बीकानेर

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एक कोच ऐसा: ग्रामीण युवाओं ने दिव्यांगता को नहीं बनने दिया कमजोरी, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलकूद में जीत रहे पदक

रवीन्द्र बिश्नोई के जन्म से ही एक हाथ, एक पैर नहीं है। उसका मुंह भी टेढ़ा है।

Danik Bhaskar

Jul 16, 2018, 06:23 PM IST

बीकानेर. रवीन्द्र बिश्नोई के जन्म से ही एक हाथ, एक पैर नहीं है। उसका मुंह भी टेढ़ा है। लेकिन इस दिव्यांगता को उसने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। कड़ी मेहनत के बल पर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हाई जम्प में रजत पदक जीता। इसी प्रकार दिव्यांग नेतराम ने वेट लिफ्टिंग की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया।

- बीकानेर से 60 किलोमीटर दूर कोलायत तहसील के एक खेल मैदान में इन युवाओं ने रामवतार सैन से प्रशिक्षण लेकर यह सफलता हासिल की है। अब इनका लक्ष्य गोल्ड मैडल है। रामवतार बैंक कर्मी हैं, लेकिन इन जैसे कई दिव्यांग बच्चे और युवाओं को पिछले काफी समय से विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। कोलायत में ही पंजाब नेशनल बैंक में हैड कैशियर पद पर कार्यरत सैन खुद नेशनल एथलीट रह चुके हैं। वर्ष 2016 से दिव्यांग बच्चों के हुनर को पहचान कर उन्हें खेलों का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया। दिव्यांग बच्चों के लिए सैन का समर्पण देखने लायक है। वे ऐसे बच्चों को खोजते हैं। उनमें आगे बढ़ने की उम्मीद जगाते हैं। बच्चों के परिजनों को भी मोटीवेट करते हैं। सैन की मेहनत सफल हो रही है। क्योंकि उनके खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में ताल ठोक रहे हैं।

दो वर्ष दो गोल्ड, तीन रजत और दो कांस्य पदक

प्रशिक्षण कैंप में नियमित रूप से अभ्यास करने वाले नौ दिव्यांग खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में पहली बार हिस्सा लेकर राज्य स्तर प्रतियोगिताओं में दो स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक तो वहीं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किए है। प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने वाले एक पैर से दिव्यांग लालाराम थालोड़ दोनों पैरों से दिव्यांग नेतराम शिक्षक पद पर नियुक्त है।

15 वर्ष तक प्रमोशन नहीं लेंगे सैन

दिव्यांग बच्चों और युवाओं के लिए जीवन समर्पित कर चुके रामवतार सैन ने 15 साल तक प्रमोशन नहीं लेने का फैसला किया है। उनका कहना है कि प्रमोशन लेने पर उन्हें बाहर जाना पड़ेगा। इससे दिव्यांग बच्चों का प्रशिक्षण ठप हो जाएगा। सैन के पास 70 बच्चे विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिनमें 10 दिव्यांग हैं। सैन ने वर्ष 2013 में खाजूवाला पोस्टिंग के दौरान भी खेलकूद के लिए प्रशिक्षण शिविर चलाया था। दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए रहने, खाने और खेल सामग्री की व्यवस्था सैन खुद करते हैं।

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