इस स्टेट के 29 गांवों के लोग कोर्ट या थाने नहीं जाते, 5 साल से दर्ज नहीं हुआ कोई भी केस, भगवान के बताए मार्ग पर चल रहे इन गांवों के लोग

राजस्थान न्यूज:पीना या बेचना तो दूर, कोई छूता तक नहीं

Bhaskar News

Apr 17, 2019, 02:06 PM IST
Bundi Rajasthan News in Hindi Positive story 29 villege is no police case for last five years

बूंदी (राजस्थान). जिले के 29 गांव ऐसे हैं, जहां के लोग अहिंसा परमो धर्म: को आत्मसात किए हुए हैं। वर्ष 2014 से इन गांवों में मारपीट, लड़ाई-झगड़े का कोई पुलिस केस सामने नहीं आया, कोई कोर्ट-कचहरी नहीं गया। इन गांवों में लोग चौपाल पर बैठकर ही मतभेद निबटा लेते हैं। डाबी थाने के पांच, तालेड़ा का एक, गेंडोली के आठ, इंद्रगढ़ के दो, कापरेन का एक, देईखेड़ा के तीन, लाखेरी के तीन, नमाना का एक और करवर के पांच गांव हैं, जिनमें 5 साल से कोई पुलिस केस सामने नहीं आया।

इन गांवों का धर्म अहिंसा


डाबी थाने के श्योपुरिया, रतनपुरिया, जलोदी, डबूसगढ़, गोरधनपुरा। तालेड़ा का मोटूका। गेंडोली थाने के बीरमपुरा, बुगली, केसरपुरा, भाटों का खेड़ा, हरजीपुरा, गुढ़ा-मगदूद, भैंसखेड़ा और छापड़ा। इंद्रगढ़ थाने के फदकपुरिया और खानपुरिया। कापरेन का देवली गांव। देईखेड़ा के गांव जालेड़ा, खेड़िया मान और ठीकरिया। लाखेरी के सखावदा, सहणपुर और बिशनपुरा। नमाना का गांव व्यास बावड़ी। करवर थाने के केमला, कोटड़ी, बनथली, नयागांव, सूसा और बांसी।

400 की आबादी वाला गांव पूरी तरह तंबाकू मुक्त, पीना या बेचना तो दूर, कोई छूता तक नहीं


जजावर का माताजी का झौपड़ा गांव सदियों से भगवान महावीर के बताए रास्ते पर चल रहा है। यहां के लोग सदियों से हुक्का, बीड़ी-सिगरेट, तंबाकू, गुटखा खाना या बेचना तो दूर, छूना भी देवीय श्राप समझते हैं। गांव की आबादी करीब 400 है, कोई तंबाकू सेवन नहीं करता। मेहमान भी गांव में आए तो भी अपनी तरफ से हुक्के, बीड़ी-सिगरेट की मनुहार नहीं करते। यह गांव माताजी मंदिर के पुजारी भोपा परिवारों का है। गांववाले मानते हैं कि तंबाकू के किसी भी रूप में सेवन पर देवीय श्राप मिलता है। भोपा देवीलाल, माधोलाल, पूर्व सरपंच धन्नीबाई, किशनलाल बताते हैं कि किसी ने गलती से भी तंबाकू सेवन कर लिया या हाथ भी लगा लिया तो देवी झाटोल उसे शारीरिक कष्ट देती है।

चिकित्सा विभाग का भी कैंपेन


स्वास्थ्य विभाग भी जिले को तंबाकू मुक्त करने का कैंपेन चलाए हुए हैं। अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और स्कूल कैम्पस धूम्रपान मुक्त घोषित किए गए हैं, वहीं गांव-कस्बों में भी धूम्रपान मुक्ति के लिए नुक्कड़ नाटकों, कठपुतली के खेल के जरिए नशे के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। अब जिलास्तरीय टीम भी गठित की गई है, जिसका जिम्मा स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों, अस्पतालों के आसपास धू्म्रपान बिक्री रोकना है। कोटपा कानून में इन जगहों से 100 गज के दायरे में तंबाकू पीने, बेचने और रखने पर प्रतिबंधित किया गया है। ऐसा करने के लिए सजा-जुर्माने का प्रावधान है। स्कूलों, अस्पतालों, आंगनबाड़ी केंद्राें में और कैंपस से बाहर भी धूम्रपान निषेध के बोर्ड लगाने जरूरी कर दिए गए हैं।

अपराध मुक्त होने की यह है वजह


कई गांवों में चौपाल पर बैठकर मसले सुलझाने की परंपरा आज भी कायम है। लोगों का मानना है कि अपने स्तर पर विवाद सुलझा लेने से काेर्ट-कचहरी में वक्त और पैसा बर्बाद नहीं होता, सबसे बड़ी बात भाईचारा बना रहता है। कुछ गांव ऐसे भी हैं, जहां की आबादी काफी कम है। जिले के चुने गए आदर्श गांवों में लड़ाई-झगड़े, विवाद होने पर पुलिस खुद वहां जाती और चौपाल पर सभी पक्षों को बिठाकर वार्ता के जरिए राजीनामा कराकर मसला सुलझा देती थी, पर अब ये सिस्टम बंद हो चुका है।

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