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स्वयं के भीतर काे जानने-समझने का तरीका है ध्यान: मुनि कुशलकुमार

एक वर्ष पहले
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अाअाे करें प्रेक्षाध्यान विषय पर संगाेष्ठी अायाेजित हुई

स्वयं के भीतर काे जानने अाैर समझने का सरल तरीका है ध्यान। ध्यान से हम ममत्व अाैर खुद काे पाने की प्रक्रिया काे हासिल कर सकते है। यह कहना था मुनि कुशलकुमार जी का। मुनिश्री गुरुवार काे गंगाशहर स्थित नैतिकता का शक्तिपीठ परिसर में अाचार्य तुलसी की मासिक पुण्यतिथि पर अायाेजित अाअाे करें प्रेक्षाध्यान विषय पर संगाेष्ठी में ध्यान की महत्ता पर विचार व्यक्त कर रहे थे। इस माैके पर प्रेक्षाध्यान प्रशिक्षक धर्मेंद्र बाेथरा ने कहा कि जीवन काे श्रेष्ठ बनाने के लिए प्रेक्षाध्यान एेसा उपाय है जिसकाे अात्मसात कर हम जीवन काे नवीन अायाम प्रदान कर सकते है। संगाेष्ठी के दाैरान अाचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने प्रेक्षाध्यान की महत्ता काे सामने रखते हुए कहा कि प्रेक्षाध्यान जीवन काे रूपान्तरित करने की प्रेरणा का संचार करता है। संगाेष्ठी के प्रारंभ में मुनिश्री मणिलाल जी ने मंगल मंत्राेच्चार किया। समापन पर अमरचंद साेनी ने अाभार जताया।

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