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किसानाें की पीड़ा काे अभिव्यक्त किया गाेयल ने

एक वर्ष पहले
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बीकानेर इतिहास दर्शनडाॅ.शिव कुमार भनाेत

गाेयल जी ने अपने संबाेधन में राजाअाें काे अाह्वान करते हुए यह भी कहा कि राजाअाें का स्थान अभी तक यदि वे सच्चे राजा बन कर रहना चाहें, अाैर केवल चाहें ही नहीं उस अाैर तैयारी अाैर गति काे भी बनाए ताे, संभवत: भविष्य में भी बना रह सकता हैं किंतु कब तक उनका स्थान रहे अाैर कब तक वे इस तरह स्थान बनाए रखना पसंद करें, यह काेई नहीं कह सकता। किसानाें की समस्याअाें का जिक्र करते हुए उन्हाेंने कहा, किसान जाे राष्ट्र की रीढ़ है, उस अाेर इतनी उपेक्षा किस काम की? उसे ताे अनुचित लाग-बाग, बेगार तथा एेसे ही अनुचित दूसरे बाेझाें से जितनी जल्दी राहत मिले उतना ही अच्छा है। उस बिचारे काे शासन सुधाराें या एेसे ही दूसरे वैधानिक सुधाराें से सीधा काेई मतलब न हाेते हुए सदा यही अाशा लगाए रहते बैठा रहना पड़ता है कि उसके सिर का अाैर छाती पर का बाेझ कैसे कम हाे? जैसे भूखा ताे राेटी मिलने से ही तृप्त हाेता है इसी प्रकार जब तक किसान की रात-दिन की कठिनाइयाें का हल न निकले, उसे बढ़े-बड़े वैधानिक सुधाराें की घाेषणा से जल्दी ही कुछ मिलने वाला नहीं है। सबसे अधिक अखरने वाला बाेझ उसके लिए है उसका जागीरदार। जागीरदार के लिए न काेई कानून है, न न्याय वह चाहे जब चाहे जैसे किसान के साथ चाहे जाे कर सकता है अाैर उसके राज में कहीं काेई सुनवाई नहीं हाेती। जागीरदाराें की मनमानी भी अब ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। इस प्रकार गाेयल ने अपने संबाेधन में जागीरदाराें काे भी लपेट में लिया। (लगातार)
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