राजस्थान / बांसवाड़ा के एक गांव में 32 साल से सरपंच बनते आ रहे हैं पति-पत्नी, लोग इन्हें 'सरपंच दंपती' बुलाते हैं

सरपंच शारदा मईडा पति पूर्व सरपंच मोहनलाल मईडा के साथ। सरपंच शारदा मईडा पति पूर्व सरपंच मोहनलाल मईडा के साथ।
सरपंच का चुनाव जीतने पर शारदा मईडा का स्वागत करते ग्रामीण। सरपंच का चुनाव जीतने पर शारदा मईडा का स्वागत करते ग्रामीण।
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सरपंच शारदा मईडा पति पूर्व सरपंच मोहनलाल मईडा के साथ।सरपंच शारदा मईडा पति पूर्व सरपंच मोहनलाल मईडा के साथ।
सरपंच का चुनाव जीतने पर शारदा मईडा का स्वागत करते ग्रामीण।सरपंच का चुनाव जीतने पर शारदा मईडा का स्वागत करते ग्रामीण।

  • बासवांड़ा के घटोल पंचायत समिति के गोलियावाडा गांव में 1988 से अब तक पति-पत्नी ही सरपंच बनते आ रहे हैं
  • हाल में संपन्न चुनाव में शारदा मईडा सरपंच बनीं, 1988 में पहली बार पति मोहनलाल मईडा सरपंच बने थे

दैनिक भास्कर

Jan 22, 2020, 03:42 PM IST

बांसवाड़ा. राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में घटोल पंचायत समित है। इसमें गोलियावाडा गांव में 32 साल यानी 1988 से अब तक पति-पत्नी ही सरपंच बनते आ रहे हैं। इस बार पहले चरण में यहां सरपंच चुनाव हो चुके हैं। इसमें पत्नी ने जीत दर्ज की। लगातार सरपंच बनने के चलते गांव के लोग अब इन्हें 'सरपंच दंपती' कहकर बुलाते हैं।

गोलियावाडा पंचायत में 1988 में सबसे पहले मोहनलाल मईडा सरपंच बने। इसके बाद जब यह सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हुई तो उनकी पत्नी शारदा मईडा ने यहां से सरपंच का चुनाव जीता। यानी तब से लगातार इस पंचायत में मईडा दंपति का 'राज' है। 

शारदा मईडा तीसरी बार सरपंच बनीं

पहले चरण के संपन्न चुनावों में शारदा मईडा तीसरी बार यहां सरपंच बनी। पति मोहनलाल 4 बार सरपंच बन चुके हैं। पति-पत्नी के लगातार सरपंच बनने का कारण इनका सरल स्वभाव, ग्रामीणों से जुड़ाव और क्षेत्र में विकास के काम को बताया जा रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में इस दंपती को चुनाव हराने के लिए हर बार और लोग भी खड़े। लेकिन, वह जीत नहीं पाए। 

पति-पत्नी कब-कब बनें सरपंच

  • गोलियावाडा में मोहनलाल मईडा पहली बार 1988 में सरपंच बने। तब यह खेरवा पंचायत हुआ करती थी। उसके बाद परिसीमन में 1995 में खेरवा पंचायत को दो भाग हो गए और गोलियावाडा नई पंचायत बनाई गई। इसमें 1995 में सरपंच के चुनाव हुए। इसमें दूसरी बार फिर मोहनलाल ने जीत हासिल की।
  • इसके बाद 2000 में भी मोहनलाल तीसरी बार यहां से सरपंच बने। 2005 में यह सीट महिला के लिए आरक्षित कर दी गई। इसमें मोहनलाल ने पत्नी शारदा मईडा को चुनाव मैदान में उतारा और वे जीतीं। फिर 2010 में भी शारदा मईडा ने जीत हासिल की।
  • 2015 में यह सीट पुरुष की हुई तो मोहनलाल फिर चुनाव मैदान में उतरे और चुनाव जीते। वहीं इस बार यह सीट महिला की हुई और उन्होंने अपनी पत्नी शारदा को तीसरी बार मैदान में उतारा और जीत हासिल की।

(न्यूज व फोटो : संजय बासेर)

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