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अाचार्य िवजय जयानंद सूरिश्वर का नगर प्रवेश, संक्रांति महाेत्सव अाज

एक वर्ष पहले
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जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के अाचार्य िवजय जयानंद सूरिश्वर ने वेदाें के महावीर मंिदर सहित अनेक जैन मंदिराें में दर्शन, स्तुति वंदना करते हुए शाेभायात्रा के साथा नगर प्रवेश किया। रास्ते में जगह-जगह जयकाराें, चावल से स्वास्तिक की गंवली से जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के साथ खरतरगच्छ, पाश्वचन्द्रगच्छ के अनुयायियाें ने भी अाचार्यश्री का अभिनंदन किया।

शाेभायात्रा में सजे सवरे घाेड़े, ऊंट, बैंड पार्टी, ढाेल वादकाें की टाेली भक्तिगीताें की धुनें बजा रहीं थी। विभिन्न भजन मंडलियाें के सदस्य व युवा नृत्य कर रहे थे। वहीं महिलाएं पीला व चुनड़ी की साड़ी पहने हुए सिर पर कलश लिए मंगलगीत गाते हुए चल रही थी। धर्मसभा में जयानंद सूरिश्वर ने प्रवचन में कहा िक देव, गुरु व धर्म के प्रति पूर्ण समर्पित रहे। उन्हाेंने एक भजन जीवन संवर जाए के माधयम से भी भावाभिव्यक्ति दी। जयकीर्ति िवजय ने कहा िक शनिवार काे लाेकर्पित हाेने वाले उपासरे में उन्हाेंने धार्मिक शिक्षा लेकर पांच महाव्रत धारण किया है। श्रावक शांतिलाल सेठिया, चन्द्र कुमार काेचर, नीलम सिपानी अाैर शांतिलाल काेचर अादि श्रावकाें ने नूतन उपासरे में धार्मिक शिक्षा की व्यवस्था का संकल्प दाेहराया। तपागच्छ महिला मंडल, कंचन देवी काेचर व राैनक काेचर ने भक्ति गीत पेश किया।

जैन श्वेताम्बर तपागच्छ संघ के वरिष्ठ श्रावक शांतिलाल काेचर ने बताया कि अाचार्यश्री विजय जयानंद सूरिश्वर महाराज शनिवार काे रांगड़ी चाैक की तपागच्छीय पाैषधशाला से सुबह साढ़े अाठ बजे रवाना हाेकर काेचराें के चाैक में पंच मंदिर के पास मणिभद्र वीर मंिदर के द्वार उद्घाटन व नूतन काेचर पुरुष उपासरे का लाेकार्पण करेंगे। विदित रहे कि बीकानेर के नाहटा-गाेलछा चाैक निवासी जयकीर्ति विजय काे गणि की उपाधि जनवरी में गुड़गांव में मिली थी।

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