जेल में काैशिक तथा गाेयलजी की उपस्थिति की जानकारी मिलना

Bikaner News - जेल में एकातंवास गुजारते हुए ही दाऊ जी काे एक दिन यकायक यह पता चला था कि उस जेल में वे अकेले नहीं थे वरन् गंगादास...

Dec 04, 2019, 08:46 AM IST
Bikaner News - rajasthan news getting information about the presence of kashik and gaelji in jail
जेल में एकातंवास गुजारते हुए ही दाऊ जी काे एक दिन यकायक यह पता चला था कि उस जेल में वे अकेले नहीं थे वरन् गंगादास काैशिक तथा रघुवर दयाल गाेयल भी उसी जेल में बंद थे। तत्संबंधी ब्याैरा देते हुए उन्हाेंने अपने संस्मरणात्मक वृतांत में लिखा कि, एक दिन अजीब बात हुई। टिफिन खाेला ताे पाया कि छाेटी कटाेरी में रबड़ी थी, सांगरी का साग था अाैर राेटी भी चुपड़ी हुई थी। मैंने साेचा कि घर में इतना साधन नहीं है फिर यह रबड़ी कैसे अाई? टिफिन लाने वाले से मैं पूछने ही वाला था कि दूर से अावाज अाई, दाऊ जी मेरा टिफिन अापके पास अा गया मालूम पड़ता है। अावाज गंगादास काैशिक की थी, यह मैं पहचान गया। वे मेरी काेठरी से एक काेठरी छाेड़, अगली काेठरी में रखे गये मालूम पड़ते थे। चूंकि हमें इस काल काेठरी से बाहर ताे कभी निकला ही नहीं जाता था इसलिए वहां पर एक दूसरे की उपस्थिति अज्ञात ही रही। काैशिक ने मुझे पहचान लिया था। मैंने वापस पूछा कि मेरा टिफिन तुम्हारे पास अा गया हाेगा। उन्हाेंने हाॅ कहा। इस तरह मुझे पता लगा कि काैशिक भी मेरी तरह ही काल काेठरी में रखे हुए है। काैशिक जी मेरे से कहीं अधिक चतुर थे। उन्हाेंने राेटी देने काे अाने वाले कर्मचारी काे पटा लिया मालूम हाेता था। उन्हाेंने चिट लिख कर मेरे पास भिजवाने की व्यवस्था बैठा ली। चिट भेज कर मुझे सूचित किया कि गाेयल जी भी इसी जेल में है। इसलिये मैं अपने अापकाे यहां पर अकेला नहीं समझू। कुल 18 दिन मुझे काल काेठरी में रखने के बाद प्रशासन ने यह समझ लिया कि इन लाेगाें पर काल काेठरी व एकातंवास का काेई भी असर नहीं पड़ सका है। अत: वहां से उठा कर चाैक की 3 नंबर की बैरक में डल दिया गया। (लगातार)

बीकानेर इतिहास दर्शन

डाॅ.शिव कुमार भनाेत

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