दोपहर 1 बजे बाद होगी माला घोलाई होलिका दहन के लिए शाम 06.32 से 08.15 बजे तक श्रेष्ठ मुहूर्त
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र होने से ध्वज योग बनेगा गज केसरी योग का भी रहेगा प्रभाव
आज रंगमय होली का पर्व मनाया जाएगा। वहीं धुलंडी 10 मार्च को होगी। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित काल में करना होता है। इस बार माला घोलाई में जरूर भद्रा कुछ समय के लिए बाधक बनेगी लेकिन होलिका दहन में भद्रा बाधा नहीं रहेगी। भद्रा दोपहर में ही समाप्त हो जाएगी। ज्योतिर्विद पंडित हरिनारायण व्यास मन्नासा के अनुसार होली के दिन यानि सूर्योदय से लेकर दोपहर 01.10 बजे तक भद्रा रहेगी। प्रदोष काल गोधूलि बेला में शाम 06.32 से 08.12 बजे तक होलिका दहन के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। मन्नासा के अनुसार होलिका दहन के दिन सोमवार को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र होने से इस दौरान ध्वज योग रहेगा। यह योग यश कीर्ति व विजय प्रदान करने वाला होता है। इसी दिन पूर्णिमा होने से चंद्रमा का प्रभाव ज्यादा रहेगा। चंद्रमा मित्र राशि में, बृहस्पति व शनि स्व राशि में व मंगल उच्च राशि में रहेगा जो लोगों का वैभव बढ़ाएंगे।
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रोग-शोक का नाश होगा, शत्रुओं पर मिलेगी विजय
मन्नासा के अनुसार तिथि-नक्षत्र और ग्रहों की विशेष स्थिति मंे होलिका दहन करने से रोग-शोक और दोष का नास होगा। वहीं इससे शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त होगी।
होलिका दहन के साथ ही शुरू होंगे शुभ कार्य
होलाष्टक में शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। मन्नासा के अनुसार सोमवार को होलिका दहन के साथ ही शुभ कार्य वापस शुरू हो जाएंगे। इसके बाद गृह प्रवेश, नींव मुहूर्त, देव प्रतिष्ठा व सावा सहित अन्य शुभ कार्य हो सकेंगे, लेकिन ये शुभ कार्य भी पांच दिन ही रहेंगे। 14 मार्च को मीन मल मास लग जाएगा।
पुरानी गिन्नाणी में फागोत्सव।