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संस्कार के बिना व्यक्ति की शिक्षा बेकार: आर्यिका माताजी

एक वर्ष पहले
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जजावर. कस्बे के जैन समाज द्वारा होली पर सभी जीवों के कल्याण, समाज, गांव, देश-प्रदेश में समृद्धि-अमन की कामना करते हुए पार्श्वनाथ जैन मंदिर में आर्यिका अंतसमती माताजी के सानिध्य में पहली बार कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया।

पिछले माह 13 फरवरी को जहाजपुर में आचार्य ज्ञानसागर महाराज द्वारा आर्यिका के पद पर दीक्षित हुई। आर्यिका अंतसमती माताजी ने श्रावकों से कहा कि श्रावक को जहां तक संभव हो, वहां तक रोजाना देव दर्शन का नियम तो पालना ही चाहिए। देव शास्त्र गुरु पर आस्था एवं श्रद्धा रखते हुए संस्कारित जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि शिक्षा के बाद संस्कार आए, लेकिन संस्कार के बिना व्यक्ति की शिक्षा बेकार है। उन्होंने बताया कि कल्याण मंदिर विधान जैन धर्म में बहुत प्राचीन विधान है। आगम के अनुसार यह विधान व्यक्ति एवं समाज हित में बहुत महत्व रखता है। उधर, स्थानीय जैन समाज अध्यक्ष प्रवीणकुमार जैन ने बताया कि विधान से पूर्व यहां मूलनायक एवं अतिशयकारी भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा का जलाभिषेक-शांतिधारा की गई। भक्तिपूर्वक संगीतमय विशेष पूजा-अर्चना के साथ 48 दीपकों से कल्याण मंदिर विधान की विधिवत रूप से स्थापना की गई। जिसके बाद आर्यिका अंतसमती माताजी के सानिध्य में विधान की पूजा पूरी हुई।
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