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अभयपुरा बांध की चार फुट ऊंचाई बढ़ेगी, नहरें होंगी पक्की, आठ हजार बीघा जमीन में सिंचाई

जिले के अभयपुरा व बरधा बांध की नहरों के रिनोवेशन का काम शुरू हो गया है। आरडब्ल्यूएसएलआईपी योजना के तहत जापान से...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:30 AM IST
जिले के अभयपुरा व बरधा बांध की नहरों के रिनोवेशन का काम शुरू हो गया है। आरडब्ल्यूएसएलआईपी योजना के तहत जापान से मिले पैकेज में दोनों बांधों का काम करवाया जा रहा है।

खास बात यह है कि नहरों के रिनोवेशन के साथ-साथ अभयपुरा बांध का अलग से काम होगा। इसमें बांध की ऊंचाई चार फुट बढ़ाई जाएगी। स्वीकृति जारी होने के साथ ही दोनों जगह पर काम के लिए 24 करोड़ 50 लाख रुपए का वर्कआर्डर जारी कर दिया गया। अभयपुरा व बरधा बांध काफी पुराने हैं। दोनों से हजारों बीघा भूमि सिंचित होती है, लेकिन नहरों की दशा खराब होने के कारण पानी की बर्बादी होती है। ऐसे में नहरों के सुदृढ़ीकरण के बाद दोनों बांध से सिंचाई के लिए दिए जाने वाले पानी का किसान पूरा उपयोग कर सकेंगे। अभयपुरा बांध का काम बरसात से पहले पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि नहरों का काम चलता रहेगा।

अभयपुरा व बरधा बांध दोनों का 50-50 किमी लंबा सिस्टम है। दोनों से राइट व लेफ्ट केनाल निकली हुई है। इनमें कई जगहों पर नहरें कच्ची है, जिनसे पानी छोड़ने के दौरान टूटने का अंदेशा बना रहता है। वहीं पानी भी व्यर्थ बहता है। अभयपुरा बांध की ऊंचाई बढ़ाने के अलावा पानी का वेस्ट वेयर भी 20 मीटर बढ़ाया जाएगा। वर्तमान वेस्ट वेयर 182 मीटर है। बांधों से 8 हजार बीघा से अधिक जमीन सिंचित होती है।

24 करोड़ 50 लाख रुपए का वर्क आर्डर जारी, शुरू हुआ काम

बूंदी. अभयपुरा बांध का चल रहा रिनोवेशन का काम।

पिछले वर्ष अभयपुरा बांध से शुरू हो गया था लीकेज

गत वर्ष अभयपुरा बांध की राइट केनाल के गेट के यहां से लीकेज शुरू होने के साथ ही हड़कंप मच गया था। हालांकि उसके बाद इसको दुरुस्त करवा दिया गया। लीकेज के चलते बांध व नहरों के रिनोवेशन का काम जरूरी हो गया था। भीमलत व अभयपुरा बांध दोनों एक दूसरे से कनेक्ट है। ऊपर भीमलत बांध है और उसके नीचे अभयपुरा बांध स्थित है। यानि ऊपर वाले बांध का पानी नीचे वाले बांध में आता है।

अभयपुरा बांध का होगा रिनोवेशन


वेट लेंड के लिहाज से दोनों बांध काफी महत्वपूर्ण

अभयपुरा व बरधा बांध पक्षियों के प्रवास की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यहां हर साल बड़ी संख्या में विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं। स्थानीय व विदेशी सैलानी भी यहां आते हैं। ऐसे में दोनों बांध पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बरधा बांध को हाड़ौती का गोवा भी कहा जाता है।

पक्षियों के प्राकृतिक आवासों का रखे विशेष ध्यान

अभयपुरा बांध के सुदृढ़ीकरण के लिए की जा रही मिट्टी की खुदाई को पक्षियों के आवास के अनुकूल रखने की मांग को लेकर पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक व पक्षी विशेषज्ञ पृथ्वीसिंह राजावत ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया है। इसमें लिखा कि भीमलत-अभयपुरा इको टूरिज्म के तहत चल रहे सौंदर्यीकरण में अभयपुरा बांध को वेट-लेंड के रूप में विकसित किया जा सकता है। जल संसाधन विभाग बांध की कच्ची दीवार के सुदृढ़ीकरण का कार्य करवा रहा है। ऐसे में मिट्टी खुदाई में इस बात का ध्यान रखने की आवश्यकता है कि पक्षियों के प्राकृतिक आवास व घोंसले सुरक्षित रहे। यहां तक कि मिट्टी खुदाई के दौरान नए टापू निर्माण किए जा सकते हैं, जिससे वेट-लेंड पर पक्षियों को नए प्राकृतिक आवास उपलब्ध हो सकेंगे।