धैर्य धारण करना ही उचित समझा गाेयल अाैर साथियाें ने
बीकानेर इतिहास दर्शनडाॅ.शिव कुमार भनाेत
गाेयलजी अाैर उनके साथियाें की खुशी का कारण यह था कि, बीकानेर रियासत के प्राइम मिनिस्टर पद पर एचके कृपलानी के अा जाने से इन लाेगाें की बीकानेर में नए सुधाराें की अाशाएं बढ़ गई क्याेंकि पूर्व में महाराजा साहब ने इन लाेगाें काे यही संकेत दिया था कि उपयुक्त संवैधानिक विशेषज्ञ की खाेज में ही राजनैतिक सुधाराें में देरी हाे रही थी। अब कृपलानी के रूप में एक संवैधानिक विशेषज्ञ बीकानेर राजय काे प्राप्त हाे गया था अत: राजनीतिक कार्यकर्त्ताअाें की अपेक्षाअाें का बढ़ना स्वाभाविक ही था। फरवरी, 44 में बड़े महाराजकुमार का विवाह अाैर मार्च में छाेटे महाराजकुमार का विवाह निश्चित हाे चुका था। इसलिए यह भी स्वाभाविक था कि महाराजा साहब की तत्संबंधी व्यस्तता उन्हें शासन सुधाराें की दृष्टि से कुछ करने नहीं देगी। अत: इन कार्याें से निवृत्त हाेकर ही महाराजा साहब के लिए इस अाेर ध्यान दे पाना संभव था। वैसे बीकानेर राज्य के नए प्राइम मिनिस्टर एचके कृपलानी ने गाेयलजी काे 19 मार्च काे मुलाकात का माैका दिया अाैर सहानुभूतिपूर्ण बातचीत के दाैरान उन्हें यह बताया कि वे संवैधानिक सुधाराें की तैयारी में ही व्यस्त है परंतु इस कार्य काे संपन्न करने में अभी कुछ समय लगेगा अत: अाप लाेग इसे लेकर काेई जल्दबाजी नहीं करें। कृपलानी जी की बात सुनकर अब धैर्य धारणा के अतिरिक्त अन्य काेई विकल्प शेष नहीं बचा था। अत: गाेयलजी अाैर उनके साथियाें ने यही निर्णय लिया कि उतावली करने के बजाय थाेड़ा धैर्य धारण करके हमारे लिए अपने अापकाे अभी अन्य रचनात्मक कार्याें में लगाए रखना ही उचित हाेगा। (लगातार)