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सरकारी कॉलेज खाेलने की घाेषणा से हिंडाैली में जश्न, जबकि नैनवां में छात्र आंदोलन की तैयारी
राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री की अाेर से हिंडाैली में सरकारी कॉलेज खोलने की घोषणा के बाद हिंडाैली उपखंड इलाके में खुशी का माहौल है, वहीं नैनवां के बाशिंदाें में भगवान आदिनाथ जयराज मारवाड़ा कॉलेज को सरकारी दर्जा नहीं मिल पाने से हताशा है।
नैनवां कॉलेज को सरकारी दर्जा दिलाने की घोषणा एक साल पहले राज्य बजट में की गई थी, जो अब तक अधूरी ही है। नैनवां के बाशिंदाें का कहना है कि घोषणा कागजी ही रह गई। स्ववित्तपोषी योजना के तहत चल रहे मारवाड़ा कॉलेज को सरकारी दर्जा देने की राज्य की कांग्रेस सरकार दो बार घोषणा कर चुकी है, जाे अब तक घोषणा ही है। काॅलेज के नाम 75 बीघा 8 बिस्वा भूमि है। सरकारी काॅलेज के लिए मापदंड के मुताबिक जरूरी भवन व सुविधाएं मौजूद हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा चुनाव से पूर्व 26 जुलाई 013 को मारवाड़ा कॉलेज को सरकारी दर्जा देने की घोषणा की थी। यहां तक कि सरकारी करने की अधिसूचना तक जारी कर दी गई थी। इससे शहर-उपखंड के गांवों के छात्र-छात्राओं में उम्मीद जाग उठी थी। तब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और भाजपा सरकार बन गई। 26 सितंबर-2014 को भाजपा सरकार ने काॅलेज को सरकारी करने की अधिसूचना को डीनोटिफाइड कर उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 5 साल बाद फिर गहलोत सरकार आई। अपने पहले ही बजट में 10 जुलाई 019 को फिर मारवाड़ा कॉलेज को सरकारी दर्जा देने की घोषणा की गई। इस पर लोगों ने खूब खुशियां मनाई, नैनवां आए राज्यमंत्री अशोक चांदना के स्वागत में लोगों ने पलक पांवड़े बिछा दिए, पर घोषणा पर अमल नहीं हुआ। हिंडाैली में सरकारी कॉलेज की घोषणा पर स्थानीय लोगों का कहना है कि नैनवां कॉलेज को सरकारी दर्जा भी दिया जाता तो खुशी दोगुनी हो जाती। सरकारी कॉलेज की फाइल वित्त विभाग में अटकी हुई है।
65 किमी तक कोई सरकारी कॉलेज नहीं: नैनवां उपखंड मुख्यालय से 65 किमी के दायरे में कोई सरकारी काॅलेज नहीं। मारवाड़ा कॉलेज की फीस सरकारी काॅलेज के मुकाबले चार गुना अधिक होने के कारण कमजोर तबके के छात्र-छात्राएं एडमिशन नहीं ले पाते और उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ती है या कर्ज लेकर प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन लेना पड़ता है। सरकारी दर्जे के लिए लोग लगातार आवाज उठाते रहे हैं, अब तक तीन बार आंदोलन कर चुके हैं। गत वर्ष काॅलेज को सरकारी दर्जे की मांग को लेकर छात्र व जनांदोलन हुआ था। यहां तक कि नैनवां शहर बंद रखा गया। गांव भी इस मांग से जुड़े।
कॉलेज को भी 33 लाख से ज्यादा का घाटा: घोषणा के बाद भी मारवाड़ा काॅलेज तो सरकारी नहीं हुआ, पर राज्यमंत्री चांदना के निर्देश पर छात्रों की फीस सरकारी काॅलेज के बराबर प्रति छात्र 1500 रुपए ली गई। इससे काॅलेज को 33 लाख 55 हजार की फीस का घाटा उठाना पड़ा। कालेज प्राचार्य डॉ. पकंज गुप्ता कहते हैं...काॅलेज में करीब 700 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। प्रति छात्र 6100 रुपए फीस तय है, जो 42 लाख 70 हजार रुपए होती है। यह फीस काॅलेज संचालन में खर्च होती है। सत्र 2019-20 में काॅलेज में सरकारी फीस लेने के कारण 10.50 लाख रुपए ही जमा हुए। अब इसकी पूर्ति कॉलेज प्रबंधन को जमापूंजी से करनी पड़ रही है।
आज एबीवीपी की बैठक: मारवाड़ा काॅलेज को सरकारी करने की मांग को लेकर एक बार फिर शहर में छात्र आंदोलन की आहट सुनाई देने लगी है। एबीवीपी ने रविवार को बैठक रखी है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा कर आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
हिंडाैली में मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाई
हिंडाैली. उपखंड मुख्यालय पर सरकारी कॉलेज खोलने की घोषणा से जश्न का माहौल है। क्षेत्र के छात्र-छात्राएं कॉलेज की पढ़ाई के लिए बूंदी, कोटा, देवली सहित दूसरे शहरों में जाते हैं या पढ़ाई ही छोड़ देते हैं। खासकर छात्राओं को पढ़ाई छुड़वा दी जाती है। अब उम्मीद जगी है। हिंडाैली में कॉलेज खुलने से रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। कोचिंग संस्थान भी खुलेंगे, व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। शनिवार को भी मिठाइयां बंटी। महेश सोमानी, कालू जोशी, प्रदीप शर्मा, हनुमान व्यास, पप्पू गुर्जर, संजय चौहान, मोनू राठौर, महेश गुर्जर, भैरूलाल सैनी, ओमप्रकाश सुवालका ने मिठाइयां बांटी।