पढ़ाई का बोझ अौर तनाव से डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं मेडिकल के छात्र

Bikaner News - डॉक्टर बनने का सपना रखने वाले मेडिकल छात्रों को कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद पढ़ाई, क्लीनिकल -नॉन क्लीनिकल काम,...

Nov 11, 2019, 07:36 AM IST
डॉक्टर बनने का सपना रखने वाले मेडिकल छात्रों को कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद पढ़ाई, क्लीनिकल -नॉन क्लीनिकल काम, व्यायाम नहीं करने व पढ़ाई के बोझ अौर तनाव से माइल्ड डिप्रेशन का शिकार हो रहे है। दिनभर थकान के बावजूद ठीक तरह से नींद नहीं अाती। एसएमएस जयपुर समेत सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 120 छात्रों का पीडोमीटर सॉफ्टवेयर के जरिए अध्ययन करने पर खुलासा हुअा है। हालांकि 575 में से 120 छात्र ही अध्ययन के लिए योग्य पाए गए। इस साल जुलाई से सितंबर तक तीन माह तक अध्ययन में 35 फीसदी मेडिकल माइल्ड डिप्रेशन, 27 फीसदी एंजाइटी अौर 22 फीसदी मेडिकल छात्रों को ठीक तरह से नींद नहीं अाती। अध्ययन में ये भी सामने अाया कि जो मेडिकल छात्र रोजाना 2 से 4 हजार स्टेप चलता था। सॉफ्टवेयर अपलोड करने व हरेक तरह की मॉनिटरिंग के बाद रोजाना 10 हजार स्टेप तक चलें।

देश में पहली बार पीडोमीटर से 7 मेडिकल कॉलेजों के छात्रों पर रिसर्च

एमसीआई छात्रों के फिजिकली फिट रहने के लिए बनाएगा पॉलिसी

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के फॉर्माकोलॉजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर लोकेन्द्र शर्मा ने बताया कि मेडिकल काउंसिल अॉफ इंडिया व इंडियन काउंसिल अॉफ मेडिकल रिसर्च नई दिल्ली की अोर से देशभर में मेडिकल छात्रों के फिजिकली अौर मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए एक पॉलिसी तैयार कर रहा है। जिसके लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर, झालावाड़, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर एवं कोटा में सैकंड ईयर में पढ़ रहे मेडिकल छात्रों को पीडोमीटर सॉफ्वेयर के जरिए डिप्रेशन, एंजाइटी अौर नींद का अध्ययन कराया है।


ऐसे हुआ अध्ययन : नींद नहीं आना, बैचेनी, थकान व तनाव से छुटकारा दिलवाने के लिए मेडिकल स्टूडेंटों को फिजिकली फिट रहने के लिए पीडोमीटर सॉफ्टवेयर के जरिए मूल्यांकन किया। राजस्थान पहला राज्य है, जहां पीडोमीटर सॉफ्टवेयर के जरिए मूल्यांकन किया। मेडिकल छात्रों का दौड़ना, तैरना, वेट लिफ्टिंग, साईकिल चलाना, घूमना, ई-बाइक राइड, योगा, रॉक क्लाइंबिंग आदि पैरामीटर के आधार पर कर न केवल फिजिकली फिट बल्कि स्ट्रेस का पता भी किया।


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