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गाेयल ने उजागर किया बीकानेर में भाषण-स्वातंत्र्य एवं शासन सुधाराें का सत्य

एक वर्ष पहले
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बीकानेर इतिहास दर्शनडाॅ.शिव कुमार भनाेत

लक्ष्मणगढ़ में समायाेजित हुए इस जयपुर राज्य प्रजा मंडल अधिवेशन में अपने अध्यक्षीय भाषण का समापन करते हुए रघुवरदयाल गाेयल ने जाे कहा था, उसका एक अंश यहां पर उद्धृत किया जाना प्रासंगिक हाेगा। उन्हाेंने कहा कि, मैं जानता हूं कि इस वार्षिक सम्मेलन का अध्यक्ष पद देकर अापने मुझे जाे सम्मान प्रदान किया है मैं उसके लिए कितना याेग्य हूं अाैर कितना नहीं हूं। मैं यह भी जानता हूं कि मुझे कितना बाेलना अाता है अाैर अापकाे यह भूल नहीं जाना चाहिये कि मैं अापका पड़ाैसी हाेते हुए भी उस जगह का हूं जहां भाषण-स्वातंत्र्य केवल बड़ी-बड़ी घाेषणाअाें के सफेद कागज पर काली स्याही से छपा हुअा है अाैर शासन सुधार देखाे अाैर इंतजार कराे की प्रक्रिया में महीनाें से लटकते चले अा रहे हैं। इस प्रकार गाेयल जी ने अपने संबाेधन में यह स्पष्ट रूप से संकेतित कर दिया था कि वे जिस पड़ाैसी राज्य बीकानेर से थे वहां पर भाषण- स्वातंत्र्य मात्र दिखावे के रूप में था अाैर शासन सुधाराें के नाम पर शासन की टालू नीति विद्यमान थी। यथार्थ में वहां की राजशाही की नीयत शासन-सुधाराें की थी ही नहीं। दाे दिनाें तक चले उस अधिवेशन में गाेयल जी की अध्यक्षता में कई प्रस्ताव पारित किये गये जिनमें जयपुर रियासत में एक निजामत से दूसरी निजामत में खाद्यानाें के अावागमन पर लगी राेक काे हटाने अाैर ब्रिटिश सरकार से राजनैतिक कैदियाें की रिहाई की मांग करने व रामगढ़-सीकर पुलिस की ज्यादतियाें काे राेकने एवं अंत में जागीरदाराें द्वारा किसानाें के दुर्व्यवहार के प्रति चिंता अाैर राेष जाहिर करना अादि शामिल थे। (लगातार)
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