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एक जाजम पर मुखर हुई मायड़ भाषा मान्यता की मांग, एक स्वर में कहा मान्यता का मान हमारा हक

Bikaner News - राजस्थानी बिना क्यां राे राजस्थान। म्हारी जुबान राै ताळाे खाेलाे। एक मंच अाैर मंच पर जुटे संत, विभिन्न दलाें के...

Feb 22, 2020, 07:41 AM IST

राजस्थानी बिना क्यां राे राजस्थान। म्हारी जुबान राै ताळाे खाेलाे। एक मंच अाैर मंच पर जुटे संत, विभिन्न दलाें के राजनेता, मंत्री, विधायक, पूर्व मंत्री, पार्षद, साहित्यकार, रंगकर्मी, कलाधर्मी, विद्यार्थी, अामजन, सामाजिक संगठन अाैर बीकानेर सहित छह जिलाें से अाए मायड़ भाषा के हैताळुअाें ने एक स्वर में राजस्थानी भाषा काे संवैधानिक मान्यता अाैर प्रदेश में दूसरी राजभाषा का दर्जा देने की मांग के लिए हुंकार भरी। सरकार काे चेताया उदासीनता छाेड़े अाैर कराेड़ाें राजस्थानियाें की दशकाें से की जा रही मायड़ भाषा मान्यता की मांग काे मान दे। सम्मान दे। मायड़ भाषा मान्यता के सपनाें काे साकार करे। माैका था विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित कर्मचारी मैदान में राजस्थानी भाषा मान्यता की मांग के साथ एक दिवसीय धरना दिया गया। इस माैके पर ऊर्जा मंत्री डाॅ.बी.डी.कल्ला ने कहा कि वर्ष 2003 में राजस्थान सरकार ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार काे भिजवाया था। राजस्थानी भाषा काे मान्यता हासिल हाे इसके लिए प्रदेश सरकार गंभीर प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार में लंबित मान्यता की मांग काे साकार करवाने के लिए हम सभी काे अगर दिल्ली जाकर प्रयास करना हाेगा ताे हम सभी साथ मिलकर चलेंगे सफल प्रयास करेंगें की हमें मान्यता का मान हासिल हाे। धरने के दाैरान स्वामी संवित साेमगिरि महाराज, उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने जयपुर से दूरभाष पर, विधायक गिरधारी महिया, बिहारी लाल विश्नाेई, पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी, डूंगरराम गेधर, डाॅ.सत्यप्रकाश अाचार्य, साहित्यकार मधु अाचार्य अाशावादी, जनार्दन कल्ला, सुरेंद्र सिंह शेखावत, सूरतगढ़ के साहित्यकार मनाेज स्वामी, हरिमाेहन सारस्वत, डाॅ.प्रशांत बिस्सा, रामगाेपाल विश्नाेई के साथ ही राजस्थानी माेट्यार परिषद केे डाॅ.गाैरीशंकर प्रजापत, डाॅ.हरिराम विश्नाेई, सरजीत सिंह, राजेश चाैधरी, डाॅ.नमामी शंकर अाचार्य, शंकर सिंह राजपुराेहित, डाॅ.गाैरीशंकर निमिवाल अादि ने मायड़ भाषा मान्यता के लिए मांग की। इस माैके पर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन साैंपा गया। वहीं दूसरी ओर साझी विरासत की ओर से प्रवासी जानकीदास मोहता, आसुतोष झंवर, वल्लभ डागा आिद का सम्मान किया गया। एमएस कॉलेज, एनसीसी की ओर से मातृ भाषा दिवस पर छात्राओं ने मातृ भाषा संवर्द्धन का संकल्प लिया। योगेश व्यास के संयोजन में युवाओं ने मातृ भाषा के विकास की शपथ ली।

