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लाखेरी बोर्ड पर भ्रष्टाचार के आरोप, पार्षद बाेले-ऐसा कोई बताओ जिसने पाप ना किया हो

Bundi News - नगर पालिका बोर्ड की बैठक में पार्षदों ने खुलेआम घटिया निर्माण-निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। बोर्ड...

Feb 15, 2020, 10:05 AM IST
lakheri News - rajasthan news accusations of corruption on lakeri board councilor belle tell someone who has not sinned

नगर पालिका बोर्ड की बैठक में पार्षदों ने खुलेआम घटिया निर्माण-निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। बोर्ड बैठक बजट अनुमानों पर चर्चा पर बुलाई थी, लेकिन एक साल बाद हुई बोर्ड की बैठक में पार्षद मुखर रहे।

पार्षद विनोद बैरवा ने निर्माण कार्य-शौचालय बनाने, नियम विरुद्ध निर्माण के आरोप लगाए। आरोप लगते देख चेयरमैन केवल जांच करवाएंगे कहती दिखी। पार्षद राधेश्याम मीणा ने कहा कि पालिका के मौजूदा बोर्ड के पास एक भी ऐसी उपलब्धि नहीं है, जिसे सीना ठोक कर कहा जा सके कि यह काम जनहित में बड़ी उपलब्धि है। पालिका ने नाली-पटान पर दस करोड़ रुपए खर्च कर दिए, लेकिन बड़ा काम नहीं करा पाए।

पार्षद विनोद बैरवा ने कहा कि पालिका ने स्वच्छता मिशन के तहत घरों में शौचालय बनाने का काम संवेदक से कराया, लेकिन निर्माण आज भी अधूरा है, जबकि संवेदक ने मिलीभगत करके एक लाख 86 हजार रुपए का भुगतान उठा लिया। पार्षदों ने समय-समय पर इसकी शिकायतें की। चेयरमैन व ईओ जांच करवाने की बाते कहते रहे, जबकि पार्षद अधूरे शौचालय की वीडियो रिकाॅर्डिंग सदन में बताते रहे। इस दाैरान पार्षद राजेंद्र सैनी ने पानी का गिलास लेकर रोटी फिल्म का गीत गाते हुए कहा कि सदन में ऐसा कौन है, जो भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं है। सबने भ्रष्टाचार कर रखा है। आरोप वो लोग लगाए, जो लिप्त नहीं हो। इस पर पार्षद रूखसार पठान, पवन गोयनका खड़े होकर पाक साफ होने की दुहाई देने लगे। दरअसल पालिका में पिछले ढाई साल में पार्षदों पर भी आरोप लगते रहे हैं कि वे वार्डो में होने वाले कार्यो में दखल करके हितपूर्ति करते रहे हैं। पालिका को घटिया निर्माण के बावजूद संवेदक को भुगतान करने की अनुशंसा करते हैं। कुछ पार्षदों के अाॅडियाे भी बताए गए हैं।

झींकरा डालने को लेकर बैठक में उठे सवाल

बोर्ड बैठक में सबसे चर्चित झींकरा प्रकरण में सदन में सत्ता पक्ष मौन रहा तो विपक्ष के कुछ पार्षदों ने कहा कि पालिका में राजनीति से प्रेरित एक संवेदक ने बिना झींकरा डाले बड़ा भुगतान उठा लिया। पालिका ने आनन-फानन में 5 लाख रुपए की झींकरा डालने की निविदा जारी की थी, लेकिन महज 20 ट्राॅली झींकरा ही डाला गया और 55 ट्राॅली झींकरे का बिल उठा लिया गया। साथ ही 25 अन्य ट्राॅली झींकरे के बिल को लेकर पार्षद बनाम एक संवेदक द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। पालिका ने इससे पूर्व दूसरे संवेदक से दो लाख रुपए का झींकरा डलवाया था। पार्षदों ने सवाल उठाया कि बरसात में अब तक पालिका मात्र दो लाख रुपए में यह काम करती आ रही थी। चर्चा है कि सरकार बदलने पर भाजपा के बोर्ड के राजनीतिक अवरोधों की सुरक्षा के लिए यह निविदा निकाली गई। पार्षदों के कहने पर भी इसकी फाइल को इधर-उधर कर रखा है।

