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कृपलानी ने दिया ठा.प्रताप सिंह से भी इजाजत लेने का परामर्श

एक वर्ष पहले
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इस पर बीकानेर राज्य के प्राइम मिनिस्टर मि.कृपलानी ने यह कहा कि फंड के लिए ताे नहीं मगर सभा में हाेने वाला लाउड स्पीकर खर्च, अाप मेरे नाम लिख लीजिएगा। प्राइम मिनिस्टर की अाेर से यह छाेटा सा सहयाेग भी एेसा सहयाेग था जाे कार्यकर्ताअाें का उत्साह बढ़ाने वाला था। मि.कृपलानी के द्वारा प्रदर्शित इस प्रकार के सकारात्मक व्यवहार काे देख कर दाऊ जी अादि ने इसका अर्थ यह लिया कि उन्हें मीटिंग करने की इजाजत मिल गई है। बीकानेर के लाेगाें के लिए ताे यह एक उपलब्धि से कम नहीं थी चूंकि अाज तक बीकानेर काेई सार्वजनिक सभा हाेने ही नहीं दी गई थी। परंतु, दाऊजी एवं साथ गए कार्यकर्ताअाें की यह खुशी अधिक समय तक कायम नहीं रह पाई। अगले ही क्षण मि.कृपलानी ने दाऊजी काे चिंता में डाल देने वाली बात कहते हुए यह कहा कि मैंने अापकी दरख्वास्त पर यस लिख दिया है परंतु, अापकाे इसे राज्य के हाेम मिनिस्टर ठा.प्रताप सिंह के समक्ष प्रस्तुत करके उनसे तत्संबंधी अादेश प्राप्त कर लेना चाहिये क्याेंकि किसी भी अाम सभा काे समयाेजित करने के लिए पुलिस से जुड़ी व्यवस्थाएं करनी हाेती है, जाे कार्य सीधे ताैर पर हाेम मिनिस्टर के कार्यक्षेत्र का विषय है। अत: अाप उन्हीं से अाज्ञा ले लीजिए। यह दाऊजी के लिए एक अाघात से कम नहीं था। ठाकुर प्रताप सिंह ताे एेसे व्यक्ति थे, जिन्हाेंने महाराजा के प्राइवेट सेक्रेटरी रहते हुए ही इन परिषद से जुड़े लाेगाें के साथ बुरा करते रहने में काेई काेर-कसर नहीं छाेड़ी थी, फिर अब ताे वे स्वयं बीकानेर स्टेट के हाेम-मिनिसटर बन चुके थे। (लगातार)
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