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चार करोड़ रुपए के एनीकट के वजूद को खतरा, भराव क्षमता प्रभावित, नहीं लगे स्लु गेट

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:56 AM IST

Bundi News - नयागांव की मेज नदी पर चार करोड़ रुपयों की लागत से बने एनीकट के वजूद को खतरा होने लगा है। विभागीय उदासीनता के चलते इस...

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नयागांव की मेज नदी पर चार करोड़ रुपयों की लागत से बने एनीकट के वजूद को खतरा होने लगा है। विभागीय उदासीनता के चलते इस पर 5 वर्षो से स्लु गेट नहीं लग पाए है। जिसके चलते एनीकट की अप स्ट्रीम में पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी व मलबा जमा हो रहा है।

इससे एनीकट की भराव क्षमता प्रभावित हो रही है, वहीं भविष्य में इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो एनीकट की उपयोगिता खत्म होने की आशंका है। शहर की पेयजल समस्या को लेकर सरकार ने मेज नदी पर लगभग चार करोड़ रुपए में एनीकट बनवाया था। निर्माण के साथ ही पानी की निकासी के लिए स्लु गेट लगने थे, लेकिन विभाग की लापरवाही के चलते यह काम नहीं हो पाया है। यही हालात रहे तो आने वाले समय में इस एनीकट की भराव क्षमता आधी से काफी कम रह जाएगी।

भास्कर न्यूज | लाखेरी

नयागांव की मेज नदी पर चार करोड़ रुपयों की लागत से बने एनीकट के वजूद को खतरा होने लगा है। विभागीय उदासीनता के चलते इस पर 5 वर्षो से स्लु गेट नहीं लग पाए है। जिसके चलते एनीकट की अप स्ट्रीम में पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी व मलबा जमा हो रहा है।

इससे एनीकट की भराव क्षमता प्रभावित हो रही है, वहीं भविष्य में इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो एनीकट की उपयोगिता खत्म होने की आशंका है। शहर की पेयजल समस्या को लेकर सरकार ने मेज नदी पर लगभग चार करोड़ रुपए में एनीकट बनवाया था। निर्माण के साथ ही पानी की निकासी के लिए स्लु गेट लगने थे, लेकिन विभाग की लापरवाही के चलते यह काम नहीं हो पाया है। यही हालात रहे तो आने वाले समय में इस एनीकट की भराव क्षमता आधी से काफी कम रह जाएगी।

लंबाई 7 मीटर, ऊंचाई डेढ़ मीटर है: लाखेरी की पेयजल समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने 8 वर्ष पहले मेज नदी पर एनीकट की स्वीकृति जारी की थी। इस एनीकट की लंबाई 7 मीटर-ऊंचाई डेढ़ मीटर है। एनीकट में 64 एमसीएफटी पानी की भराव क्षमता मानी है। एनीकट बनने से इसमें 22 किमी लंबाई में पानी का ठहराव होने की बात कही जाती है। एनीकट से लाखेरी शहर को रोजाना 3240 किमी पानी की आपूर्ति हो रही है।

मेज नदी एनीकट पर पानी की निकासी व ठहराव को नियंत्रित करने के लिए मंदिर की तरफ मैनवल स्लो मोशन स्लु गेट लगाए जाने थे। जिससे जब जरूरत हो, गेट को आसानी से ऊंचा करके पानी की निकासी की जा तथा रोका जा सके। इसके लिए एनीकट निर्माण के दौरान अलग से कार्यादेश देकर कोटा की एक एजेंसी को इस काम दिया गया था, लेकिन यह एजेंसी ने काम शुरू होने के बाद थोड़े दिनों बाद ही काम बंद कर दिया। जिसके चलते स्लु गेट नहीं लग पाए है। इसका खामियाजा यह हुआ कि गेट नहीं लगने से न तो पानी की निकासी व ठहराव सिस्टम से नहीं हो पा रहा है। यह काम जलसंसाधन विभाग को करवाना था। अभी भी बरसात के पहले कराया जा सकता है।

गेट में फंसी पड़ी है लोहे की चद्दरें: एनीकट निर्माण से पहले नदी का पानी रोकने के लिए जलदाय विभाग लोहे की प्लेट लगाकर पानी का ठहराव करता था। जब पानी की निकासी करनी होती थी, तब इन प्लेट को हटा देते थे। जब नदी पर एनीकट का निर्माण के दौरान गेट लगाने की प्रक्रिया शुरू हाेने के दौरान एक मजदूर की डूबने से मौत हो गई थी, तभी से गेट लगाने का काम बंद पड़ा है। गेट में 5 साल से लोहे की प्लेट फंसी पड़ी है। जलदाय विभाग समय-समय पर गेट लगाने के लिए संबंधित विभाग पत्र द्वारा सूचित करता रहता है।

मेज नदी एनीकट पर पानी की निकासी व ठहराव को नियंत्रित करने के लिए मंदिर की तरफ मैनवल स्लो मोशन स्लु गेट लगाए जाने थे। जिससे जब जरूरत हो, गेट को आसानी से ऊंचा करके पानी की निकासी की जा तथा रोका जा सके। इसके लिए एनीकट निर्माण के दौरान अलग से कार्यादेश देकर कोटा की एक एजेंसी को इस काम दिया गया था, लेकिन यह एजेंसी ने काम शुरू होने के बाद थोड़े दिनों बाद ही काम बंद कर दिया। जिसके चलते स्लु गेट नहीं लग पाए है। इसका खामियाजा यह हुआ कि गेट नहीं लगने से न तो पानी की निकासी व ठहराव सिस्टम से नहीं हो पा रहा है। यह काम जलसंसाधन विभाग को करवाना था। अभी भी बरसात के पहले कराया जा सकता है।

गेट में फंसी पड़ी है लोहे की चद्दरें: एनीकट निर्माण से पहले नदी का पानी रोकने के लिए जलदाय विभाग लोहे की प्लेट लगाकर पानी का ठहराव करता था। जब पानी की निकासी करनी होती थी, तब इन प्लेट को हटा देते थे। जब नदी पर एनीकट का निर्माण के दौरान गेट लगाने की प्रक्रिया शुरू हाेने के दौरान एक मजदूर की डूबने से मौत हो गई थी, तभी से गेट लगाने का काम बंद पड़ा है। गेट में 5 साल से लोहे की प्लेट फंसी पड़ी है। जलदाय विभाग समय-समय पर गेट लगाने के लिए संबंधित विभाग पत्र द्वारा सूचित करता रहता है।

स्लो मोशन के स्लु गेट लगने थे

स्लो मोशन के स्लु गेट लगने थे

कम होने लगी अप स्ट्रीम की भराव क्षमता पानी की निकासी नहीं होने से एनीकट के अप स्ट्रीम की भराव क्षमता कम हो रही है। अप स्ट्रीम की तरफ एनीकट की गहराई महज चार फीट रह गई है। पहले यह गहराई दोनों छोर पर दस फीट थी। दरअसल बरसात के पानी के साथ मिट्टी व मलबा बहकर आता है, गेट नहीं लगने व लोहे की प्लेट फंसने से यह मिट्टी व मलबा निकल नहीं पा रहा, अप स्ट्रीम की तरफ जमा होता जा रहा है। खरायता गांव की तरफ के छोर पर तो एनीकट की गहराई काफी कम हो गई है। यहां तो पानी में मलबा साफ तौर पर दिखाई देता है।


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