पालिका प्रशासन में संवेदकों का राज

बोर्ड बैठक में पार्षदों ने सफाईकर्मियों की नियुक्त में कथित रूप से दस-दस हजार रुपए लेने के वीडियो वायरल होने की बात आई। नेता प्रतिपक्ष मनीष सैनी ने एक सफाई कर्मचारी की नियुक्ति दो साल से अटकाना कहकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। राजेश तंवर ने कहा कि सफाईकर्मियों के पीएफ के 27 लाख रुपए के गबन पर पालिका को दोषी ठहराया। पालिका के एक संवेदक ने कर्मचारियों के खाते में पीएफ राशि जमा ही नहीं की, जबकि कर्मचारी लंबे समय से इसकी मांग कर रहे हैं। पार्षद साहिल व सौरभ शर्मा ने संवेदक द्वारा पार्षद को निर्माण कार्य रोकने पर कहा कि ऐसा लगता है कि पालिका प्रशासन में पार्षद नहीं बल्कि संवेदकों का राज है। इस पर ईओ ने संवेदक को नोटिस देने व निर्माण कार्य की जांच करवाने की बात बताई।

नगरपालिका का 60 करोड़ 90 लाख का बजट पारित, कमाई बढ़ाने पर जोर

लाखेरी. अनुदानों अाैर सरकारी सहायता पर चलने वाली नगर पालिका का आगामी वित्तीय वर्ष का 60 करोड़ 90 लाख रुपए का बजट पारित कर दिया गया है। नगर पालिका बोर्ड की एक साल बाद शुक्रवार काे बैठक रखी गई, जिसमें चेयरमैन कुसुमलता महावर ने वर्ष 2020-21 के अनुमानित बजट अनुमान प्रस्तुत किए।

पार्षद राजेश तंवर, राधेश्याम मीणा व विनोद बैरवा ने पूछा कि नगर पालिका को कितनी आमदनी हुई तो सदन में बताया गया कि पिछले वित्तीय वर्ष में पालिका को कोई खास बड़ी आमदनी नहीं हो पाई है। पालिका को बैठक, टैक्स, तहबाजारी व सामुदायिक भवनों से होने वाली आय ही होती है, वह भी काफी कम होती है। इस आमदनी से ज्यादा तो नगर पालिका रखरखाव पर खर्च कर देती है। पालिका को नियमित ठोस आमदनी नहीं हो रही है। पार्षदों ने कहा कि पालिका को आमदनी बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। ईओ मुकेश नागर ने पालिका की कमाई बढ़ाने के सुझाव मांगे।

एसीसी से वसूला जाए नगरीय कर: सदन में पार्षदों ने पूछा कि एसीसी से नगरीय टैक्स से कितनी आमदनी होती है। इस पर अध्यक्ष ने बताया कि एसीसी से चालीस लाख रुपए वार्षिक की आमदनी बनती है, लेकिन एसीसी ने टैक्स के खिलाफ स्टे ले रखा है। इसके चलते महज 10 लाख रुपए ही जमा किए जाते हैं। इस पर पार्षदों ने पूछा कि किस कोर्ट में विवाद है, लेकिन इसकी जानकारी उजागर नहीं की गई। हालांकि एसीसी ने कलेक्टर के यहां वाद दायर कर रखा है। पार्षद राजेश तंवर, विनोद बैरवा व राधेश्याम ने कहा कि पालिका की कमजोर पैरवी के चलते 5 वर्षो से इस विवाद का निबटारा नहीं हुआ है, जबकि यह राज्य सरकार द्वारा लगाया गया वैधानिक टैक्स है।

प्रदूषण-उत्पादन पर टैक्स लगाएं: पार्षदों ने कहा कि जब एसीसी राज्य सरकार द्वारा लगाए गए टैक्स अदायगी में कानूनी पेच फंसाकर उलझा रही है तो पालिका को भी नियम बनाकर टैक्स लगाने की योजना बनानी चाहिए। राज्य सरकार ने पालिकाओं को अधिग्रहित कर रखा है, जिसमें बाइलाज बनाकर प्रदूषण-उत्पादन पर टैक्स लगाया जा सकता है। पार्षद विनोद बैरवा ने कहा कि एसीसी फैक्ट्री प्रतिदिन एक लाख सीमेंट के कट्टे का उत्पादन करती है। शहर-आसपास के इलाकों में भारी प्रदूषण कर रही है। माइंस एरिया में ब्लास्टिंग से लोगों को काफी नुकसान हो रहा है। फिर भी पालिका प्रशासन कोई ठोस समाधान नहीं कर रहा है। पालिका को जनहित में ठोस निर्णय लेने होंगे।

लाखेरी. बोर्ड बैठक में भ्रष्टचार के मुद्दे पर घिरते पार्षद।

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