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बीकानेर: पानी और प्रवेश के लिए टंकी पर चढ़े ग्रामीण-छात्र

छात्रों और ग्रामीणों ने बुधवार को अलग-अलग स्थानों पर पानी की टंकी को विरोध का आधार बनाया।

Danik Bhaskar | Jul 19, 2018, 12:22 PM IST

बीकानेर. छात्रों और ग्रामीणों ने बुधवार को अलग-अलग स्थानों पर पानी की टंकी को विरोध का आधार बनाया। उदयरामसर में खराब ट्यूबवैल दुरुस्त करने की मांग करते हुए तीन ग्रामीण पानी की टंकी पर चढ़ गए। जिस वक्त उदयरामसर में ग्रामीण समझौते के बाद टंकी से नीचे उतर रहे थे ठीक उसी वक्त डूंगर कॉलेज में 4 छात्र कैंपस में बनी पानी की टंकी पर चढ़ गए।

डूंगर कॉलेज में ग्रामीण छात्रों को प्रवेश में पांच फीसदी आरक्षण की मांग

- छात्र संघ चुनाव आते ही कॉलेजों में चुनावी मुद्दे उठाए जाने लगे। बुधवार को एनएसयूआई के 4 पदाधिकारी कैंपस में बनी पानी की टंकी पर चढ़ गए। मांग है कि कॉलेज में प्रवेश के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को दिया जाए। इसके साथ ही छात्राओं को जो तीन प्रतिशत बोनस अंक दिए जाते हैं उसे बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया जाए। इस साल सीटें बढ़ाने और कॉलेज में हॉस्टल सुविधा बहाल शामिल है। डूंगर कॉलेज में अभी करीब 65 से 70 प्रतिशत छात्र ग्रामीण क्षेत्र के हैं। श्रीडूंगरगढ़, कोलायत, खाजूवाला, नोखा और लूणकरणसर में कॉलेज हैं। उसके बाद भी यहां अलग से आरक्षण की मांग रखी गई। टंकी पर चढ़े एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष रामनिवास कूकणा, हेतराम गोदारा, विनोद गोदारा और राजेश गोदारा का तर्क है कि कई जाने-माने विवि में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग से आरक्षण है। तीन घंटे बाद छात्र इस आश्वासन पर टंकी से उतरे कि कॉलेज प्रशासन उनकी सभी मांगों का प्रस्ताव सरकार को भेजेगा।

2 ट्यूबवेल सुधारने के लिए टंकी पर चढ़े, पानी शुरू होने के बाद ही उतरे

- पीएचईडी दफ्तर खुलने का जैसे ही वक्त हुआ उदयरामसर गांव के लोग गांव में ही बनी पानी की टंकी पर चढ़ गए। एईएन-जेईएन समेत तमाम अधिकारी घरों से ही सीधे उदयरामसर गांव पहुंचे। ग्रामीणों की शिकायत थी कि कई दिनों से दो ट्यूबवेल खराब हैं। इससे गांव में पानी की किल्लत बढ़ रही है। एक्सईएन विजय वर्मा जयपुर मीटिंग में होने के कारण देशनोक से जेईएन चुन्नीलाल दैया पुलिस जाप्ते के साथ गांव पहुंचे। ग्रामीणों से वादा किया कि शीघ्र ही दोनों ट्यूबवेल ठीक कर दिए जाएंगे। ग्रामीणों ने यहां सरकारी कर्मचारी तैनात करने की भी मांग की। अफसरों ने प्रस्ताव सरकार को भेजने का वादा किया। इस दौरान इंजीनियरों ने ट्यूबवेल में आई मामूली कमी भी सुधार दी। करीब 15 मिनट तक टंकी पर रहने के बाद सवा ग्यारह बजे ग्रामीण टंकी से उतरे। एक महीने पहले भी गांव में एक ट्यूबवैल के पानी को लेकर गांव में दो धड़े बन गए थे।