शंकर महाराज काे मिला था चांदी बेच कर गाेयलजी काे धनराशि पहुंचाने का जिम्मा

Bikaner News - बीकानेर से जयपुर पहंुचे शंकर महाराज की इस बैचेनी तथा शीघ्रताशीघ्र बीकानेर लाैटने की व्यग्रता काे देख कर गाेयलजी...

Nov 11, 2019, 07:26 AM IST
बीकानेर से जयपुर पहंुचे शंकर महाराज की इस बैचेनी तथा शीघ्रताशीघ्र बीकानेर लाैटने की व्यग्रता काे देख कर गाेयलजी ने उन्हें फटकारते हुए कहा केि इतनी जल्दी क्या है, क्या डर है, यदि इतना ही डर है ताे फिर अाए ही क्याें? गाेयलजी की इस फटकार से वे कुछ दुखी ताे हुए परंतु उसी क्षण गाेयलजी के बिल्कुल सन्निकट अाकर उन्हाेंने धीरे से यह बताया कि, बाबूजी, कार्य कुछ एेसा ही लेकर अाया हूं, जाे किसी दूसरे काे साैंपा नहीं जा सकता था अाैर जिसे अविलंब संपादित किया जाना नितांत ही जरूरी भी था। दरअसल, वे कुछ धनराशि लेकर गाेयलजी के पास पहुंचे थे, जाे वनस्थली में शिक्षार्जन कर रही उनकी दाे बच्चियाें के खर्च अादि की व्यवस्था के लिए गाेयलजी तक पहुंचाई जानी निहायत ही जरूरी थी। उन्हाेंने गाेयलजी काे यह बताया कि घर में बीबीजी कई दिनाें से मुझसे यह अाग्रह कर रही थी कि घर में पड़ी चांदी की दाे सिल्लियाें काे किसी तरह से बिकवा कर वह धनराशि गाेयलजी काे पहंुचानी है ताकि वनस्थली में शिक्षा प्राप्त कर रही दाेनाें बच्चियांे चंदाे अाैर सब्बाें की पढा़ई चलती रहे व बाबूजी तत्सबंधी चिंता से मुक्त हाेकर अपने संघर्ष में कहीं भी रहे अाैर कुछ भी करें। बीबी जी काे यह चिंता भी सता रही थी कि यदि यह सिल्लियां घर पर ही पड़ी रही ताे कहीं राज के पंजे में न पड़ जाए। यह कार्य दाऊजी के सिपुर्द किया था परंतु वह ताे जयपुर चले गए। अब यह कार्य अापकाे ही करना है तथा इन्हें बेचने से जाे पैसा अाए, उसे अाप स्वयं जयपुर जाकर बाबू जी तक पहुंचा देवें ताकि यह पैसा इस काम अा जाए। (लगातार)

बीकानेर इतिहास दर्शन

डाॅ.शिव कुमार भनाेत

X
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना