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चकगर्बी में कन्वर्जन कराए बिना काटी गई कॉलोनियां अब रकबाराज घोषित होंगी, नाल से शोभासर तक सर्वे होगा

Bikaner News - चकगर्बी में कन्वर्जन कराए बिना ही प्राइवेट कॉलोनियां काटने वाले कॉलोनाइजर्स पर गाज गिरी है। जिला कलेक्टर...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 03:20 AM IST
Bikaner News - rajasthan news colonies cut without conversion will now be declared ruckus will be surveyed from festoon to festive
चकगर्बी में कन्वर्जन कराए बिना ही प्राइवेट कॉलोनियां काटने वाले कॉलोनाइजर्स पर गाज गिरी है। जिला कलेक्टर कुमारपाल गौतम ने शुक्रवार रात 12 से अधिक कॉलोनियों का निरीक्षण करने के बाद तहसीलदार को सर्वे कराकर ऐसी कॉलोनियों को रकबाराज घोषित करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर शुक्रवार रात पूगल रोड स्थित चकगर्बी पहुंचे। तहसीलदार जयदीप मित्तल और पटवारी रामदेव भी साथ थे। मौके पर एक कॉलोनी में जेसीबी की मदद से विद्युत पोल लगाने का काम चल रहा था। कलेक्टर के निर्देश पर मशीन कुर्क करके बीछवाल थाने भेज दी गई। मौके पर चल रहे निर्माण कार्य भी रुकवा दिए गए। उन्होंने तहसीलदार से क्षेत्र की सभी अनधिकृत कॉलोनियों की रिपोर्ट मांगी है तथा उन्हें रकबाराज घोषित करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) एएच गौरी व बीकानेर एसडीएम कैलाशचंद्र शर्मा मौजूद थे।

कॉलोनाइजर्स पर गिरी गाज
चकगर्बी में डेढ़ अरब का निवेश, 15 हजार से अधिक लोगों ने ले रखे प्लाॅट

चकगर्बी में कॉलोनाइजर्स ने करीब डेढ़ अरब रुपए जमीनों में निवेश कर रखे हैं। प्रोपर्टी कारोबारी गणेश गुप्ता के अनुसार चकगर्बी में करीब दो हजार बीघा जमीन पर दो सौ से अधिक कॉलोनियां कटी हुई हैं। मध्यम व अल्प आयवर्ग के लोगों को सस्ती दरों पर प्लाट बेचे हुए हैं। ऐसे लोगों की संख्या 15 हजार से अधिक है। यह सभी जमीनें खातेदारी हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज के आस पास की कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं और लोग वहां सालों से रह रहे हैं। जिला प्रशासन को चाहिए कि लोगों को बेदखल करने के बजाय इन कॉलोनियों का कन्वर्जन करने के लिए अभियान चलाए।

200 से अधिक प्राइवेट कॉलोनियां

नाल से लेकर शोभासर तक ग्रीन बेल्ट एरिया में 200 से अधिक प्राइवेट कॉलोनियां कटी गई हैं। पिछले 15 साल में कॉलोनाइजर्स ने इस एरिया में खातेदारी और गैर खातेदारी जमीनें खरीदकर बिना 90 बी या 90 ए कराए कॉलोनियां काट डाली। प्लाट सस्ते मिल रहे थे, इसलिए बड़ी संख्या में मध्यम और अल्प आय वर्ग के लोगों ने भी जमीनों में अपनी पूंजी निवेश की। इससे कॉलोनाइजर्स ने मोटा पैसा कमाया, जबकि निवेशकर्ता अब खुद को ठगा महसूस करेंगे।

पटवार हलका विवादों में

चकगर्बी पटवार हलका शुरू से ही विवादों में रहा है। रामदेव सारस्वत को इसी माह आचार संहिता लगने से पहले चकगर्बी में पटवारी लगाया है। यहां पहले से कार्यरत पटवारी रामलाल चौधरी का तबादला बरसिंगसर कर दिया गया है। चौधरी ने वहां ज्वाइन नहीं किया और मेडिकल छुट्टी पर चले गए। शुक्रवार को हाईकोर्ट से स्टे भी ले लिया। चौधरी का कहना है कि उनके रिटायरमेंट में दाे साल से भी कम समय है। इसके बावजूद छह माह में तीन बार ट्रांसफर हुआ।

65 साल बाद बन रही जमा बंदियां: चकगर्बी में 65 साल बाद नई जमाबंदियां बन रही हैं। शहर से सटे इस क्षेत्र में 1954 के बाद जमा बंदियां नहीं बनी। इस दौरान सरकारी भूमि अतिक्रमणों की भेंट चढ़ी। खातेदारी व गैर खातेदारी जमीनों पर कॉलोनाइजर्स ने कॉलोनियां काट दी।

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