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बूंदी उत्सव का आनंद फीका कर देंगी टूटी सड़कें, जिस मार्ग पर ज्यादा टूरिस्ट प्वाइंट, वही है सबसे ज्यादा खराब

Bundi News - रजत जयंती वर्ष पर 15 नवंबर से शुरू हो रहे बूंदी उत्सव को भव्य बनाने की तैयारियां चल रही हैं। तीन दिन का बूंदी उत्सव...

Nov 11, 2019, 07:40 AM IST
रजत जयंती वर्ष पर 15 नवंबर से शुरू हो रहे बूंदी उत्सव को भव्य बनाने की तैयारियां चल रही हैं। तीन दिन का बूंदी उत्सव बढ़ाकर 15 दिन का कर दिया गया है, पर यह आनंद शहर की टूटी सड़कें फीका कर देंगी। यूं तो शहर की ज्यादातर सड़कें खस्ताहाल हैं, खासकर उस इलाके बालचंदपाड़ा की, जिसमें सबसे ज्यादा पर्यटक ठहरते हैं और उस मार्ग की जिस पर सबसे ज्यादा पर्यटनस्थल हैं। इन सड़कों पर कब बाइक स्लिप हो जाए, कहा नहीं जा सकता।

मीरा साहब के बाग-जैत सागर सड़क की हालत कई साल से इतनी खराब है कि उस पर चलना जोखिम से कम नहीं। इतने गड्ढे हैं कि गिने भी नहीं जा सकते। कई तो इतने चौड़े हैं कि कार खड़ी कर दें और इतने गहरे भी कि छोटा बच्चा आसानी से समा जाए। इस सड़क मार्ग पर पर्यटन स्थल जैत सागर झील, सुखमहल म्यूजियम, टेरेस गार्डन, स्मृति कुंज, शिकार बुर्ज, पॉट्री विलेज ठीकरदा हैं तो श्रद्धास्थल चौथमाता मंदिर और रामेश्वर महादेव भी हैं। बूंदी उत्सव के दौरान इस रूट पर भी पर्यटकों के लिए कई आयोजन होंगे, साथ ही बूंदी उत्सव के दौरान आनेवाले पर्यटक इस मार्ग से इन टूरिस्ट पाइंट्स को देखने भी जाएंगे। ऐसे में उन्हें परेशानी तो होगी ही, साथ ही एक गलत संदेश लेकर भी जाएंगे। जिन लोगों के लिए बूंदी उत्सव मनाया जा रहा है, उन्हें परेशानी हो या वे गलत संदेश लेकर जाएं तो यह बूंदी के हर बाशिंदे के लिए गर्दन झुकनेवाली बात होगी।

बूंदी. मीरा बाग,जैतसागर हाेते हुए गुजरने वाली सड़क की गणेश घाटी के पास खराब हालत।

गांवों का भी प्रमुख रास्ता यह सड़क, रोज 5 हजार से ज्यादा लोग गुजरते हैं: मीरा साहब का बाग-जैत सागर सड़क पर्यटन के लिहाज से तो महत्वपूर्ण है ही, यह काफी गांवों को जाने का प्रमुख मार्ग भी है। इस मार्ग से छोटी-बड़ी डेढ़-दो हजार गाड़ियां रोज गुजरती हैं। यह मार्ग देई, नैनवां, बांसी, दुगारी, गोठड़ा, मेंडी, अलोद, दबलाना जाने का प्रमुख मार्ग भी है। छोटे, बड़े करीब 150 गांव इससे जुड़े हैं। काफी संख्या में दूधिए, नौकरीपेशा, किसान और दूसरे अन्य रोजगार के लिए रोज बाइक-स्कूटी से बूंदी आते-जाते हैं। स्कूटी-बाइकवालों के लिए तो मीरा गेट से जैतसागर तक का सड़क से गुजरना सजा से कम नहीं। आए दिन दो-चार दुपहिया सवार तो गड्ढों में गिरते ही हैं। इस बार ज्यादा बरसात के बाद इस हिस्से में ज्यादा गहरे गड्ढे हो गए हैं। जिम्मेदार अधिकारी, क्षेत्र प्रतिनिधि हालात से वाकिफ हैं, दर्जनों बार इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन करते कुछ नहीं हैं।

लोग बोले- गड्ढों और उड़ती धूल से होती है परेशानी: ठीकरदा की टीना शर्मा का रोज इस मार्ग से गुजरना होता है। टीना गांव से शहर करीब छह साल से रोज पढ़ने और अब प्राइवेंट स्कूल पढ़ाने बूंदी आती है। वे कहती हैं गड्‌ढों और उड़ती धूल से बहुत परेशानी होती है, सड़क जल्दी ठीक कराई जाए और नहीं तो गड्‌ढों में मिट्‌टी ही डलवा दी जाए। इसी मार्ग से गुजरनेवाले हरिओम शर्मा, धनराज सैनी बताते हैं कि इस सड़क पर गड्‌ढे इतने ज्यादा हैं कि वे भी कई बार गिरकर चोटिल हो चुके हैं। नौकरपेशा, खरीदार, छात्र-छात्राएं या अन्य काम से गांव से शहर आनेवालों को दिन में दो बार तो इधर से गुजरना ही पड़ता है। हमेशा जान सांसत में रहती है।

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