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50% कोर्स अधूरा, लाइब्रेरी से पुस्तकें भी नहीं मिली वन-वीक पढ़कर ही विद्यार्थी देंगे इस बार परीक्षा
शुक्रवार को विधानसभा में हमारे दो विधायकों ने स्थानीय मुद्दे उठाए। खाजूवाला विधायक गोविंदराम मेघवाल ने इंगांनप नहर से आ रहे दूषित पानी को साफ करने के लिए क्षेत्र की डिग्गियों को जलदाय विभाग के अधीन करने और पानी शुद्ध कर ग्रामीणों को देने की मांग रखी। इसी तरह लूणकरणसर विधायक सुमित गोदारा ने बीकानेर शहरी क्षेत्र में बजरी खनन के बाद खुली जमीन को पार्क या वन क्षेत्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया।
प्रतिनियुक्ति के कारण नहीं लग पाई कक्षाएं
राजकीय महाविद्यालय के बीएससी अंतिम वर्ष के छात्र गजानंद स्वामी का कहना है कि जुलॉजी के व्याख्याता को बीकानेर, गणित के व्याख्याता को झुंझुनूं और इतिहास के व्याख्याता काे बीकानेर में लगाने के कारण इन विषयों की पढ़ाई नहीं हो पाई। गृहविज्ञान का पद हमारे यहां हमेशा से ही खाली रहा। हमारी कुछ कक्षाएं लगी तो सही मगर 50 प्रतिशत कक्षाएं हमेशा खाली ही रहती है। प्रेक्टिल कक्षाओं के लिए लैब की तरफ हम कभी गए ही नहीं, क्योंकि यहां लैब की व्यवस्था तक नहीं है। वन वीक से यह वर्ष भी पास कर लेंगे।
इधर ... निजी महाविद्यालयों में हो चुका है रिवीजन
ग्रामीण अंचल में जहां सात सरकारी कॉलेज है वहीं एक दर्जन से अधिक निजी कॉलेज भी है। इन कॉलेज में सभी विषयों के व्याख्याता अपना कोर्स पूरा करवा चुके हैं। रिवीजन हो चुके हैं।
इन विषयों के व्याख्याताओं की है कॉलेज में तत्काल जरूरत
ग्रामीण अंचल के सात कॉलेज में स्वीकृत 73 में से 36 व्याख्याताओं के पद रिक्त है। इनमें हिंदी के 4, अंग्रेजी का 2, राजनीति विज्ञान के 6, इितहास के 5, समाज शास्त्र के 2, अर्थ शास्त्र के 3, कंप्यूटर विज्ञान के 1, प्राणी शास्त्र के 2, रसायन शासत्र के 1, गणित के 1, ईएएफएम के 1, एबीएसटी के 1, गृह विज्ञान के 2, लोक प्रशासन के 1, भूगोल के 3, पर्यावरण के 1 व्याख्यात के रिक्त पद शामिल है।
7 कॉलेज में 73 में से 36 लेक्चरर नहीं
बीकानेर ग्रामीण | कॉलेज में स्नातक व स्नोतकोतर के नियमित विद्यार्थियों की परीक्षाएं 16 मार्च से प्रारंभ होगी। 7 मई तक चलने वाली इन परीक्षाओं की तैयारियों में ग्रामीण अंचल की सात सरकारी कॉलेज के 4631 विद्यार्थी जुटे हुए हैं। सरकार ने यहां कॉलेज तो खोल दिए मगर वहां पढ़ाने के लिए व्याख्याताओं की व्यवस्था नहीं की।
विषय विशेषज्ञ के इन 7 कॉलेज में 73 पद स्वीकृत है जिनमें से 36 पद खाली है। यानी करीब 50 प्रतिशत पद रिक्त। इसका परिणाम यह हुआ कि इन कॉलेज में 50 प्रतिशत कोर्स अधूरा ही रह गया। कई विषय की किताबें तक कॉलेज में कभी खुली नहीं। अब विद्यार्थी केवल वन-वीक या पासबुक के सहारे अपना यह साल बचाने का प्रयास कर रहे हैं। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री भंवर सिंह भाटी बीकानेर के कोलायत से ही विधायक है। इसके बावजूद यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। आगामी सत्र से पहले सरकार को इस संबंध में सकारात्मक कदम उठाना चाहिए।
शहरी क्षेत्र में बजरी खनन से अनुपयोगी हुई जमीन पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए पार्क या वन क्षेत्र विकसित किए जाए
लूणकरणसर विधायक सुमित गोदारा ने बीकानेर
शहरी क्षेत्र की समस्या को उठाया। उन्होंने भी नियम 295 के अंतर्गत बजरी खनन से अनुपयोगी हुई
जमीन पर पार्क या वन क्षेत्र विकसित करने का
प्रस्ताव दिया।
