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फाइलों में दफन 15 सालों में हुई गुमनाम मौतों के राज

कुछ लोगों की मौतें आज भी कई सवाल खड़े करती हैं। उनकी पहचान, जाति और रिश्तेदारी जैसे कई सवाल हैं जो अब एक पहेली बन गए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:35 AM IST

कुछ लोगों की मौतें आज भी कई सवाल खड़े करती हैं। उनकी पहचान, जाति और रिश्तेदारी जैसे कई सवाल हैं जो अब एक पहेली बन गए हैं। जिंदा रहते भले उन्हें पहचान मिली हो, मगर मौत के बाद कोई नहीं पहचान सका। ऐसे एक-दो नहीं बल्कि प्रदेश में 9 हजार से अधिक मामले हैं, जो कि जांच के अभाव में अब तक अनट्रेस हैं। इन शवों के अंतिम संस्कार कर पुलिस ने जांच के लिए विसरा और अन्य वस्तुएं तो रख ली, लेकिन उनके आधार पर लोगों की शिनाख्त तक नहीं हो पाई।प्रदेश में पिछले 20 वर्षों में 9271 व्यक्तियों की बॉडी मिली लेकिन आज तक उनकी न तो शिनाख्त हुई, ना ही पता चला कि उन्हें किसने मारा, क्यों मारा और वह कहां का है। उसकी तलाश में कोशिशें भी खूब होती हैं लेकिन जब पुलिस को परिवार का पता नहीं चलता तो अंत में थक-हारकर पुलिस उसे अज्ञात मानते हुए उसका अंतिम संस्कार करवा देती हैं। राजस्थान पुलिस की वेबसाइट के रिकॉर्ड के अनुसार पिछले 15 वर्षों में देश भर में 69 हजार 320 बॉडी ऐसी मिली, जिनकी शिनाख्त नहीं हो सकी। ऐसे में पुलिस को अपने स्तर पर उनका अंतिम संस्कार करवाना पड़ा। राज्य भर में अजमेर जीआरपी को सबसे ज्यादा अज्ञात शव (1917) मिले। दूसरी ओर प्रतापगढ़ में सबसे कम सात अज्ञात शव मिले। जिनकी आज तक शिनाख्त नहीं हो सकी।

लचर पुलिसिंग

हर साल बढ़ रही पैंडेंसी, सबसे ज्यादा पाटन थाना क्षेत्र में मिले अज्ञात शव

अब तक 105 शवों की नहीं हो पाई शिनाख्त

बूंदी जिले में 105 शव मिले, जिनकी शिनाख्त लाख प्रयास के बाद भी नहीं की जा सकी। जवाबदेह महकमे की कछुआ चाल हर साल पेंडेंसी को बढ़ा रही है। कोटा रेंज में गत 15 वर्षों में 855 लोग ऐसे थे, जिनका अपने परिजनों के हाथों अंतिम संस्कार नहीं हो पाया।

पुलिस वेबसाइट पर कई के फोटो ही नहीं हैं

जिन शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी उनका ब्यौरा व फोटो राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड है। इनमें से कइयों के फोटो तो पुलिस वेबसाइट पर अपलोड तक नहीं हैं। इसके चलते अगर इन मृतकों के परिजन उन्हें ढूंढना भी चाहें तो अब संभव नहीं है। आज भी इन लावारिस शवों के अवशेष यूं ही थाने के रिकॉर्ड में अपनों का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस वेबसाइट पर फोटो नहीं होने का मुख्य कारण कई बार शव काफी दिन बाद मिलते हैं, जिससे उनका चेहरा बिगड़ा हुआ रहता है। तो कई बार जंगल में शव पड़ा रहने से जानवरों द्वारा नोंच लिए जाने के कारण उनका चेहरा बिगड़ जाता है। ऐसे में उनके फोटो नहीं ले पाते जिससे शिनाख्त को लेकर परेशानी होती है।

जिन शवों की शिनाख्त नहीं होती है, उनके अंतिम संस्कार के बाद अवशेष के आधार पर शिनाख्त होती है। जिपनेट भी एक तरीका है, इसके आधार पर अन्य राज्यों की पुलिस हमारे यहां जांच के लिए आती है। लम्बे समय तक जब अवशेष पड़े रहते हैं तो मजिस्ट्रेट के आदेश पर उनका निस्तारण किया जाता है। -योगेश यादव, एसपी, बूंदी

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