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एचके कृपलानी का बीकानेर राज्य का प्राइम मिनिस्टर बनना

एक वर्ष पहले
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बीकानेर इतिहास दर्शनडाॅ.शिव कुमार भनाेत

लक्ष्मणगढ़ से लाैटने के बाद गाेयल ने फिर से महाराजा साहब से संपर्क करने का प्रयास किया परंतु महाराजा साहब विदेश यात्रा पर गए हुए थे। उन्हें पता चला कि महाराजा साहब युद्ध मैदान में ईरान-इराक के दाैर पर है जहां वे बीकानेर की फाैजाें का निरीक्षण कर उनका उत्साहवर्द्धन कर रहे थे। एेसी अवस्था में गाेयल ने जयपुर से प्रकाशित हाे रहे हिन्दी दैनिक लाेकवाणी में गंगादास काैशिक की तरह की वस्तु स्थिति पर प्रकाश डालने वाला एक तथ्यात्मक लेख प्रकाशित कराया। इस लेख के प्रकाशित हाेने से महाराजा साहब के प्राइवेट सैक्रेटरी महाेदय काे बड़ी परेशानी महसूस हुई। इस परेशानी का कारण यह था कि एेसे लेखाें से ठा. प्रताप सिंह के द्वारा फैलाई जाने वाली झूठी अफवाहाें का पर्दाफाश हाेता था। इस लेख का हवाला देकर ठा. प्रताप सिंह ने महाराजा काे भड़काने की काेशिशें अाैर तेज कर दी। इसी दाैरान एक नया विकास क्रम यह घटित हुअा िक 10 िदसंबर, 1943 काे प्राइम मिनिस्टर पन्निकर काे फाॅरेन एंड पाेलीटिकल मिनिस्टर बनाकर, बम्बई से लाए गए एचके कृपलानी काे बीकानेर रियासत का नया प्राइम मिनिस्टर एचके कृपलानी का प्रश्न था, वे बम्बई प्रांत के गवर्नर के एडवाइजर रह चुके थे अाैर उन्हें संवैधानिक मामलाें का विशेषज्ञ माना जाता था। उन्हें बड़ी काेशिश करके बीकानेर लाया गया था। उन्हें बीकानेर राज्य की हुकूमत के द्वारा बीकानेर लाए जाने की पृष्ठभूमि में जाे कारणा अन्तर्निहित रहे हाे, उन्हें अनदेखा कर दिया जाए तब भी गाेयलजी अाैर बीकानेर के राजनीतिक कार्यकर्ता इस अागमन से कुछ खुश दिखाई दे रहे थे। (लगातार)
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