उन्होंने बताया कि बजरी खनन के कारण खाली जमीन पर भूमाफिया कब्जा कर रहे हैं। अवैध बस्तियां बसने से उनके जीवन पर संकट मंडरा रहा है। बीकानेर शहर की आबादी के बीच ऐसे कई क्षेत्र हैं, जिस पर सरकार को अपना नियंत्रण लेना चाहिए। इस अनुपयोगी खदानों को शहर के कचरे से भरकर वहां पार्क या वन क्षेत्र विकसित किए जाए।
उन्होंने बल्लभ गार्डन में अंबेडकर कॉलोनी, गंगाशहर रोड पर शिव वैली कॉलोनी, शिव बाड़ी में कांता खतूरिया कॉलोनी, मोहता सराय, हरलोई हनुमान मंदिर व करमीसर के बीच बनी खदानों पर इस तरह के अभियान चलाने की मांग की। इसके लिए नगर निगम के डंपिंग यार्ड पर बने कचरे के ढेर का उपयोग करने की सलाह भी उन्होंने दी जिससे कचरे का निस्तारण भी हो सकेगा।
खाजूवाला में 199 पेयजल डिग्गियां, टूटी व बदबूदार, इनसे बुझ रही प्यास राहत के लिए जरूरी है : जलदाय विभाग ले इन सभी को अपने अधीन
खाजूवाला विधायक गोविंदराम मेघवाल नियम 295 के तहत इंदिरा गांधी नहर परियोजना में गंदे पानी की सप्लाई व उसका पेयजल के रूप में भंडारण की अव्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि खाजूवाला क्षेत्र में भूगर्भीय पानी नहीं है। पूरा क्षेत्र नहर से मिल रहे पानी से ही अपनी प्यास बुझा रहा है। इसके लिए वहां 50 साल बने पेयजल डिग्गियां बनाई गई थी। उनमें इसी नहर का पानी भंडारित किया जाता है। नहर में आ रहे बदबूदार पानी को इन डिग्गियों में साफ करने का कोई विकल्प नहीं है। कारण, इन पर जलदाय विभाग का नियंत्रण नहीं है। ये सेनेटरी की डिग्गियां है इस कारण लोग दूषित पानी ही पी रहे हैं।
इस क्षेत्र के हर घर में स्वच्छ पानी जाए, इसके लिए जरूरी है कि खाजूवाला क्षेत्र में बनी 199 पेयजल डिग्गियों को जलदाय विभाग के अधीन किया जाए। इन डिग्गियों की सफाई करवाकर, फिल्टर लगाने के बाद ही पानी ग्रामीणों को मिले, ऐसी व्यवस्था की जाए।
मंत्री बोले : जल्द ही निकालेंगे भर्ती, 900 पद भरने के लिए आरपीसी को दी स्वीकृति
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री व कोलायत विधायक भंवर सिंह भाटी का कहना है कि प्रदेश में व्याख्याताओं के 2300 पद रिक्त है। इनमें 900 पदों पर भर्ती करने के लिए आरपीएससी को स्वीकृति भेज दी है, जल्द ही भर्ती निकलेगी। कॉलेज में कोर्स पूरा हो इसके लिए रेस योजना चलाई है जिसका सख्ती से पालन करवाएंगे। काेर्स अधूरा छोड़ने वालों पर कार्रवाई करेंगे।
मंत्री का विस क्षेत्र, राजनीति की ही पढ़ाई नहीं
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री भंवर सिंह भाटी कोलायत से ही विधायक है। यहां पर सात में से छह पद व्याख्याता लगे हुए हैं। मगर, एक जिस पद पर व्याख्याता नहीं है वह राजनीतिक विज्ञान का। यानी मंत्री के क्षेत्र में ही राजनीति की पढ़ाई नहीं हो पाई। यह कहना है कि इस कॉलेज में पढ़ने वाले बीए द्वितीय वर्ष के छात्र सवाई सिंह का। उसका कहना है कि अन्य विषय की पढ़ाई तो यहां हुई मगर राजनीति विज्ञान का व्याख्याता यहां कभी नहीं था जिस कारण वह पिछले साल पास भी नहीं हो पाया। इस बार भी उसे फैल होने का डर सता रहा है।
2 कमरों में नंबर आने पर ही पढ़ पाते थे विद्यार्थी
राजकीय कॉलेज श्रीडूंगरगढ़ की बीए प्रथम वर्ष की छात्रा कविता सिद्ध बताती है कि कॉलेज प्रबंधन दावा करता है कि उन्होंने कोर्स पूरा करवा दिया। मगर, कैसे यह तो बताए। दो कमरे में छह विषय की प्रतिदिन 12 कक्षाएं कैसे लग सकती है। कौन-सा विषय किस दिन कॉलेज में पढ़ाया जाएगा, यह तक तय नहीं था। जिस विद्यार्थी के विषय की कक्षा कमरे में लगती थी, उसका नंबर आने पर वह अंदर जाता था। बाकी, सभी को कॉलेज परिसर में ही इधर-उधर घूमना पड़ता था। अर्थशास्त्र की तो किताब तक नहीं खुल पाई हमारी कॉलेज में।
