पानी के कारण गई युवती की जान, बोरिंग के स्टार्टर में करंट से मौत, अस्पताल में हंगामा

Bundi News - बाहरली बूंदी रैगर मोहल्ले की 18 वर्षीया डिंपल रैगर की करंट से मौत हो गई। सुबह 11 बजे वह पानी भरने मोहल्ले में बोरिंग...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:45 AM IST
Bundi News - rajasthan news death of a woman due to water death in a starter in boring disorder in hospital
बाहरली बूंदी रैगर मोहल्ले की 18 वर्षीया डिंपल रैगर की करंट से मौत हो गई। सुबह 11 बजे वह पानी भरने मोहल्ले में बोरिंग पर गई थी। बोरिंग का स्विच दबाते ही करंट आ गया। मोहल्लेवाले अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

बोरिंग पर उस वक्त 10-12 महिलाएं भी पानी भरने के लिए खड़ी थी, लेकिन बोरिंग के पास लगी टंकी खाली थी, डिंपल ने टंकी भरने के लिए बोरिंग का बटन दबाया, करंट आ गया। महिलाएं चिल्लाई तो माेहल्लेवासी पहुंचे। छत पर तार हटाया, तब तक डिंपल की मौत हो चुकी थी। मोर्चरी के बाहर मोहल्लेवासी और दलित समाज के नेता जुट गए। मृतका के परिवार को बिजली निगम और प्रशासन से आर्थिक सहायता दिलाने के आश्वासन मिलने तक पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। दो-ढाई घंटे वे मोर्चरी के बाहर कलेक्टर को बुलाने की मांग करने लगे। फिर रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे और एडीएम से मिले। फिर मोर्चरी के बाहर तहसीलदार, जेईएन पहुंचे। रैगर समाज के जिलाध्यक्ष बाबूलाल वर्मा, चुन्नीलाल चंदोलिया, डिंपल के चाचा-पार्षद कमलेश रैगर से वार्ता की। नेताओं का कहना था कि प्रशासन और बिजली निगम भी मुआवजा दे। जेईएन ने वास्तविक रिपोर्ट बनाने, तहसीलदार ने एज पर रूल मुआवजे का भरोसा दिलाया, तब वे पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए।

डिंपल वर्मा

बूंदी. करंट से युवती की मौत के बाद जिला अस्पताल में विलाप करते परिवारजन

पहले हुए हादसे से सबक नहीं

बोरिंग के स्टार्टर में कई बार करंट आ जाता था। पहले भी प्रकाश रैगर स्टार्टर का बटन दबाते वक्त चिपक गया था, गनीमत रही कि ऐनवक्त लाइट चली गई तो जान बच गई। उसके शरीर पर करंट से जलने के निशान हैं। मोहल्ले के सत्यनारायण के अनुसार वाटर वर्क्स भी मौत का जिम्मेदार है। पानी बराबर मिलता तो बोरिंग पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। रैगर मोहल्ले में 450 घर हैं। पानी सप्लाई समय पर नहीं होती, होती है तो पर्याप्त पानी नहीं आता। ऐसे में मोहल्ले में नगरपरिषद ने एमएलए कोटे से बोरिंग लगा रखा है, यही एक सहारा है। अमृत योजना में नई लाइन भी चालू नहीं की गई। पीएचईडी ने पहले हादसे के बाद मोहल्लेवालों के कहने पर भी स्टार्टर नहीं बदला। मोहल्लेवाले अधिकारियों के पीछे नहीं लगे, स्टार्टर खुद के खर्च पर बदलवा लेते। बोरिंग का पहले कनेक्शन था। बिल जमा नहीं हुआ तो काट दिया। प्यास बुझाने के लिए लोगों ने सीधे कनेक्शन कर लिया। लोगों का कहना है कि नगरपरिषद ने बोरिंग कराया तो कनेक्शन का भी जिम्मा लेती। नगरपरिषद का कहना है कि उसका काम बोरिंग लगाना है, उसकी मेंटीनेंस, बिल की जिम्मेदारी मोहल्ला कमेटी की होती है।

करंट के डर से कोई पास नहीं आया: प्रत्यक्षदर्शी सोनू रैगर के मुताबिक मेरे घर के सामने बोरिंग लगा हुआ है। कई माह से मोहल्ले में पानी की समस्या है। सप्लाई समय पर नहीं होती, इसलिए पूरा मोहल्ला इसी बोरिंग से पानी भरता है। डिंपल पानी भरने के लिए स्विच चालू करने लगी कि करंट आ गया। मुंह से आवाज तक नहीं निकली, तड़पती रही। महिलाओं ने चिल्लाना शुरू कर दिया। मैं भी वहीं था, करंट के डर से कोई छुड़ाने आगे नहीं बढ़ा। मैं प्लास लेकर छत पर गया और कनेक्शन काटा। इस बीच डिंपल को करंट ने दूर फेंक दिया। शरीर में हलचल नहीं थी। उसके मां-पिता भी घर पर नहीं थे। पिता टेलरिंग की दुकान, मां बड़ी सब्जीमंडी में सब्जी खरीदने गई हुई थी। मोहल्लेवाले अस्पताल लेकर गए।

पिता करते हैं टेलरिंग, मां घर-घर सब्जी बेचती है: मोहल्लेवासियों ने बताया कि डिम्पल के परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है। परिवार में 4 बेटियां और 1 बेटा है। पिता पुरुषोत्तम टेलरिंग करते हैं और मां घर-घर सब्जी बेचती है। उससे ही घर चलता है। पिता डिंपल के लिए अच्छा वर देख रहे थे। उनका कहना था कि डिंपल ने हमारे साथ बहुत दुख देखा है, उसे ऐसा ससुराल मिल जाए, जहां सुखी रह सके। डिंपल पढ़ाई में इंटेलीजेंट थी। वह 9वीं की छात्रा थी। घर के काम और पढ़ाई में लगी रहती थी। भाई-बहनों को भी पढ़ाती थी। मां-पिता अस्पताल में रोते हुए कहने लगे डिंपल परिवार की मुखिया थी, वहीं सारा काम संभालती थी।

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