महिलाअाें ने कहा राजस्थानी भाषा की मान्यता हमारा हक

राजस्थानी भाषा मान्यता की मांग के साथ अायाेजित एक दिवसीय धरने के दाैरान बड़ी संख्या में महिलाअाें ने भी भागीदारी की। इस दाैरान महिलाअाें ने बुलंद स्वराें में कहा हमारी समृद्ध राजस्थानी भाषा काे मान्यता का मान मिलना ही चाहिए यह हमारा हक है हमारा अधिकार है। इस दाैरान साहित्यकार माेनिका गाैड़, मनीषा अार्य साेनी, सुमन शेखावत, पूर्व पार्षद राजकुमारी मारु, सीमा स्वामी, लक्ष्मी साेढ़ा, सूरतगढ़ से रवीना स्वामी, अजय कंवर, उषा प्रजापत, शारदा, रिया, कविता, अन्नु, भावना, प्रीति, एेश्वर्या, विजय कंवर, कुसुमलता स्वामी, कृति हर्ष, साेनू प्रजापत अादि शामिल थी।

इन्हाेंने भी दिया धरना बाेले, मायड़ भाषा का मान मिले

धरने के दाैरान जानकीनारायण श्रीमाली, कमल रंगा, राजेंद्र जाेशी, सत्यदीप शर्मा, पृथ्वीराज रतनू, विजय काेचर, परमानंद अाेझा, सरदार अली पड़िहार, राजाराम स्वर्णकार, राजेंद्र स्वर्णकार, प्रमाेद शर्मा, डाॅ.अजय जाेशी, राजू पारीक, हरीश बी.शर्मा, अरविंद ऊभा, अनूप गहलाेत, माेईनुद्दीन काेहरी, प्रदीप उपाध्याय, लीलाधर साेनी, कैलाश टाक, तुलसीराम माेदी, पंकज सेवग, कृष्ण पुराेहित, सुनील बांठिया, याेगेश व्यास, पुखराज स्वामी, राहुल जादूसंगत, महेंद्र दान बीठू, श्रवण प्रजापत, अानंद जाेशी, डूंगर सिंह तेहनदेसर, रामदयाल मूंड, मदनलाल दासाैड़ी, राजूराम बिजारणियां, कन्हैया उपाध्याय, जुगलकिशाेर पुराेहित, अाेमप्रकाश साबणियां, भंवर स्वामी, जगदीश स्वामी अादि ने मायड़ भाषा मान्यता की मांग की।

ज्ञापन में राजस्थानी भाषा काे संवैधानिक मान्यता देने अाैर प्रदेश में दूसरी राजभाषा का दर्जा देने की मांग

विश्व मातृभाषा दिवस के माैके पर दिए गए धरने के दाैरान राजस्थानी माेट्यार परिषद की अाेर से प्रधानमंत्री अाैर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन साैंपा गया। प्रधानमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में जहां राजस्थानी भाषा काे संविधान की अाठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई है वहीं मुख्यमंत्री के नाम साैंपे गए ज्ञापन में राजस्थानी भाषा काे प्रदेश में दूसरी राजभाषा का दर्जा देने, प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा में राजस्थानी काे अनिवार्य रूप से लागू करने, सीनियर सैकेंडरी स्कूलाें में राजस्थानी विषय का अध्यापन अनिवार्य करने, स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रमाें में कक्षा 6 से 12 तक राजस्थानी भाषा का अध्ययन बढाने, नवक्रमाेन्नत स्कूलां में राजस्थानी साहित्य विषय के रूप में लागू करने, प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयाें में राजस्थानी के स्वतंत्र विभाग खाेले जाने, सभी सरकारी महाविद्यालयाें में राजस्थानी विषय अारंभ करने, काॅलेज व्याख्याता पदाें काे सृजित करने, गुड अकेडमिक रिकाॅर्ड नियम हटाने, रीट में राजसथानी भाषा काे जाेड़ने, प्रतियाेगी परिक्षाअाें में बाहरी राज्याें के अभ्यर्थियाें का काेटा 5 प्रतिशत करने अादि की मांग की गई है।






मायड़ भाषा की मान्यता के लिए हमें भीख नहीं बल्कि एकजुट हाेकर प्रदेश अाैर केंद्र सरकार पर दबाव बनाना हाेगा। हम बरसाें से मायड़ भाषा की मान्यता के लिए प्रयास कर रहे है पर राजस्थानी भाषा की मान्यता का हमारा सपना साकार नहीं हाे पाया है। यह अफसाेसजनक है। इस अफसाेस काे खत्म करने के लिए बुलंद अावाज में अपनी बात अाैर अपनी मांग काे पूरा करवाने का प्रयास करना ही हाेगा।
देवीसिंह भाटी, पूर्व मंत्री

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