पीबीएम में हर दिन 10 लाेग पहुंचते हैं जिन्हें सिर दर्द के साथ रंगीन छल्ले दिखते हैं, इनमें ज्यादातर ग्लूकाेमा के नजदीक
अांखाें में दर्द, सिर में दर्द, राेशनी में रंगीन छल्ले, सुबह-शाम धुंधला दिखना जैसे लक्षण हैं ताे तुरंत अाई स्पेशलिस्ट के पास पहुंचे। हाे सकता है कि अापकी अांख का अंदरुनी प्रेशर बढ़ रहा है जाे समय पर ठीक नहीं हुअा ताे काला पानी यानी ग्लूकाेमा हाे सकता है। ग्लूकाेमा यानी अांख की एेसी बीमारी जिससे दृष्टि चली गई ताे अभी तक उसे ठीक करने का काेई प्रामाणिक इलाज सामने नहीं अाया है।
सिर्फ बीकानेर के पीबीएम अाई हाॅस्पिटल की ही बात करें ताे यहां हर दिन इन लक्षणाें वाले 10 लाेग पहुंच रहे हैं जिनमें से अाधे राेगी नए हाेते हैं वहीं अाधे एेसे हैं जाे ग्लूकाेमा के कगार पर पहुंच चुके हैं। डाक्टर्स कहते हैं, हालांकि यह जन्मजात बीमारी भी हाे सकती है अाैर बड़ी उम्र में भी। जन्मजात यानी शिशुओं में हाेने का एक लक्षण है उनकी अांखें सामान्य से बड़ी हाेना।
पीबीएम हाॅस्पिटल के नेत्र राेग विभाग में अाठ से 14 मार्च तक ग्लूकाेमा सप्ताह मनाया जा रहा है। ‘बीट इन्विजिबल ग्लूकाेमा’ थीम पर मनाए जा रहे इस कार्यक्रम में राेगियाें से लेकर अाम लाेगाें तक पहुंचने के लिए डाक्टर्स अाैर मेडिकल स्टाफ की टीमें बनाई गई हैं। एनजीअाे, सामाजिक कार्यकर्ताअाें के साथ जहां ये टीमें शहर में जगह-जगह लाेगाें तक संदेश दे रही हैं वहीं गांवाें में भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें ग्लूकाेमा की जानकारी दे रही है।
ग्लूकाेमा हाे जाने के बाद दृष्टि वापस नहीं ला जा सकती है लेकिन इसे राेका जा सकता है। अब कई अत्याधुनिक जांच सुविधाएं अाैर दवाइयां उपलब्ध हैं। इनमें से प्रेशर टेस्ट, डेमेज फील्ड चार्टिंग अाैर अाेसीटी जैसी जांच अाई हाॅस्पिटल में हाे रही है।
-डा.जयश्री मुरली मनाेहर, सीनियर प्राेफेसर नेत्र राेग विभाग
पीबीएम हाॅस्पिटल का नेत्र विभाग ने इस बीमारी से बचाव अाैर उपचार से जुड़ी जानकारियां अाम लाेगाें तक पहुंचाने के लिए रविवार से पूरे सप्ताह तक अायाेजन कर अाम लाेगाें काे बीमारी के बारे में जागरूक किया। मकसद यह है कि लाेग समय रहते इस बीमारी के बारे में जान लें ताे अंधता से बच सकते हैं।
-डा.अंजू काेचर, ग्लूकाेमा क्लीनिक इंचार्ज एवं नेत्र राेग विभागाध्यक्ष
बच्चे की अांखें जन्म से ही सामान्य से बड़ी हाे ताे उसे जन्मजात ग्लूकाेमा हाे सकता है। अांख से लगातार पानी अाना, तेज राेशनी में अांख न खुलना, अांखें नीली पड़ना जैसे लक्षण भी इस बीमारी के हैं। एेसे में बच्चाें के प्रति विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
-डा.अनंत शर्मा, ग्लूकाेमा पर विशेष अध्ययन कर रहे पीबीएम के डाक्टर