहे हैं। जोधपुर में इस बात पर आंदोलन है कि बैंच कहीं और नहीं जानी चाहिए। रविवार को बीकानेर के वकील इस मुद्दे पर केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री पी.पी.चौधरी से सर्किट हाउस में मिलने भी पहुंचे। इन सबसे इतर चौधरी मानते हैं कि मंत्रालय के पास फिलहाल एक भी हाईकोर्ट बैंच का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।हाल ही लोकसभा में दिए गए एक जवाब के हवाले पर उन्होंने कहा, हाईकोर्ट से होते हुए सरकार के पास प्रस्ताव पहुंचने की प्रक्रिया है। फिलहाल इस स्तर पर कोई भी परिपक्व प्रस्ताव नहीं है।

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