Hindi News »Rajasthan »Bundi» कज्जात की जिम्मेदारी मौलाना गुलामे गौस को, कमान अब्दुल शकूर कादरी के पास

कज्जात की जिम्मेदारी मौलाना गुलामे गौस को, कमान अब्दुल शकूर कादरी के पास

अब्दुल शकूर कादरी ने अब कज्जात से संबंधित सारे काम शहरकाजी के तौर पर अपने नायब मौलाना गुलामे गौस को सौंप दिए हैं।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:10 AM IST

कज्जात की जिम्मेदारी मौलाना गुलामे गौस को, कमान अब्दुल शकूर कादरी के पास
अब्दुल शकूर कादरी ने अब कज्जात से संबंधित सारे काम शहरकाजी के तौर पर अपने नायब मौलाना गुलामे गौस को सौंप दिए हैं। गौस अब शहरकाजी कहलाएंगे। शहर के कुंभा स्टेडियम में गरीब नवाज मीरा चहल्तन वेलफेयर सोसायटी के वैवाहिक सम्मेलन के मंच में जब बतौर शहरकाजी रविवार को अब्दुल शकूर कादरी ने यह घोषणा की तो मुस्लिम समाज में हलचल मच गई।

हिंदू समाज में भी इसकी चर्चा होने लगी। क्योंकि अब्दुल शकूर कादरी राज. काजी काॅन्सिल के संरक्षक (सरपरस्त) भी हैं, ऐसे में उनकी घोषणा प्रदेश के मुस्लिम समाज के लिए भी खास मायने रखती है। मंच से बताया गया कि यह दुनियां (कायनात) में पहला मसला है, कि किसी काजी ने काजी रहते खुद अपनी कज्जात किसी ओर को सौंप दी। यह भी कहा गया कि काजीवाद यहीं खत्म करें। सब एक हो जाएं। कादरी के मुताबिक वे तीन साल से कज्जात सौंपने को लेकर मंथन कर रहे थे।

कज्जात की जिम्मेदारी सौंपने के बाद अब वे गैरों-गरीबों, कौम, कौमी एकता, शहर और शांति के लिए बिना दबाव काम कर सकेंगे, फैसले ले सकेंगे। अब उन पर कोई फतवा जारी नहीं होगा। कादरी ने साथ ही यह भी कहा कि जिस दिन उन्हें लगा कि चीजें सही नहीं हो रही, या जरूरी हुआ तो जिम्मेदारी वापस भी ले लेंगे। कादरी ने उन लोगों, खासकर मौलाना असलम और मेहमूद अली का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि बूंदी जब संकट में था, उस घड़ी में अमन के लिए गए उनके फैसले के साथ ये लोग अडिग खड़े रहे। कादरी ने मंच पर मौलाना गुलामे गौस की दस्तारबंदी की।

बूंदी. अब्दुल शकूर कादरी मौलाना गुलामे गौस की दस्तारबंदी करते हुए।

कौन हैं काजी मौलाना गुलामे गौस

शहर के ब्रह्मपुरी के रहने वाले नए शहरकाजी मौलाना गुलामे गौस नायब काजी रहे हैं। आठ साल से शहर काजी अब्दुल शकूर कादरी के नायब हैं। उनकी जिम्मेदारी निकाह पढ़ाना रही है। टेलरिंग करते हैं और पहलवान भी हैं। उनके वालिद भी नायब काजी रहे। गौस हिलाल कमेटी के भी सदस्य हैं।

चमन कादरी का नाम ही काफी था

सूफी संत अब्दुल शकूर कादरी के वालिद पीरजादा मौलाना चमन कादरी थे। चमन कादरी का नाम ही काफी था। उनके रहते कभी बूंदी पर आंच नहीं आई। पेचीदा से पेचीदा मसले और हालात को उन्होंने अपने स्तर पर संभाल लिया। मुस्लिम-हिंदू समुदायों में उनकी पैठ थी, उनकी बात कोई टाल नहीं पाता था।

कोई भी अहम फैसला मेरी मर्जी के बिना नहीं होगा: कादरी

अब्दुल शकूर कादरी की इस घोषणा को शहरकाजी पद से इस्तीफे के रूप में देखा गया। मुस्लिम समाज में इस की मिश्रित प्रतिक्रिया हुई। किसी ने सही कदम करार दिया तो किसी का कहना था कि फैसला मुस्लिम अवाम पर छोड़ देना चाहिए था। जवाब में कादरी ने स्पष्ट किया कि उनकी घोषणा या जो कुछ उन्होंने मंच से कहा है उसका कुछ लोग गलत मायना निकाल रहे हैं। मैंने कज्जात से इस्तीफा नहीं दिया है। काम की अधिकता की वजह से मैंने अपने नायब मौलाना गुलामे गौस को कज्जात से संबंधित कार्य करने के लिए वक्ती तौर पर मुकर्रर किया है। कोई भी अहम फैसला मेरी मर्जी के बिना नहीं होगा। ये कज्जात उनकी अपनी है, जिसे चाहें, उसे दें। गौस काबिल शख्स हैं, जब उन्हें लगेगा, तो कज्जात वापस ले लेंगे।

क्या होती है कज्जात

कज्जात में निकाह, तलाक, चांद से संबंधित फैसले, शब्बेबारात, ईद-बकरीद की नमाज अदा कराना जैसे काम शामिल हैं। जो अब कादरी ने गौस को सौंप दिए हैं। किसी मसले पर अंतिम फैसला कादरी का ही होगा।

काजी साहब का शुक्रिया, जिन्होंने मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उनसे सलाह-मशविरा लेकर काम करूंगा। मौलाना गुलामे गौस, शहरकाजी बूंदी

Get the latest IPL 2018 News, check IPL 2018 Schedule, IPL Live Score & IPL Points Table. Like us on Facebook or follow us on Twitter for more IPL updates.
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Bundi News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: कज्जात की जिम्मेदारी मौलाना गुलामे गौस को, कमान अब्दुल शकूर कादरी के पास
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Bundi

    Trending

    Live Hindi News

    0
    ×