विज्ञापन

नहीं चाहते हुए भी स्वीकार करने की विवशता थी राजस्थान में विलय की

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 03:21 AM IST

Bikaner News - किंतु यह विचार वीपी मेनन का निज विचार ही रहा, इसकी क्रियान्विति नहीं हो सकी। वस्तुत: सरदार पटेल इन राज्यों की जन...

Bikaner News - rajasthan news even if you did not want to accept it it was compulsion to merge in rajasthan
  • comment
किंतु यह विचार वीपी मेनन का निज विचार ही रहा, इसकी क्रियान्विति नहीं हो सकी। वस्तुत: सरदार पटेल इन राज्यों की जन आकांक्षाओं के खिलाफ ऐसा कोई निर्णय लेने में हिचक रहे थे। इन चारों ही रियासतों को अब यह बात भली भांति समझ आ चुकी थी कि इनके शासक अब सत्ता को अपने हाथों में केंद्रित नहीं रख पाएंगे और अंततोगत्वा इनके शासकों को शासन सत्ता जनता के हाथों में सौंपनी ही पड़ेगी।

यद्यपि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता था कि सच्चाई की अनुभूति हो जाने के बावजूद जयपुर जोधपुर तथा बीकानेर के शासकों की यह बड़ी इच्छा थी कि वे अपनी रियासतों को अलग रखें। लेकिन इन रियासतों से बड़ी रियासतें या तो प्रांतों के साथ मिल चुकी थी या दूसरों के साथ मिल कर संघ स्वरूप का हिस्सा बन चुकी थी। ऐसी स्थिति में जयपुर, जोधपुर तथा बीकानेर जैसी रियासतों को अलग छोड़ना संभव नहीं था। हर तरफ से यह बात स्पष्ट हो चुकी थी कि वे चाहे संयुक्त राजस्थान में अपना विलीनीकरण करने को तैयार हो अथवा नहीं, सत्ता से तो उन्हें वंचित होना ही था। इन परिस्थितियों को देख कर नहीं चाहते हुए भी इन्होंने संयुक्त राजस्थान में विलीनीकृत होना स्वीकार कर लिया। वस्तुत:, संयुक्त राजस्थान में विलयन के पश्चात सत्ता विहीन होकर रहना उनके लिए कम अपमानजनक था बिस्पत कि अपने ही राज्यों में सत्ता विहीन होकर के रहना। (लगातार)

X
Bikaner News - rajasthan news even if you did not want to accept it it was compulsion to merge in rajasthan
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन