Hindi News »Rajasthan News »Bundi News» जिले के काश्तकारों पर 2 हजार करोड़ का कर्ज किसान बोले-ये राहत ऊंट के मुंह में जीरे जैसा

जिले के काश्तकारों पर 2 हजार करोड़ का कर्ज किसान बोले-ये राहत ऊंट के मुंह में जीरे जैसा

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:10 AM IST

बूंदी. किसान की झोली इस बजट में भी खाली। भास्कर न्यूज | बूंदी गोविंदपुर बावड़ी के कालूलाल हो या खेड़ला के युवा...
बूंदी. किसान की झोली इस बजट में भी खाली।

भास्कर न्यूज | बूंदी

गोविंदपुर बावड़ी के कालूलाल हो या खेड़ला के युवा किसान नंदबिहारी या फिर अकसाता के बुजुर्ग किसान रामचंद्र और मोटुका के धन्नालाल...जिंदगी कोल्हू के बैल जैसी हो गई।

दिन-रात खपते रहो, खेती से पेट भरने के अलावा पल्ले कुछ नहीं पड़ता। धन्नालाल और रामचंद्र की तो जमीन बिक चुकी, अब अल्फा नगर के बड़े किसानों के यहां 250 रुपए 24 घंटे में खेतों की रखवाली से परिवार पल रहा है। किसान रामचंद्र 75 की उम्र पार कर चुके हैं, धन्नालाल भी 70 पार के चुके, पर करें तो क्या? राम के बाद राज भी किसानों से रूठा हुआ है। केंद्रीय बजट में भी किसानों के लिए सूखा ही पल्ले पड़ा। किसानों की झोली इस बार भी खाली रही। उपज का पर्याप्त मूल्य और कर्ज माफी तो दूर, ऐसी कोई घोषणा बजट में नहीं, जिससे उन्हें सीधा फायदा मिले। इस साल ही जिले के किसानों ने बैंकों से करीब 2 हजार करोड़ का कर्ज लिया है। सूदखोरों से लिया कर्ज जोड़ दिया जाए तो यह तीन हजार करोड़ से ऊपर जाएगा। बीते मानसून में कम बरसात से जमीन में ज्यादा कुछ पैदा नहीं हुआ। जो हुआ उसकी पूरी कीमत नहीं मिली। समर्थन मूल्य पर खरीद केंद्र भी ज्यादा राहत नहीं दिला सके। ऐसे में कर्ज चुकाना आसान नहीं। एक मुश्त ऋण चुकाने पर राज्य सरकार चार फीसदी, केंद्र सरकार तीन फीसदी छूट देती है पर पैसा हो तो कर्ज चुकाएं। जिले में 2016-17 में सरकारी, निजी व कोऑपरेटिव बैंकों ने 1988.43 करोड़ रुपए का कृषि कर्ज बांटा। पर किसान किश्तें नहीं चुका पाए। इधर बैंक किसानों को कर्ज चुकाने के लिए नोटिस भेज रहे हैं। द बूंदी सेंट्रल कोऑपरेटिव के प्रबंधक सत्यवीर सिंह बताते हैं कि कोऑपरेटिव बैंक ने ही जिले में अपने 42 हजार 89 किसान सदस्यों को 290.43 करोड़ रुपए का वर्ष 2016-17 में कृषि कर्ज बांटा है। 6176 किसान सदस्यों का वर्तमान में अवधि पार कृषि ऋण 25.54 करोड़ रुपए बाकी है। वसूली के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

खेती पर लागत ही इतनी ज्यादा कि थोड़ी राहत से नहीं होगा भला

लाखेरी| माखीदा के पीपलदा थाग गांव में बजट पर चर्चा करते किसानों काे केंद्रीय बजट में किसानों की उत्पादन लागत से डेढ़ गुना समर्थन मूल्य का वादा जंचा नहीं। किसानों का कहना है कि खेती में लागत ही इतनी आ रही है कि डेढ़ गुना की बात कहीं टिकती नहीं। सरकारी कांटों पर तीन-तीन महिनों तक तुलाई नहीं हो रही। सरकारी अनुदान और बैंक कृषि ऋण को पाने में कितने चक्कर काटने पड़ते हैं।

केशवरायपाटन| बजट पर समदपुरिया के किसान रामगोपाल मीणा का कहना था किसानों की आय दोगुनी के लिए कर्ज की राशि बढ़ाई है। बीरज के किसान तोलाराम मीणा ने कहा फसल बीमा को लेकर कोई सरलीकरण नहीं किया। किसान यूनियन जिला संयोजक लक्ष्मीनारायण शृंगी ने कहा खरीफ की फसल में लागत से डेढ़ गुना समर्थन मूल्य की बात कही गई है, पर खरीफ की फसल तो किसान बेच चुका। रबी की कोई नीति नहीं है। गन्ना उत्पादक अंशधारी किसान समिति अध्यक्ष बद्रीलाल मीणा ने कहा किसान कर्जदार होता जा रहा है बजट में उनके लिए कुछ नहीं किया।

हिंडौली| डाबेटा गांव में किसान पप्पूलाल, मोतीलाल कहार, देवलाल व दयाराम गुर्जर, गोपाल गुर्जर का कहना था कि सरकार फसल बीमा योजना का सरलीकरण करती।

रैफरल अस्पताल बन गया है जिले का सबसे बड़ा अस्पताल: चिकित्सा सेवा से जुड़े लोगों के मुताबिक बजट में चिकित्सा सेवाएं बेहतर हो या सुदूर तक पहुंच सके, इस तरह की कोई उम्मीद नहीं दिख पाई। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल को बेशक ए-ग्रेड का दर्जा है, पर यह अस्पताल रैफर करनेवाले अस्पताल के नाम से मशहूर हो चुका है। ज्यादातर मरीज सीधे कोटा रैफर कर दिए जाते हैं। स्टाफ की भारी कमी है। स्क्रीन स्पेशलिस्ट नहीं होने से रोगियों को कोटा जाना पड़ता है। स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी है। रेडियोलोजिस्ट नहीं है।

खाद-बीज-बिजली और डीजल के भाव कम होंगे तब मिलेगी राहत

नैनवां| केंद्रीय बजट प्रस्तुत बजट किसानों के लिए कैसा रहा? खानपुरा में चाय की थड़ी पर बैठे किसान मोजीराम, सीताराम सैनी, बद्रीलाल, फोरूलाल, बाबूलाल पांचाल, श्रवणलाल, रामस्वरूप, रामप्रकाश, भैरू, शोकरण, मोहनलाल इसी पर चर्चा कर रहे थे। सभी का यही कहना था कि किसानों को असली राहत तब मिलेगी जब खाद, बीज, बिजली और डीजल के भाव कम होंगे, तभी लागत कम आएगी। अभी फसलों की लागत अधिक आ रही है। खेती अब फायदे का सौदा नहीं रहा। पैदावार की बाजार में कीमत नहीं मिलती। सरकार समर्थन मूल्य पर फसल खरीद करती है, लेकिन इसका लाभ महज कुछ प्रतिशत किसानों तक पहुंच पाता है। खरीद केंद्र शुरू करने और समय पर भुगतान की व्यवस्था जैसी बातें होती तभी किसानों को राहत मिलती

रायथल के किसान बद्रीलाल बताते हैं कि दो साल से मौसम की मार से वे टूट चुके हैं। खरीफ खराब हो गई बुआई खर्च भी नहीं निकली खाद बीज का खर्च भी नहीं निकला है घर चलना मुश्किल हो रहा है। इस बार रबी से भी ज्यादा उम्मीद नहीं है। धान की फसल पोची रह गई। ऐसे में बैंक की किश्त चुकाना मुश्किल हो गया। बजट में भी किसानों के लिए कर्ज माफी नहीं मिली। सरकार जिंसों के समर्थन मूल्यों में बढ़ती महंगाई के हिसाब से वृद्धि करे तभी किसानों का भला हो। कुलेड़ा के किसान घनश्याम बैरागी का कहना है पिछले साल धान की पैदावार 6-7 क्विंटल थी, इस बार तीन से साढ़े तीन क्विंटल ही रह गई। ऐसे में कर्ज, बिजली बिल कहां से चुकाऊं। बैंक व बिजली वाले तकाजा कर रहे हैं।

महिला किसान बोली-बढ़ता ही गया कर्ज

नमाना रोड| ठीकरिया चारणान की विधवा महिला किसान घीसीबाई मेघवाल के पति की वर्ष 2003 में मौत हो चुकी है, उसके किसान पति के निधन के वक्त काफी ज्यादा कर्ज था, ब्याज नहीं चुका पाने पर कर्ज बढ़ता ही गया। जमीन तक गिरवी रखनी पड़ी। उसके बाद भी अभी तक पांच लाख रुपए का कर्ज है। उसके दोनों बच्चे हाळी का काम करते हैं। पर इससे इतना ही कमा पाते हैं कि दो वक्त की रोटी मिल जाए। वह बजट के बारे में तो नहीं जानती पर इतना जरूर कहती है कि सरकार उन जैसे परिवारों की भी सोचे। आम बजट पर बरखेड़ा के किसान लखविंदरसिंह का कहना था कि बजट में समर्थन मूल्य पर कोई बात नहीं, मंडी में समर्थन मूल्य से काफी कम भाव में उपज खरीदनी है। जो किसान की सबसे बड़ी पीड़ा है। काेथ्या गांव के किसान गबूरलाल नागर, रामभरोस मीणा, दशरथ नागर, कन्हैयालाल नागर, संपत बैरागी ने बताया कि किसानों को पर्याप्त बिजली, पानी नहीं मिलता। उसके बावजूद बिना मीटर में रीडिंग देखे ही बिल में अधिक राशि भेजते हैं। किसानों को थ्रीफेस बिजली कनेक्शन के लिए 8 से 10 साल लग जाते हैं।

नैनवां। खानपुरा गांव में किसानों से बजट पर चर्चा करते।

रेल यात्रियों ने कहा-उम्मीदें बूंदी से नॉन स्टाप गुजर गईं

चित्तौड़-कोटा के लिए दिन में गाड़ी नहीं है, अगर गाड़ी चले तो कोटा से मुंबई, भोपाल, दिल्ली आदि जाने के लिए लोगों को कनेक्शन मिल जाता। तड़के 3.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक कोई गाड़ी बूंदी से नहीं है। कोटा से सवेरे 9.15 बजे लिंक एक्सप्रेस जाने के बाद रात 11.20 बजे से पहले कोई गाड़ी नहीं है। रिजर्वेशन विंडो दोपहर 2 बजे की बजाए रात 8 बजे तक खोली जानी चाहिए थी। टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पैलेस ऑन व्हील्स का स्टॉपेज बूंदी रेलवे स्टेशन पर नहीं किया गया एक समस्या यह भी है कि बूंदी में रिजर्वेशन विंडो पर रविवार को टिकट नहीं बनते।

व्यापारी:- मंडी व्यापारी केके पोद्दार का कहना है कि नोटबंदी-जीएसटी लागू होने के बाद से ही मध्यम वर्गीय व्यापारी मंदी की चपेट में है। ऐसे व्यापारियों को बजट से काफी उम्मीद थी। मध्यमवर्गीय व्यापारियों को इस बजट से कोई राहत नहीं मिली है और ना ट्रैक्स स्लैब ही बढ़ी। व्यापारियों के लिहाज से बजट निराशाजनक ही रहा है।

कर्मचारी :- राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम पारीक बताते हैं कि सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया बजट किसान व कर्मचारी विरोधी है। उनके लिए कोई घोषणा सरकार ने नहीं की। यह बजट धन्ना सेठों के लिए फायदेमंद है। बजट में गरीब किसान को भला किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

मध्यमवर्ग :- समाजसेवी केसी वर्मा के अनुसार ट्रेनों के मामले में भी बजट में कोई विशेष घोषणा नहीं हुई है। मध्यम वर्गीय लोगों के लिए कोई राहत नहीं मिली है। बजट में अलग से कुछ भी नहीं है। आमजन को सरकार से काफी उम्मीद थी, लेकिन बजट में निराशा ही हाथ लगी है।

आयकर दाता :- कर सलाहकार नरेश पाटौदी ने बताया कि टैक्स स्लैब कोई बदलाव नहीं किया गया है। सेविंग पोइंट व्यू से एफडीआर के लिए अच्छा है। ब्याज दर कम होने से बैंक में एफडी की संख्या कम होती जा रही है। अब उसमें इजाफा होगा। वेतनभोगी कर्मचारियों को 40 हजार रुपए का अलग से डिडक्शन दिया गया है।

विपक्ष:- पूर्व वित्त राज्य मंत्री हरिमोहन शर्मा ने बताया कि वर्ष-2022 तय की है, सरकार अलग-अलग किस्म की फसलें कैसे खरीदेंगी, कम मूल्य पर ही नहीं खरीद पा रही। बजट में रोजगार का भी प्रावधान नहीं, पेट्रोल-डीजल की बेतहाशा कीमतें बढ़ी, पर एक्साइज ड्यूटी कम नहीं की। मोबाइल, लेपटॉप अब जरूरत बन गए हैं, उन पर ही एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी। हाईवे पर नया सेश भी लगा दिया। इनकम टैक्स स्लैब बढ़ाने की समर्थक बीजेपी ने आज के बजट में भी उसे यथावत रखा है। 10 करोड़ परिवारों को पांच-पांच लाख का बीमा भी अल्प अवधि में असंभव है।

केवल भाजपाइयों ने ही कहा-बजट काफी अच्छा

भाजपा जिलाध्यक्ष महिपतसिंह हाड़ा, महामंत्री शक्तिसिंह आसावत, ने कहा कि आम बजट देश के विकास की राह को आगे बढ़ानेवाला है। जो भारत के नवनिर्माण के सपने को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगा। बिजली कनेक्शन, किसानों की आय दोगुना करने के लिए कृषि क्षेत्र में बड़े एलान सराहनीय हैं। वहीं, एसटी मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष आशा मीणा, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ललिता नुवाल, जिला महामंत्री अर्चना कंवर हाड़ा व भारती शर्मा, पंस सदस्य मधुबाला साहू ने बजट को महिलाओं को आत्मनिर्भर बनानेवाला, आर्थिक सुधारों व बुनियादी जरूरतें पूरा करने वाला बताया।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Bundi News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: जिले के काश्तकारों पर 2 हजार करोड़ का कर्ज किसान बोले-ये राहत ऊंट के मुंह में जीरे जैसा
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Stories You May be Interested in

      More From Bundi

        Trending

        Live Hindi News

        0
        ×