किसानों की पीड़ा

4 वर्ष पहले
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बूंदी| फसलों के लिए नहर के पानी की मांग कर रहे टेल क्षेत्र के किसानों का आंदोलन जारी है।

छापड़दा गांव में कई दिनों से क्रमिक अनशन के साथ धरना दिए बैठे किसान नित नया टोटका आजमा कर प्रशासन और सरकार का ध्यान अपनी मांग की ओर खींचने के जतन कर रहे हैं। धरने के अलावा वे कभी मुर्गा बन रहे हैं तो कभी सिर मुंडवा रहे हैं, कभी चारा खाकर तो कभी भैंस के आगे बीन बजाकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस कड़ी में रविवार को किसानों ने पेड़ों पर उलटे लटककर प्रदर्शन किया। रविवार को छापड़दा में गणेश मंदिर परिसर स्थित धरनास्थल पर किसानों की पहले बैठक हुई और कई दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद नहरी पानी की मांग पर गौर नहीं करने पर सीएडी अधिकारियों और जिला प्रशासन के खिलाफ रोष जताया। बाद में बाबूलाल कहार, हजारीलाल माली, बंटी कहार, बाबूलाल, मनोजकुमार शर्मा सहित कई किसानों ने पेड़ों पर उलटा लटक कर प्रदर्शन किया। वहीं क्रमिक अनशन पर लालचंद डोई ख्यावदा, महावीर कहार, पप्पूलाल माली, महावीर माली, मुकेश माली, मांगीलाल कहार, बाबूलाल कहार, रघुवीर माली, भूरीबाई, हजारीबाई कहार छापरदा, मौसमीबाई हणुत्या, नंदकंवरीबाई, देवराज माली छापड़दा, मोतीला मीणा हनोतिया, महेंद्र रैबारी ख्यावदा, महावीर, राजेंद्र कहार, रामदयाल माली, शिवराज माली छापड़दा आदि किसान बैठे।

आज किसानों का फावड़े लेकर बूंदी कूच, करेंगे अर्द्धनग्न प्रदर्शन
सोमवार को अब किसान जिला मुख्यालय की ओर कूच करेंगे तथा कलेक्ट्रेट पर फावड़े लेकर अर्द्धनग्न प्रदर्शन करेंगे। फिर भी प्रशासन ने उनकी पीड़ा नहीं सुनी तो बेमियादी धरना देकर बैठ जाएंगे। साथ ही उन्होंने चेताया है कि फिर भी अगर प्रशासन ने नहीं सुनी तो आंदोलन उग्र हो जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सीएडी अधिकारियों की होगी।

क्रमिक अनशन के तीसरे दिन यूं जताया विरोध
नहरी पानी के लिए पेड़ों पर उलटे लटके किसान
बूंदी. छापड़दा गांव में नहरी पानी की मांग को लेकर पेड़ों पर उल्टे लटके किसान।

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