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जीतने की जिद: इन महिलाओं से सीखिए...असंभव कुछ भी नहीं

2 वर्ष पहले
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जिस पति ने काम का विरोध किया, अब मार्केटिंग उनके जिम्मे: 5 किलो मौली से शुरुआत, अब देशभर में सप्लाई
परिमल हर्ष| बीकानेर |

किरण खत्री ने अपने खुद के काम की जिद के लिए अपनों का विरोध झेला। पति ही नहीं, ससुर व ससुराल के अन्य लोगों ने उनसे किनारा कर लिया। किरण ने जो काम चुना, वो भी ऐसा जिसमें घंटों मेहनत करने पर भी एक किलो पर 10 रुपए मिलते लेकिन इसके बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी। 9 साल की मेहनत का नतीजा आज उनके सामने है। कृष्णा खत्री आज पूरे भारत में पहचानी जाती हैं। कृष्णा को लोग उनके प्रोडक्ट रिद्धी-सिद्धी मौली (कलावा) से पहचानते हैं। बकौल कृष्णा-2011 में घर की स्थिति ऐसी थी कि दो वक्त का खाना भी मुश्किल से मिल पाता। पति मुरलीधर 2500 रुपए महावार की नौकरी करते। पांच जनों के परिवार में इतने कम पैसों से गुजारा मुश्किल था। फिर घर में मौली बनाकर बेचने की ठानी। आज हर महीने करीब एक हजार किलो मौली बेचती हैं। इस काम में करीब 15 लोग उसके साथ लगे हैं। सबसे रोचक सबसे पहले विरोध जताने वाले पति अब उनके ब्रांड की मार्केटिंग करते हैं।

मौली के बाद अब पूजन सामग्री बाजार में उतारने की तैयारी... कृष्णा पाली स्थित महाराजा उम्मेद मिल से सूत मंगवाकर मौली तैयार करतीं। 2011 से लेकर फरवरी 2019 तक एक ही मिल से कच्चा माल आ रहा है। मौली को मिले रिस्पॉन्स का नतीजा है कि अब कृष्णा ने मौली के अलावा पूजन सामग्री भी तैयार करनी शुरू कर दी। विशेषकर गोमूत्र, गंगाजल, धूप व अन्य सामग्री। अलग-अलग पैकिंग में तैयार पूजन सामग्री भी जल्द देशभर के बाजारों में आने वाली है।

तैराकी में कई स्टेट रिकाॅर्ड हैं नैऋति के नाम: 1968 में अर्जुन अवार्डी का 100 मीटर बैक स्ट्रॉक रिकार्ड 2015 में तोड़ दिया
बीकानेर | नैऋति व्यास का नाम आते ही शरीर में हलचल शुरू हो जाती है और उत्साह का संचार होने लगता है। हो भी क्यूं नहीं। 18 साल की इस युवती ने तैराकी में कई स्टेट रिकार्ड अपने नाम कर लिए। और तो और 1968 में 100 मीटर बैक स्ट्रॉक में अर्जुन अवार्डी रीमादत्त द्वारा बनाया गया स्टेट रिकार्ड भी 2015 में नैऋति ने तोड़ा। अब उसके नाम यह रिकार्ड है। उसमें यह रिकार्ड 1.18.83 का समय लेकर बनाया। इसके अलावा 100 और 200 मीटर बैक स्ट्राक तैराकी के स्टेट रिकार्ड भी उसके नाम ही है।ढाई साल की उम्र में तैराकी शुरू करने वाली बीकानेर की इस लाडली ने 2019 में ही नेशनल स्तर पर खेली गई खेलो इंडिया में ब्रांज मेडल जीता। सितंबर में तिरुअन्नतपुरम में खेली गई नेशनलस्तर यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में उसे आठवां और नवंबर में बैंगलोर में खेले गए कंपीटिशन में उसे चौथा स्थान मिला। नैऋति ने तैराकी की तैयारी बीकानेर में राजीव गांधी तरणताल के अलावा जयपुर में की। तैराकी के उसके जिद को उसकी दादी का पूरा सपोर्ट मिला।

प्रैक्टिस के लिए सुबह 4 बजे उठती है, पूरा परिवार साथ आता है: नैऋति तैराकी में स्टेट और नेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ पढ़ाई पर भी पूरा फोकस करती है। 2019 में वह महाराजा गंगासिंह विवि से बीएससी द्वितीय वर्ष की परीक्षा दे रही है। शुरू से लेकर अब तक उसका परिणाम हमेशा से फर्स्ट डिविजन ही आई। इसके लिए वह और उसका पूरा परिवार सुबह साढ़े चार बजे उठकर अपने-अपने काम में लगते हैं। पूरा परिवार उसकी तैराकी और पढ़ाई में साथ दे रहा है।

दूसरों को आगे बढ़ाने की जिद: पैर में फ्रैक्चर के बावजूद व्हील चेयर से पहाड़ों पर चढ़ाई, 25 महिलाएं भी साथ ले गईं
बीकानेर | पर्वतारोही सुषमा बिस्सा भी ऐसी महिला हैं, जिसके जीतने की जिद को डॉक्टरों ने भी माना और पैर में फ्रैक्चर होने के बाद भी पहाड़ों पर जाने के लिए इजाजत दे दी। क्योंकि, सुषमा ने डॉक्टरों के सामने यह तर्क रखा कि अगर मैं नहीं गई तो 25 महिलाएं भी इससे वंचित रह जाएगी। सुषमा की हिम्मत और तर्क के सामने डॉक्टरों की टीम ने उसे पहाड़ों पर जाने की इजाजत दे दी। उबड़-खाबड़ रास्तों पर सुषमा व्हील चेयर पर अकेले चली। हिमालय परिवार की 23 जून से शुरू हुई सिंधु दर्शन यात्रा के दौरान पहले अंडमान-निकोबार व इसके बाद लेह-लद्दाख की यात्रा की। अंडमान-निकोबार जाने के एक सप्ताह पहले सुषमा के पैर में फ्रैक्चर हो गया। डॉक्टरों ने चलने के लिए भी मना कर दिया। इस यात्रा में शामिल 25 महिलाओं को उनके घर वालों ने सुषमा के साथ होने पर ही भेजने की इजाजत दी। ऐसे में इन महिलाओं के भी सिंधु दर्शन यात्रा पर जाने पर खतरा मंडराने लगा। ऐसे में सुषमा ने व्हील चेयर पर यात्रा करने की ठान ली। सुषमा ने इसके बाद दिसंबर में अंडमान-निकोबार की यात्रा की।

पीएम मोदी के गंगा मिशन-नमामी गंगे में भी शामिल हुईं, 1500 किमी का सफर राफ्टर नावों पर तय किया: पीएम नरेन्द्र मोदी के गंगा सफाई अभियान में जुड़ी 40 महिलाओं में बीकानेर की सुषमा बिस्सा भी शामिल थी। इसमें हरिद्वार से पटना तक 1500 किमी का सफर राफ्टर नावों पर तय किया। इन शहरों में पहुंचकर इन महिलाओं ने गंगा की सफाई की। इस अभियान के शुरुआत पीएम मोदी ने इन महिलाओं के साथ बात की।

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