कॉलेज से पुस्तकें नहीं मिली, पढ़ाने वाला भी कोई नहीं
इसी शैक्षणिक सत्र में यह कॉलेज शुरू हुआ। इसमें पढ़ रहे बीए प्रथम वर्ष के छात्र रणवीर गोदारा को कॉलेज खुलने की जितनी खुशी थी, उतनी ही यहां कोई व्यवस्था नहीं होने से नाराजगी। उसने बताया कि पूरे साल में उन्हें पुस्तकें नहीं मिली। कोई पढ़ाने वाला भी नहीं था। अब मेरा परीक्षा केंद्र घड़साना आया है। वहां जाकर परीक्षा देने के लिए मुझे 90 किमी की दूरी तय करनी होगी। यहां स्टाफ होता तो यहीं परीक्षा हो जाती। वन वीक पढ़ने के अलावा कोई सहारा नहीं है।
कार्य व्यवस्था में लगाए व्याख्याता, 1 महीने में लौटे
राजकीय कॉलेज बज्जू का यह पहला साल है। यहां बीए प्रथम वर्ष में पढ़ने वाले छात्र रामचंद्र लांबा का कहना है कि कॉलेज में इतिहास का एक भी लेक्चर नहीं हुआ। पूरे साल यहां केवल एक ही व्याख्याता रहे जो प्रशासनिक कार्य में उलझे रहते थे। कार्य व्यवस्था के नाम पर राजनीतिक विज्ञान व भूगोल के व्याख्याता लगाए। वे एक ही माह में वापस चले गए। अब वन वीक से ही पढ़ाई कर रहा हूं। जैसे-तैसे प्रयास करके यह साल बचाना चाहता हूं। लोक प्रशासन व हिंदी के व्याख्याता कार्य व्यवस्था में अभी लगाए गए हैं।
2 कमरों में ही लगती कक्षाएं, बाकी बाहर बैठे रहे
2016 में खुले राजकीय कॉलेज खाजूवाला की बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा प्रियंका बताती है कि पूरे साल यहां दो ही कमरे में कक्षाएं लगती थी। वह भी अंग्रेजी विषय की। अन्य कोई विषय हमें पढ़ाया ही नहीं गया। जिनको अंग्रेजी पढ़नी होती थी, वे कमरे में जाते। बाकी सारे विद्यार्थी बाहर ही बैठे रहते। अभी यह कॉलेज शहीद ओम प्रकाश बिश्नोई राउमावि में चल रहा है। बीएड कर चुके मेरे भाई ने मुझे अभी पढ़ाया है। वन-वीक व पासबुक से ही तैयारी हो रही है।
पढ़ाई कम, अन्य गतिविधियां ज्यादा होती है
मांगीलाल बागड़ी कॉलेज राजकीय महाविद्यालय की बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा हिमानी चांडक ने बताया कि व्याख्याताओं के 50 प्रतिशत पद रिक्त है। प्राचार्य भी कार्यवाहक है। अंग्रेजी, अर्थशास्त्र की कक्षाएं कभी लगी ही नहीं। कॉलेज आने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। कॉलेज में अन्य गतिविधियों पर ज्यादा जोर दिया जाता है। इस कारण अधिकांश विद्यार्थी प्राइवेट ट्यूशन, वन वीक, टेस्ट सीरिज आदि के सहारे ही परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
ये खबर अभी इसलिए : उच्च शिक्षा राज्यमंत्री के इस जिले में इस सत्र में 4631 विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हुई, आगामी सत्र में ना हो ऐसे हालात
विधानसभा में शुक्रवार को हमारे दो विधायकों ने उठाए स्थानीय मुद्दे
भास्कर टीम : श्याम ओझा, राजेश अग्रवाल, राम प्रताप गोदारा, विशाल स्वामी, राहुल हर्ष, दिलीप नोखवाल।
स्वीकृत : 12, रिक्त पद : 5
विद्यार्थियों की संख्या : 714
राजकीय कॉलेज लूणकरणसर
स्वीकृत : 7, रिक्त पद : 1
विद्यार्थियों की संख्या : 333
राजकीय कॉलेज कोलायत
स्वीकृत : 7, रिक्त पद : 1
विद्यार्थियों की संख्या : 364
राजकीय कॉलेज श्रीडूंगरगढ़
स्वीकृत : 7, रिक्त पद : 6
विद्यार्थियों की संख्या : 76
राजकीय कॉलेज छत्तरगढ़
स्वीकृत : 7, रिक्त पद : 4
विद्यार्थियों की संख्या : 250
राजकीय कॉलेज बज्जू
स्वीकृत : 7, रिक्त पद : 6
विद्यार्थियों की संख्या : 475
राजकीय कॉलेज खाजूवाला
स्वीकृत : 26, रिक्त पद : 13
विद्यार्थियों की संख्या : 2419
नोखा: मांगीलाल बागड़ी कॉलेज