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धर्मरूपी जहाज पर आ जाअाे, मिट जाएंगे सारे दुख: मुनिश्री

एक वर्ष पहले
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कस्बे के श्रेयांसनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में विराजे मुनिश्री विश्रांतसागर महाराज के सानिध्य में समवशरण महामंडल विधान कराया जा रहा है। इसका आगाज शुक्रवार सुबह घटयात्रा के साथ हुआ। घटयात्रा में महिला मंडल कलश लेकर केसरिया परिधान में सज-संवरकर शामिल रही। नवयुवकत्रयुवतियां नृत्य करते चल रहे थे। घटयात्रा के गढ़ पैलेस में पहुंचने पर ब्र. पुण्यांश भैया के निर्देशन-मुनि विश्रांतसागर महाराज के सानिध्य में ध्वजारोहण की क्रियाएं हुई। मुनिश्री के सानिध्य में मंडप उदघाटन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन हुए।

समवशरण में विराजमान मुनि विश्रांतसागर महाराज ने कहा कि अनादिकाल से यह जीव संसार समुद्र में गोते लगाते हुए चौरासी लाख योनियों में भ्रमण कर अनंत दुखों को भोग रहा है। यमराज के द्वारा हर बार मारा जाता है। यदि यह जीव धर्मरूपी जहाज का सहारा ले ले तो भवसागर से तिर जाएगा।

जैसे-एक पक्षी समुद्र में उड़ान भर रहा था। उड़ान भरते-भरते थक गया, वह नीचे समुद्र में गिरकर मरने ही वाला था कि एक जहाज का सहारा मिल गया और वह पक्षी जहाज के सहारे से समुद्र से पार हो गया। उसी तरह मनुष्य संसार में अनेक प्रकार की क्रियाओं की उड़ानें भरता है और उसे बाद में यमराज उठाकर ले जाता है। इसी तरह यदि यह जीव धर्म रूपी जहाज पर सवार हो जाए तो इसे गुरु रूपी नाविक भवसागर से पार उतार देते हैं, लेकिन यह मूर्ख प्राणी पाप करते हुए संसार में डूबकी लगाता रहता है। इसे गुरु रूपी नाविक समझाते हैं कि हे मानव! इस धर्मरूपी जहाज पर आ जा, मैं तुम्हें भव पार लगा दूंगा। इस दौरान समवशरण विधान की पूजन हुई। जिसमें इंद्र-इंद्राणियों द्वारा अर्घ्य समर्पित किए। शाम को गुरुभक्ति एवं आरती व ब्र. पुण्यांश भैया द्वारा प्रवचन किए। इसके बाद दिल्ली से आए कलाकारों द्वारा मनोहारी नाटिका प्रस्तुत की गई। इससे पहले राजेंद्र पाटनी ने दीप प्रज्ज्वलित कर धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ किया।

ध्वजारोहण नवनीत कटारिया के परिजनों ने व मंडप उदघाटन पदमचंद वीरेंद्रकुमार व चित्र का अनावरण महावीर पाटनी ने किया। मुनिश्री की देखरेख में गुरुभक्ति, आरती, शास्त्रसभा व सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए।

घटयात्रा पर की पुष्पवर्षा

घटयात्रा शुरू हाेने पर कापरेन का माहौल धर्ममय हो गया। परंपरागत रूप से केसरिया परिधान में सज-संवरकर महिलाएं शामिल हुई। ढोल-नगाड़ों की थाप पर कदमताल मिलाकर चल रही थी। कुछ युवतियां भजनों की धुन पर नृत्य करती चल रही थी।

कार्यक्रम में ये बने किरदार

जैन समाज के अायाेजन में किरदार निभाने वालों में सोधर इंद्र अशोककुमार-सीमा नगेदा, धनपति कुबेर शैलेंद्र-अनीता कोटिया, यज्ञ नायक नागेंद्र-सुनीता कोटिया, ईशान इंद्र अभिलाष-शीला सोनी, सनात इंद्र राजेश-मंजू, इंद्र महेंद्रकुमार-सुमन शाह, द्रव्य दातार महावीर-उषा शाह, मंगल कलश स्थापना राजेंद्र-मधु गर्ग, ब्रह्मइंद्र रमेश-राजरानी नगेदा, ब्रहोतर इंद्र हेमंत-कविता पापड़ीवाल, लत्तव इंद्र मनोज-पूजा शाह, कापिष्ट इंद्र मनोज बाकलीवाल-मेैना, शुक्र इंद्र राजेश-मीना नगेदा, केला महासुक्र इंद्र नरेंद्र पाटनी-मनोरमा, सत्तार इंद्र महावीर-चंद्रकला सोनी, सहस्त्रइंद्र अनिल- उषा नगेदा, आनत इंद्र छोटूलाल-निर्मला गोदा, प्रनाथ इंद्र मोहनलाल-तारा पापडीवाल, आरण इंद्र अनिलकुमार-आशा कटारिया, अच्युत इंद्र विनोद-सीमा सोनी बने।

कापरेन. जैन समाज के महामंडल विधान में शामिल समाजबंधु और महिलाएं।
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