जयनारायण व्यास अाैर बाबा नृसिंहदास से भी प्रेरणा मिली थी काैशिक काे

Bikaner News - तब गंगादास काैशिक ने अपनी बात काे स्पष्टता प्रदान करते हुए कहा कि, यह 1932-33 का साल था। सन् 1940 में रियासत जाेधपुर के...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:51 AM IST
Bikaner News - rajasthan news kashyak was also inspired by jayanarayan vyas and baba narsindas
तब गंगादास काैशिक ने अपनी बात काे स्पष्टता प्रदान करते हुए कहा कि, यह 1932-33 का साल था। सन् 1940 में रियासत जाेधपुर के नागाैर कस्बे में मारवाड़ लाेक परिषद के वार्षिक अधिवेशन में बीकानेर से जाने का साैभाग्य केवल उन्हीं काे मिला था। व्यासजी, जयनारायणजी से बीकानेर की राजनीति के बारे में बहुत सी चर्चा हुई ताे व्यास जी ने काैशिक काे एक मार्ग सुझाया था अाैर वह था राजनीतिक संगठन। बीकानेर में उस समय राजनीति की चर्चा करना गुनाह माना जाता था। व्यास जी ने परामर्श दिया कि भादरा के खूबराम जी सराफ के साथ मिल कर जनसेवा के कार्य करने उन्हें जुट जाना चाहिए। व्यास जी ने उन्हें यह भी बताया कि खूबराम जी में बीकानेर की जनता की सेवा करने की तड़फन है। वही उन्हें राजस्थान के एक अन्य तपस्वी नेता के दर्शन हुए वे थे स्वनामधन्य बाबा नृसिंहदासजी। वे नागाैर के अादिवासी थे, उनके साथ भी उनकी खुल कर चर्चा हुई। उन्हाेंने भी सेवा कार्य में खप जाने की राय दी अाैर बताया कि जब तक बीकानेर की जनता में कष्ट सहने की शक्ति नहीं अाएगी तब तक कुछ हाेने वाला नहीं है। उन्हाेंने गांधी जी के एक वाक्य का उल्लेख किया जाे उनके साप्ताहिक हरिजन दिनांक 4 फरवरी 1939 मेें प्रकाशित हुअा था। वह वाक्य था-यदि बीकानेर की जनता डर काे दूर कर बलिदान की कला काे सीख ले ताे उसे अपना वांछित फल मिल जाएगा। इन दाेनाें की अाज्ञा उनके दिल में बस गई। उसी काे ध्यान में रखते हुए जून 1942 में अब वे वनस्थली के उस ट्रेनिंग कैंप मेरे साथ ट्रेनिंग लेने अाए थे। (लगातार)

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