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ढाकणी गांव में 15 बीघा में बनेगा आयुर्वेदिक औषधि उद्यान
जिले में आयुर्वेद वनौषधि उद्यान की 9 साल बाद फिर से प्रशासनिक तैयारी शुरू हुई है।
हिंडौली तहसील के ढाकणी गांव में खसरा संख्या 224 की 18 बीघा जमीन में से 15 बीघा भूमि 12 अक्टूबर 2012 काे औषधि उद्यान के लिए आवंटन की थी। आयुर्वेद विभाग की ओर से इसका कब्जा नहीं किया गया ताे अतिक्रमियों ने कब्जा कर लिया था। आयुर्वेद विभाग अब औषधि उद्यान तैयार करने के लिए जागा और कलेक्टर और हिंडौली एसडीएम से आयुर्वेद के औषधि उद्यान की जमीन से अतिक्रमण हटाकर कब्जा दिलाने की गुहार लगाई। गुरुवार को अायुर्वेद के उपनिदेशक डॉ. हेमंतकुमार शर्मा मय टीम के इस भूमि का निरीक्षण करने हिंडौली तहसीलदार के साथ गए।
उल्लेखनीय है कि आयुर्वेद पद्धति को बढ़ावा देने के लिए 1980 के आसपास प्रदेश के कई जिलों में वनौषधि उद्यान खोलने की योजना बनी थीं। मकसद था कि औषधि पौधे आयुर्वेदाचार्यों-कार्मिकों की देखरेख में ही उगे। इनसे आयुर्वेद दवाइयां बनाकर यहीं पर काम ली जा सके। इसके लिए ढाकणी में 15 बीघा जमीन दी गई थी। आयुर्वेद विभाग के उच्चाधिकारी 9 साल तक केवल फाइलों में कागज दौड़ाते रहे। अब विभागीय अधिकारियों को फिर औषधि उद्यान की याद आई है।
15 में से 4 बीघा जमीन एनएच में चली गई
समय रहते आयुर्वेद विभाग के आयुर्वेदिक उद्यान की भूमि को कब्जे में नहीं लेने से इसमें से चार बीघा जमीन तो एनएच 52 के निर्माण में चली गई है। आयुर्वेद विभाग के पास बजट का अभाव होने से इसकी चारदीवारी नहीं करा विभाग की ओर इसके लिए कलेक्टर व एसडीएम हिंडौली काे पत्र लिखा। उपनिदेशक डॉ. हेमंत शर्मा ने बताया कि जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराकर सबसे पहले इसकी चारदीवारी कराई जाएगी, ताकि दुबारा अतिक्रमण नहीं हो। उद्यान में वनौषधि प्लाट तैयार किए जाएंगे, जिससे आयुर्वेद दवाएं तैयार की जाएगी। इसमें एलोवीरा, तुलसी, नीम गिलोय, अर्जुन, मुलेठी, सतावरी, सफेद मुसली जैसे औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।
ढाकणी में आवंटित जमीन में आयुर्वेद औषधि उद्यान का निर्माण कराने के लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज रखा है। भूमि का मुआयना किया है। बजट मिलते ही जमीन से अतिक्रमण हटाकर चारदीवारी बनाकर आयुर्वेदिक औषधि का निर्माण करवाया जाएगा।- डाॅ. हेमंतकुमार शर्मा, उपनिदेशक, आयुर्वेद विभाग